सुप्रीम कोर्ट में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया था, जब कानून के एक छात्र प्रबल प्रताप सिंह ने भारत के चीफ जस्टिस को गाली दे दी थी। अब आरोपी छात्र प्रबल प्रताप को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। प्रबल पर आरोप लगा है कि उन्होंने कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान गाली दी थी। साथ ही कोर्ट में कागज फेंककर अव्यवस्था फैलाई, जिससे वहां हंगामा खड़ा हो गया। इस वजह से सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मचारियों ने पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने प्रबल और उनके एक साथी चंद्र भान को भी गिरफ्तार किया।
यह मामला 10 जुलाई का है, जब कोर्ट नंबर 13 में प्रबल प्रताप सिंह ने हंगामा किया था। इस कोर्ट रूम में प्रबल प्रताप सिंह एक याचिकाकर्ता के रूप में आए थे, जिन्होंने कथित तौर पर कोर्ट की कार्यवाही में बाधा डाली थी। इसके अलावा इस घटना में दूसरा छात्र चंद्र भान भी शामिल था। अब सवाल उठता है कि ये छात्र कौन हैं, जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं।
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कौन हैं प्रबल प्रताप और चंद्र भान?
प्रबल प्रताप और चंद्र भान लखनऊ विश्वविद्यालय में वकालत की पढ़ाई कर रहे हैं। 24 साल के प्रबल प्रताप सिंह कॉलेज के थर्ड ईयर में पढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ 23 साल के चंद्र भान दूसरे साल के विद्यार्थी हैं। पुलिस के मुताबिक, प्रबल प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले हैं। इन दोनों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी, जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो रही थी। इस मामले की सुनवाई में प्रबल खुद याचिकाकर्ता के तौर पर शामिल हुए थे।
कोर्ट में किया हंगामा
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कोर्ट की सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप ने जज को 'मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट' कहा था। इसके बाद उन्होंने कहा, 'मैं आपको आदेश देता हूं।' साथ ही प्रबल प्रताप ने कोर्ट रूम में कागज फेंके, जिससे पूरे कोर्ट रूम में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसके बाद सिक्योरिटी गार्ड ने प्रबल को कोर्ट रूम से बाहर निकालने की कोशिश की, तो प्रबल ने कथित तौर पर अपशब्दों का प्रयोग किया।
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इस घटना को लेकर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि छात्र कई बार ऐसा कर देते हैं, हालांकि कोर्ट रूम में मर्यादा बनाए रखनी चाहिए, ताकि देश का लोकतंत्र मजबूत बना रहे।