दक्षिण अफ्रीका की जज नवनेथम 'नवी' पिल्लै को साल 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला है। वह 85 साल की हैं। 9 अक्टूबर को ओस्लो में नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने नोबल शांति पुरस्कार का एलान किया है दिया। समिति ने कहा कि उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए चुना गया है।
समिति के मुताबिक नवी पिल्लै ने सरकारों और राष्ट्राध्यक्षों को हिंसा और संघर्ष के लिए मजबूती से जवाबदेह ठहराया। उन्होंने हिंसा और संघर्ष के पीड़ितों को उम्मीद भी दी। समिति ने उनके लंबे करियर में मजबूत नैतिक सोच का जिक्र करते हुए नोबल शांति पुरस्कार देने का एलान किया है।
नोबल समिति ने कहा कि रंगभेद का विरोध करने वाले नेल्सन मंडेला और अन्य लोगों का बचाव करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों के अहम मामलों में न्यायाधीश बनने तक उनके काम में एक जैसी निष्ठा और सच्चाई दिखती है।
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कौन हैं नवी पिल्लै?
नवी पिल्लै का जन्म और पालन-पोषण दक्षिण अफ्रीका के डर्बन शहर में तमिल मूल के परिवार में हुआ। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और रंगभेद के खिलाफ खड़े आम लोगों के मुकदमे लड़ने लगीं। साल 1967 में उन्होंने अपनी लॉ फर्म शुरू की। 1980 के दशक में उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की और 1988 में वहां से डॉक्टर ऑफ ज्यूरिडिकल साइंस की डिग्री ली।
कैसा रहा है कानूनी करियर?
साल 1995 में उन्हें दक्षिण अफ्रीका के हाईकोर्ट में नियुक्त किया गया। इसके बाद वह रवांडा के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण (ICTR) की न्यायाधीश और अध्यक्ष बनीं। यौन हिंसा, बलात्कार और प्रोपेगैंडा फैलाने को भी मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोपों का आधार मानने वाले फैसलों में वह शामिल रहीं हैं। नोबेल वेबसाइट के अनुसार इस फैसले में उनकी अहम भूमिका रही।
कैसे ICC तक पहुंची?
नवी पिल्लै अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की न्यायाधीश बनीं। वह 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की ह्युमन राइट्स कमिश्नर रहीं। साल 2019 में वे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में म्यांमार पर नरसंहार के आरोप वाले मामले में तदर्थ न्यायाधीश बनीं।
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फैसले जो सुर्खियों में रहे
नवी पिल्लै ने 2021 से 2025 तक कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच आयोग की अध्यक्षता भी की। इस आयोग ने पिछले साल निष्कर्ष निकाला था कि इजारयल ने गाजा में नरसंहार किया है। इजरायल ने रिपोर्ट को शर्मनाक बताकर खारिज कर दिया था।
कैसा रहा है इस बार का नोबल पुरस्कार?
नोबेल समिति को 287 उम्मीदवारों के नामांकन मिले थे। इनमें से चौथाई से कुछ ज्यादा संगठन थे। इस हफ्ते घोषित होने वाला यह पांचवां नोबेल पुरस्कार है। इससे पहले साहित्य, रसायन, भौतिकी और चिकित्सा के पुरस्कार घोषित हो चुके हैं। पिछले साल यह पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को मिला था।
शांति पुरस्कार की राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोना है। यह करीब 1.2 मिलियन डॉलर बैठती है। पुरस्कार 10 दिसंबर को ओस्लो में दिया जाएगा। नोबल पुरस्कार, अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर दिए जाते हैं। उन्होंने 1895 की अपनी वसीयत में इन पुरस्कारों की शुरुआत की थी।