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खामेनेई मारे गए तो क्यों सड़क पर उतरे कश्मीरी मुसलमान? असली वजह जानिए

आयतुल्ला अली खामेनेई, कश्मीर को लेकर बेहद मुखर थे। उनके बयानों की वजह से कूटनीतिक स्तर पर भारत और ईरान के बीच हमेशा मतभेद रहे।

Khamenei Death Protest

आयतुल्ला खामेनेई की मौत के बाद भारत में प्रदर्शन हो रहे हैं। Photo Credit: PTI

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आयतुल्ला अली खामनेई की मौत पर भारत में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कश्मीरी मुसलमान 'इमाम खत्म हो गए, रहबर मारे गए', जैसे नारे लगा रहे है। कश्मीरी मुसलमानों का कहना है कि अमेरिका ने मुस्लिमों की पीठ में खंजर भोंका है। जम्मू और कश्मीर में मुस्लिमों का एक बड़ा तबका, विरोध प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे हैं। 

खामेनेई को शिया मुसलमान, आयतुल्ला अली खामनेई को बेहद सम्मान की नजरों से देखते थे। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में वह तब मारे गए, जब अपने दफ्तर में बैठकर वह जवाबी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर रहे थे। रविवार को कश्मीर के कई हिस्सों में प्रदर्शन शुरू हैं। शिया बहुल इलाकों में सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं।

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जम्मू-कश्मीर शिया एसोसिएशन ने उनकी मौत पर शोक जाहिर किया है। लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। संस्था ने कहा, 'हम इमाम खामेनेई के परिवार के सदस्यों की शहादत पर शोक मनाते हैं। हमारी दुआएं लीडर और ईरान के लोगों के साथ हैं।'

क्यों हो रहा है प्रदर्शन?

कश्मीरी मुस्लिम समुदाय के प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्वक सड़कों पर मार्च किया। अमेरिका और इजरायल विरोधी नारे लगाए। अली खामेनेई, कश्मीरी मुस्लिमों की मुखर आवाज रहे हैं। उन्होंने कश्मीरी मुस्लिमों पर 'गाजा' जैसी प्रताड़ना का आरोप भारत पर लगाया है।

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आयतुल्ला खामनेई की मौत पर रोती कश्मीरी महिलाएं। Photo Credit: PTI

आयतुल्ला खामेनई, सर्वोच्च लीडर, ईरान
हम खुद को मुसलमान नहीं मान सकते अगर हम म्यांमार, गाजा, भारत या किसी दूसरी जगह पर किसी मुसलमान की मुश्किलों से अनजान हैं।
यह बयान सितंबर 2024 का है। 

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क्यों कश्मीरी मुसलमान, खामेनेई को पसंद करते हैं?

जम्मू और कश्मीर में शिया मुसलमान बाहुल हैं। शिया,'विलायत-ए-फकीह' को मानते हैं। उनका मानना है कि इमाम के बाद आयतुल्ला ही मुस्लिमों का मार्गदर्शन करते हैं। उन्हें ही सत्ता संभालने का हक है। साल 1979 में जब तरक्कीपसंद ईरान में इस्लामिक क्रांति भड़की और शाह परिवार बेदखल हुआ तो यह तबका खुश हुआ था। 

 

 

आयतुल्ला खामनेई की मौत पर रोती कश्मीरी महिलाएं। Photo Credit: PTI

यह धार्मिक विचारधारा, बेहद मजबूत है। शिया मुस्लिमों का एक तबका इस पर यकीन जताता है और उन्हें अपना आध्यात्मिक नेता मानता है। श्रीनगर और बडगाम के कई इलाकों में उनकी तस्वीरें लहराई जा रही हैं।

 

 

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आयतुल्ला खामनेई की मौत पर रोते कश्मीरी मुसलमान। Photo Credit: PTI

राजनीतिक वजह क्या है?

आयतुल्ला अली खामेनेई, दुनिया के उन गिने-चुने नेताओ में शामिल रहे हैं, जो कश्मीर पर खुलकर बोलते थे। वह अक्सर, कश्मीर को फिलिस्तीन और यमन जैसी जगह बता देते हैं। कश्मीरी मुस्लिमों के एक तबके को लगता है कि वह उनकी आवाज उठाते थे।

आयतुल्ला की दुश्मनी इजरायल और अमेरिका से रही है। मुस्लिम, 'उम्माह' में भरोसा रखते हैं। मुस्लिम एकता के हिमायती थे। लोग उन्हें अपना नेता मानते थे। उनके जाने के बाद कश्मीर समेत पर मुस्लिम बाहुल कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं।  

 

 

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आयतुल्ला खामनेई की मौत पर रोते कश्मीरी मुसलान। Photo Credit: PTI

इतिहास से भी है कनेक्शन

कश्मीर को 'ईरान-ए-सगीर' कहा जाता है। इसका मतलब, छोटा ईरान होता है। कश्मीर में इस्लाम के प्रचार और प्रसिद्धि में ईरानी सूफियों और इस्लामिक विद्वानों की बड़ी भूमिका रही है। ईरान में फारसी भाषा, कला और संस्कृति का भी गहरा असर देखने को मिलता है।  


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