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आबादी में नंबर 1 हम, फिर भी आंध्र प्रदेश में चौथे बच्चे पर जोर क्यों?

भारत की आबादी 1.4 अरब है। संसाधन कम हों और आबादी ज्यादा हो तो देश की मुश्किलें बढ़ती हैं। आंध्र प्रदेश ज्यादा आबादी पर जोर क्यों दे रहा है? पढ़ें।

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देश में जनसंख्या नियंत्रण की बात हो रही है, आंध्र प्रदेश में जनसंख्या बढ़ाने की। Photo Credit: PTI

आबादी के मामले में भारत ने अब चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों बताते हैं कि भारत की जनसंख्या 1,425,775,850 तक पहुंच गई है, जो चीन की आबादी से कहीं ज्यादा है। भारत की आधिकारिक 10 वर्षीय जनगणना भले ही न हुई हो लेकिन यह तय है कि भारत, आबादी के मामले में दुनिया में सबसे बड़ा देश है। बढ़ती आबादी की चिंताओं के बीच, देश का एक राज्य ऐसा भी है जो लोगों से अपील कर रहा है कि वे चौथा बच्चा पैदा करें।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को एक बड़ा ऐलान किया है। अब परिवार में दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकार नकद राशि देगी। सरकार तीसरे और चौथे बच्चे के लिए प्रोत्साहन राशि और ज्यादा पैतृक और मातृ अवकाश देने पर विचार कर रही है। यह फैसला, भारत जैसे देश में, जहां मेट्रो से लेकर एयरपोर्ट तक, अस्पताल से लेकर मंदिर तक भीड़ ही भीड़ नजर आती है, काफी चौंकाता है। सरकार संतुलित आबादी की बात कर रही है लेकिन आंध्र प्रदेश ज्यादा आबादी की बात कर रहा है। 

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तीसरे बच्चे पर 30 हजार, चौथे पर 40 हजार का इनाम

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एलान किया है कि तीसरे बच्चे के जन्म पर 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपये तुरंत दिए जाएंगे। वह श्रीकाकुलम जिले के नरसन्नपेटा में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऐसा वादा किया, जो सुना वह चौंक गया। पहले चंद्रबाबू नायडू परिवार नियोजन की लोगों से अपील करते थे लेकिन अब उन्होंने कहा है कि समय बदल गया है।

चंद्र बाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश:-
बच्चे ही हमारी असली संपत्ति हैं। अब हमें बच्चों के लिए मेहनत करनी होगी। एक समय था जब मैंने परिवार नियोजन के लिए बहुत काम किया था। आज, बच्चे हमारी संपत्ति हैं। एक बार फिर, हम सभी को बच्चों के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। मैंने एक फैसला लिया है। तीसरे बच्चे के लिए, हम जन्म के तुरंत बाद 30,000 रुपये देंगे। चौथे बच्चे के लिए, हम 40,000 रुपये देंगे।

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क्यों सरकार ऐसा करना चाहती है?

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का कहना है कि आंध्र प्रदेश में कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.5 प्रतिशत रह गई है। यह बच्चों की संख्या बनाए रखने के लिए जरूरी दर 2.1 प्रतिशत से काफी कम है। अगर यही स्थिति रही तो 2047 तक राज्य की 23 प्रतिशत आबादी 60 साल से ऊपर हो जाएगी। इससे काम करने वाले लोगों की कमी और पेंशन-मेडिकल खर्च बढ़ने का खतरा है। 

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भारत में बढ़ती आबादी के बीच जनसंख्या नियंत्रण पर सरकारें जोर देती रहीं हैं। Photo Credit: PTI

आबादी बढ़ाने के लिए सरकार की योजना क्या है?

चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने आबादी बढ़ाने का पूरा खाका तैयार किया है। उनका एलान, सिर्फ कैश इनाम तक नहीं है, बल्कि बच्चों के पोषण पर भी उन्होंने जोर दिया है। सरकार ने एलान किया है कि अब तीसरे बच्चे को 5 साल तक हर महीने 1,000 रुपये पोषण भत्ता, 18 साल तक मुफ्त शिक्षा और माता-पिता को 12 महीने का 'पैरेंटल लीव' भी मिलेगा। सरकार की योजना है कि जब बच्चे का जन्म होगा तो पिता को 2 महीने की अनिवार्य छुट्टी भी दी जाएगी। राज्य में फर्टिलिटी क्लिनिक भी खोले जाएंगे। 

कम आबादी से डरती क्यों है सरकार?

घटती जनसंख्या से दुनिया की हर सरकार डरती है। चीन में जब 'वन चाइल्ड पॉलिसी' लागू हुई तो अचानक से बूढ़ों की आबादी बढ़ने लगी। युवा और काम करने लायक लोगों की संख्या घटती चली गई। चीन ने वन चाइल्ड पॉलिसी को अलविदा कह दिया।  कम आबादी के कई आर्थिक और सामाजिक नुकसान हैं। कम आबादी होने से निर्भरता दर बढ़ती चली जाती है। काम करने की उम्र अभी तक के मानकों के हिसाब से 15 से 64 साल समझी जाती है। युवा आबादी की तुलना में जब बुजुर्ग आबादी बढ़ती है तो राज्य पर और व्यक्ति, दोनों पर बोझ बढ़ता है। पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भारी बोझ पड़ता है। कई रिपोर्ट में कहा गया है कि अब चीन में वन-चाइल्ड पॉलिसी की वजह से पेंशन फंड 2035 तक खत्म हो सकता है। 

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कम होती आबादी की वजह से श्रम संकट बढ़ता है। श्रमिकों की संख्या गिरने से अर्थव्यवस्था गिरती है और उत्पादन प्रभावित होता है। परिवहन, अस्पताल और स्कूल महंगे पड़ते हैं। इनके बंद होने का खतरा मंडराता है। अगर बाजार सीमित है तो इनोवेशन भी कम होता है, इस्तेमाल करने वाले लोग कम होते हैं। आर्थिक विकास धीरे-धीरे धीमा पड़ जाता है। ग्रामीण इलाकों में कम जनसंख्या घनत्व से स्कूल, अस्पताल और बुनियादी ढांचा बनाए रखने में मुश्किलें आती हैं। लोग पलायन करने लगते हैं। जापान, इटली और दक्षिण कोरिया जैसे प्रगतिशील देश इस त्रासदी से गुजर चुके हैं। आंध्र प्रदेश सरकार, इस संकट से पहले ही विषमताओं को ठीक करना चाहती है। 

सरकार उम्मीद में क्यों है?

तेलंगाना सरकार, आबादी बढ़ाने की इस योजना पर जल्द से जल्द काम करना चाहती है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि इस पूरी योजना की विस्तृत अधिसूचना एक महीने के अंदर जारी कर दी जाएगी। सरकार बच्चों को भविष्य की आर्थिक ताकत मानती है। अब नए तरीके से जनसंख्या प्रबंधन का नया रूप दे रही है।


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