भारतीय जनता पार्टी (BJP) वरिष्ठ नेता प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह धमेंद्र प्रधान की जगह लेंगे। धमेंद्र प्रधान ने शनिवार को
NEET
-UG 2026 पेपर लीक विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
प्रह्लाद जोशी के पास उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नये और नवीकरणीय ऊर्जा का भी मंत्रालय है। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभालनी होगी। पद संभालने के तत्काल बात उन्होंने कहा, 'वह इस जिम्मेदारी को कर्तव्य और विनम्रता के भाव से स्वीकार करते हैं।'
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प्रह्लाद जोशी:-
पिछले चार-पांच वर्षों में धमेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और कई महत्वपूर्ण काम किए। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं पूरी लगन से काम करूंगा।
कौन हैं प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के बीजापुर में हुआ था। उन्होंने हुबली में प्राथमिक शिक्षा की पढ़ाई की। वह रेलवे स्कूल और माध्यमिक शिक्षा न्यू इंग्लिश स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने श्री कदासिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज, हुबली से कला स्नातक की डिग्री हासिल की। राजनीति में आने से पहले वह व्यवसाय जगत से जुड़े थे।
सियासत कैसे शुरू हुई?
प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। 2004 से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 2019 से 2024 तक वह संसदीय मामलों, कोयला और खान मंत्रालय संभाल चुके हैं। 2024 चुनाव के बाद उन्हें उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय दिए गए।
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क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब शिक्षा मंत्रालय पेपर लीक विवाद की वजह से चर्चा में है। केंद्र सरकार पहले ही सुधारों की घोषणा कर चुकी है, जिसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को फिर से व्यवस्थित करना, पेपर लीक रोकने के सख्त उपाय और 2027 से NEET को कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनाना शामिल है।
चुौनितियां क्या हैं?
नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी इन सुधारों को लागू करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आगे बढ़ाने और परीक्षा प्रणाली में छात्रों का विश्वास बहाल करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
प्रह्लाद जोशी की ये कहानियां जानते हैं?
ह्लाद जोशी शुरू में एक उद्योगपति थे, लेकिन 1990 के दशक में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 1992 से 1994 तक हुबली के इदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने के आंदोलन का नेतृत्व किया। उसी समय उन्होंने 'सेव कश्मीर मूवमेंट' का भी नेतृत्व किया, जिससे वे कर्नाटक के इस क्षेत्र में चर्चित चेहरा बन गए। इसके बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) का धारवाड़ जिला अध्यक्ष चुना गया। प्रह्लाद जोशी की पत्नी ज्योति जोशी हैं। उनकी तीन बेटियां है। उन्हें क्रिकेट और संगीत पसंद है।
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चुनाव के 'असली
धुरंधर
' हैं प्रह्लाद जोशी
प्रह्लाद जोशी ने पहली बार 2004 में 14वें लोकसभा चुनाव में धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस उम्मीदवार बीएस पाटिल को हराकर जीत हासिल की। उन्होंने इस सीट से लगातार तीन चुनाव जीते और फिलहाल धारवाड़ के सांसद हैं।
2009 के आम चुनाव में उन्होंने कर्नाटक की 28 लोकसभा सीटों में दूसरी सबसे बड़ी अंतर से जीत दर्ज की, जबकि उस साल कई मंत्री और सांसद हार गए थे। 2019 में उन्होंने धारवाड़ सीट एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से दोबारा जीती।
कैबिनेट सफर कैसा रहा है?
30 मई 2019 को प्रह्लाद जोशी ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें संसदीय मामलों का मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री बनाया गया। यह पदभार जून 2024 तक उनके पास रहा। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री बनाया गया।
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RSS के पुराने कैडर हैं प्रह्लाद जोशी
प्रह्लाद जोशी अपने पढ़ाई के शुरुआती दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं। बाद में वह संगठन छोड़कर पार्टी में गए। अब उनके पास 3 मंत्रमंडल है।