जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षाबलों के लिए एक स्थानीय आतंकी मोहम्मद लतीफ भट लागतार चुनौती बना हुआ है। पुलिस का दावा है कि वह इकलौता सक्रिय स्थानीय आतंकी है, जो हर बार सुरक्षा एजेंसियों को धोखा देकर फरार हो जा रहा है।
मोहम्मद लतीफ कुलगाम का रहने वाला है। वह कश्मीर घाटी में सक्रिय है और लगातार पाकिस्तानी आतंकियों के साथ संपर्क में है। सुरक्षा बल उसके लिए बड़े स्तर पर तलाश अभियान चला रहे हैं। अभी तक जांच एजेंसियों की पकड़ से वह फरार है।
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कश्मीर में कितने आतंकी बचे हैं?
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब पांच साल पहले जम्मू-कश्मीर में 50-60 सक्रिय स्थानीय आतंकवादी थे। मई 2025 में यह संख्या घटकर 17 रह गई थी। अब सिर्फ लतीफ भट ही बचा है। वहीं, करीब 40-50 विदेशी आतंकवादी अभी भी सक्रिय बताए जा रहे हैं।
कौन है मोहम्मद लतीफ भट?
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि लतीफ भट पर छत्तीसगढ़ के 2 प्रवासी मजदूरों की हत्या का आरोप है। 22 जुलाई को एक हेड कांस्टेबल की गोली मारकर हत्या करने में भी वह शामिल रहा है और अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की योजना भी वह तैयार कर चुका है। वह हर बार, स्थानीय लोगों की मदद से बच जा रहा है और पुलिस को धोखा दे रहा है। लतीफ भट लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन कश्मीर रिवोल्यूशन आर्मी (KRA) से जुड़ा हुआ है। वह जाकिर अहमद गने के साथ काम कर रहा था। दिसंबर 2025 में भी वह एक बार पहले बच निकला था।
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कैसे पुलिस को धोखा देकर भागा आतंकी?
8 जुलाई को अनंतनाग के जंगलों में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में लश्कर-ए-तैयबा का कैटेगरी-A आतंकवादी जाकिर अहमद गने मारा गया। लतीफ भट उसके साथ था, लेकिन वह घेराबंदी से भाग निकलने में सफल हो गया। यह कार्रवाई ऑपरेशन शेरावाली का हिस्सा थी।
बोरे में छिपाकर रखा हथियार, फिर किया हमला
हेड कांस्टेबल अशीक हुसैन और दो मजदूरों भूपेंद्र भैना और दीपक रात्रे की हत्या करने वाले हमलावर ने टोपी पहनी थी। हथियार बोरे में छिपाकर रखा था और बेहद करीब से गोली मारी थी। तलीफ भट का भी अंदाज ऐसा ही है। वह स्थानीय लोगों को बचा रहा है।
क्या कश्मीर का युवा आतंक का रास्ता छोड़ रहा है?
सुरक्षा बलों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में आतंकवादियों पर सख्त कार्रवाई और आतंकवादी घटनाओं को रोकने के लिए NIA की जांच की वजह से स्थानीय युवाओं की भर्ती काफी कम हो गई है। अब युवा आंतक का रास्ता छोड़कर, अमन की राह पकड़ रहे हैं।