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जंगल में पली-बढ़ी, जानवरों जैसा रहन सहन, कौन थी 'मोगली गर्ल' अहसास?

उत्तर प्रदेश में 2017 में जंगल में एक लड़की मिली थी जिसका व्यहार इंसानों से काफी अलग था। इस लड़की को पूरे देश ने मोगली गर्ल के नाम से जाना लेकिन अब इसकी मौत हो गई है।

Mowgli girl

मोगली गर्ल, Photo Credit: Social Media

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उत्तर प्रदेश के जंगल में करीब एक दशक पहले एक लड़की मिली थी जिसने पूरे देश में 'मोगली गर्ल' के नाम से पहचान बनाई थी। वह अब इस दुनिया में नहीं रहीं। जंगल में अकेली मिली इस बच्ची की जिंदगी संघर्ष, इलाज और बदलाव की कहानी बन गई थी। 15 जून को लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में उनका निधन हो गया।

 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, फेफड़ों की बीमारी के कारण शरीर में संक्रमण फैल गया था, जिससे उनकी मौत हुई। मोगली गर्ल का निधन 18 साल की उम्र में हुआ है और करीब नौ साल पहले जब वह जंगल में मिली थी तो उसका व्यवहार बहुत अलग था। पूरे देश को उसने हैरान कर दिया था। 

 

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कौन थीं मोगली गर्ल?

मोगली गर्ल के नाम से मशहूर इस लड़की का असली नाम अहसास था और यह पहली बार जनवरी 2017 में चर्चा में आई थीं। उस समय उन्हें उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के मोतीपुर क्षेत्र में सड़क पर अकेले घूमते हुए देखा गया था। जब उन्हें पाया गया, तब उनका व्यवहार सामान्य बच्चों जैसा नहीं था। वह कई बार हाथ-पैर के सहारे चलती थीं, लोगों से दूरी बनाती थीं, कपड़े पहनने से मना करती थीं और आवाजों व इशारों से अपनी बात समझाने की कोशिश करती थीं।

 

उनकी हालत देखकर लोगों ने उनकी तुलना रुडयार्ड किपलिंग के काल्पनिक पात्र 'जंगल बॉय' से की की गई। इसी पात्र को हिंदी में 'मोगली' नाम दिया गया था। टीवी सीरियल 'जंगल बुक' में 'मोगली' एक ऐसा ही पात्र था जो कि जंगल में जानवरों के साथ पला था। इसी कारण इस लडकी को मोगली गर्ल नाम दिया गया। 

सामान्य बच्चों से अलग था व्यवहार

बचाव के बाद बहराइच की बाल कल्याण समिति ने उनका नाम पहले पूजा रखा था। बाद में लखनऊ के मोहन रोड स्थित निर्वाण राजकीय बाल गृह विशेषीकृत में उनका नाम बदलकर अहसास रखा गया। इसके बाद उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन इसी आश्रय गृह में बिताया। निर्वाण फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरेश सिंह धपोला के अनुसार, कई साल तक इलाज, देखभाल और पुनर्वास की मदद से अहसास में धीरे-धीरे बदलाव आया।

 

समय के साथ उन्होंने कपड़े पहनना सीखा, अपने देखभाल करने वालों को पहचानना शुरू किया और लोगों के प्यार को समझने लगी थी। उनका सबसे खास रिश्ता देखभाल करने वाली रानी से था। वह रानी को प्यार से अम्मा कहती थी।  रानी ने अपनी बेटी की तरह एहसास का ध्यान रखा और धैर्य के साथ उसका भरोसा जीता। रानी ने उनकी मौत पर कहा, 'वह मुझे अम्मा बुलाती थीं। मुझे हमेशा उम्मीद थी कि वह और बेहतर हो जाएगी। अब हमारे पास उनकी यादें ही बची हैं।'

 

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कैसे हुई मौत?

लंबे समय तक इलाज के बाद भी डॉक्टरों ने पाया कि उसका दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया था। इसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कतें थी। अहसास को बार-बार मिर्गी के दौरे भी आते थे और कई सालों तक उनका इलाज चलता रहा। 8 जून को तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एसीपी अनिंद्य विक्रम सिंह ने कहा, 'एहसास गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी और उसका इलाज चल रहा था। वह सबसे पहले 8 जून को बीमार पड़ी, जिसके बाद उसे राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ और 11 जून को उसे छुट्टी दे दी गई। इसके बाद उसे वापस रिहैबिलिटेशन सेंटर लाया गया।'

 

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद 15 जून को उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई। उन्हें दोबारा अस्पताल ले जाया गया, जहां पहुंचने के कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई। अहसास की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फेफड़ों की बीमारी के कारण हुआ सेप्टिसीमिया बताया गया है।   रिहैबिलिटेशन सेंटर के अधिकारियों ने पुलिस को बताया कि 15 जून को उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल गिरकर लगभग 40 प्रतिशत हो गया था। इसके बाद उसे तुरंत इमरजेंसी मेडिकल केयर के लिए लोहिया अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्तपाल में भर्ती करवाने के कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई। 

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