मोदी की रैली रोकी, अखिलेश ने CMO में रखा; फिर चर्चा में आए प्रांजल यादव कौन हैं?
साल 2014 में वाराणसी के डीएम रहे प्रांजल यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार चर्चा की वजह MLC चुनाव है लेकिन जगह एक बार फिर से वाराणसी ही है।

IAS प्रांजल यादव, Photo Credit: Social Media
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव हुए। वोटों की गिनती शुरू होने के लगभग 28 घंटे बीत चुके हैं लेकिन अभी भी दो सीटों के परिणाम बाकी हैं। इनमें से एक सीट वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की है। इसी सीट को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता प्रदर्शन करने लगे और एक IAS अधिकारी प्रांजल यादव पर आरोप लगाने लगे। यह नाम चर्चा में आने के बाद सोशल मीडिया पर खलबली मच गई है। इसकी वजह है कि 12 साल पहले इसी अधिकारी तब वाराणसी से लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार रहे नरेंद्र मोदी की रैली को अनुमति ही नहीं दी थी। अब उन्हीं प्रांजल यादव पर बीजेपी के नेताओं और समर्थकों ने आरोप लगाए हैं कि पर्यवेक्षक के रूप में वह समाजवादी पार्टी (सपा) की मदद कर रहे हैं। इन आरोपों के पीछे की अहम वजह है कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते प्रांजल यादव मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात थे और अखिलेश के करीबी अफसरों में गिने जाने लगे थे।
बुधवार को वाराणसी की पहाड़िया मंडी के बाहर जबरदस्त हंगामा हो गया। सपा और बीजेपी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पर्यवेक्षक प्रांजल यादव को हटाने की मांग कर डाली। खुद बीजेपी के प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने भी धरना दिया और प्रांजल यादव को हटाने की मांग की। हालांकि, बाद में उन्होंने धरना खत्म कर दिया। बता दें कि कभी मोदी की रैली रोकने और फिर सीएम रहे अखिलेश यादव के कार्यालय में तैनात होने वाले प्रांजल यादव को 2017 में योगी सरकार बनने के बाद कम प्रभाव वाले विभागों में ही रखा गया है।
क्यों रोकी थी नरेंद्र मोदी की रैली?
2014 का लोकसभा चुनाव होने वाला था। फरवरी 2013 में प्रांजल यादव वाराणसी के डीएम बने। उस समय सुगबुगाहट थी कि नरेंद्र मोदी अपना पहला लोकसभा चुनाव वाराणसी से लड़ सकते हैं ताकि पूरे उत्तर प्रदेश को साधा जा सके। मार्च 2014 में औपचारिक एलान हो चुका था कि नरेंद्र मोदी ही वाराणसी से बीजेपी के उम्मीदवार होंगे। नए नवेले डीएम प्रांजल यादव अपने काम से जनता के बीच लोकप्रिय हो रहे थे। अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने वाले प्रांजल यादव उस वक्त पूरे देश में चर्चा में आ गए जब उन्होंने नरेंद्र मोदी की एक रैली को अनुमति ही नहीं दी।
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दरअसल, वाराणसी के बनियाबेग में नरेंद्र मोदी की रैली होनी थी। इसी रेली को प्रांजल यादव ने अनुमति नहीं दी थी। इसके बारे में उनका कहना था, 'स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट और खूफिया इनपुट निगेटिव थे। यहां तक की सीएम की सुरक्षा में लगे DSP ने भी निगेटिव रिपोर्ट दी थी।' हालांकि, दिन भर चले हंगामे और बयानबाजी के बावजूद बीजेपी ने शाम को नरेंद्र मोदी का रोडशो आयोजित करवा लिया था।
एक रोचक बात है कि जब नरेंद्र मोदी ने अपना नामांकन दाखिल किया तो खुद प्रांजल यादव ने ही वह पर्चा स्वीकार किया था। इस पर AAP के मुखिया और वाराणसी से उम्मीदवार अरविंद केजरीवास समेत तमाम विपक्षी नेताओं ने उन पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा किया। तब केजरीवाल ने उन्हें बीजेपी समर्थक कह दिया है।
मई 2015 में एक इंटरव्यू के दौरान जब प्रांजल यादव पीएम बन चुके नरेंद्र मोदी की योजनाएं लागू कराने के लिए बनारस में काम कर रहे थे तो उनसे इस घटना के बारे में पूछा गया था। उन्होंने तब कहा था, 'पीएम के साथ मेरी मीटिंग में यह बात बिल्कुल नहीं आई।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनका वर्किंग रिलेशनशिप है।
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कैसा रहा है प्रांजल यादव का करियर?
साल 2006 बैच के IAS अधिकारी प्रांजल यादव 46 साल के हैं। वह उत्तर प्रदेश काडर के ही अधिकारी हैं और मूलत: उत्तर प्रदेश के ही रहने वाले भी हैं। उन्होंने आईआईटी रुड़की से मेकैनिकल इंजीनियरिंग में बी टेक किया है और अपने 20 साल के इस करियर में अब ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद तक पहुंच गए हैं। 2006 में वह 26 साल की उम्र में ही IAS अधिकारी बन गए थे।
अधिकारी के रूप में ट्रेनिंग के बाद जून 2007 में प्रांजल यादव को पहली पोस्टिंग प्रयागराज में मिली। तब उन्हें असिस्टेंट कलेक्टर बनाया गया था। फरवरी 2008 में उन्होंने महोबा में ज्वाइंट मैजिस्ट्रेट बनाया गया। उसी साल उन्हें सिद्धार्थ नगर जिले में ज्वाइंट कलेक्टर बनाया गया। फिर कुछ दिन तक मेरठ में भी ज्वाइंट कलेक्टर के तौर पर काम किया। मेरठ में ही वह मुख्य विकास अधिकारी बने। फरवरी 2011 में वह ऊर्जा विभाग में मैनेजिंग डायरेक्टर बने लेकिन कुछ महीने ही इस पद पर रहे।
कहां-कहां रहे DM?
2011 में ही वह पहली बार जिलाधिकारी के पद पर तैनात हुए। उन्हें पहला जिला रामपुर मिला था। लगभग एक साल बाद उनका ट्रांसफर महामाया नगर (हाथरस) में हो गया था। इसके बाद वह महाराज गंज और आजमगढ़ के भी जिलाधिकारी रहे।
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फरवरी 2013 में वह वाराणसी के डीएम बने थे और 3 अगस्त 2015 तक इस पद पर रहे। 2015 में उन्हें सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में स्पेशल सेक्रेटरी बना दिया गया था। यह तब की बात है जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनते ही प्रांजल यादव का ट्रांसफर हुआ और उन्हें स्टैंप एंड रजिस्ट्रेशन विभाग में स्पेशल सेक्रेटरी बना दिया गया।
2018 के जनवरी महीने में उन्हें स्किल डेवलपमेंट में MD बनाया गया। 2019 में वह नेशल इंटीग्रेशन डिपार्टमेंट सचिवालय में स्पेशल सेक्रेटरी बने और लगभग 4 साल से ज्यादा समय तक इसी पद पर काम किया। फिलहाल वह MSME विभाग में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात हैं और MLC चुनाव में उन्हें पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया है।
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