logo

मूड

ट्रेंडिंग:

47,316 गांव कवर पर सिर्फ 16,759 को मिला आदर्श ग्राम का दर्जा, कहां चूक गया गणित?

30,557 से ज्यादा गांव आदर्श ग्राम के दर्जे के लिए तरस रहे हैं। वहां अभी मानक पूरे नहीं पाए गए है। पढ़ें रिपोर्ट।

Manaha Village Assam

मनाहा गांव, असम। Photo Credit:

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदर योजना (PM-AJAY) से देशभर में अनुसूचित जाति के लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। 'आदर्श ग्राम' योजना के तहत अब तक 47,59,399 गांवों को इसका लाभ मिला है। अब तक देश के कुल 16,759 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया जा चुका है। मंत्रालय का कहना है कि इन गांवों में 46,782 से ज्यादा विकास कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 24,133 गांव विकास योजनाएं तैयार की गई हैं।

अधिकारिता मंत्रालय ने शैक्षणिक सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 22.50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इनमें तीन छात्रावास बनाए जाएंगे, जिनमें से 2 लड़कियों के लिए हैं। इन तीनों छात्रावासों में कुल 750 छात्र-छात्राएं रह सकेंगे।

यह भी पढ़ें: भारत के पैसे चूस रहा सेमीकंडक्टर, नीति आयोग ने क्या सलाह दी?

कहां चूका आंकड़ा?

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 'आदर्श ग्राम' ने देशभर में 47,316 गांवों को कवर किया है, जिससे करीब 47.59 लाख अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को लाभ पहुंचने का दावा किया गया है। हालांकि, इनमें से सिर्फ 16,759 गांवों को ही पूरी तरह से 'आदर्श ग्राम' का दर्जा मिल सका है। 

सरकार ने कहा है कि 46,782 विकास कार्य पूरे हो चुके हैं और 24,133 गांवों के विकास योजनाएं तैयार की गई हैं, लेकिन कवर किए गए कुल गांवों में से दो-तिहाई से ज्यादा गांव अभी भी आदर्श ग्राम की मान्यता से दूर हैं। 

एक नजर, आंकड़ों पर

  • कवरेज प्लान: 47,316 गांव
  • दर्जा प्राप्त: 16,759 गांव
  • पाइपलाइन में: 30,557 गांव 

यह भी पढ़ें: स्कूल छोड़ते बच्चे, शिक्षक नदारद, नीति आयोग ने क्या खमियां गिनाई हैं?

क्या सवाल उठ रहे हैं?

आदर्श ग्राम की स्थिति पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर 47,316 गांवों को कवर करने के बावजूद केवल 16,759 गांवों तक ही दर्जा देने का गणित कहां चूक गया? विशेषज्ञ और स्थानीय स्तर पर कार्यरत संगठन अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि बाकी गांवों में बुनियादी ढांचा, सुविधाएं और गुणवत्ता जीवन स्तर सुधारने में कितना समय और संसाधन लगेगा।

क्यों आदर्श ग्राम का दर्जा नहीं मिल पाया? आइए समझते हैं-

ग्राम विकास योजना तैयार होने में देरी 

 सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक अभी तक 24,133 गांवों के लिए ही विलेज डेवलेपमेंट प्लान (VDP) तैयार हो पाया है। जब तक किसी गांव का VDP नहीं बनेगा, वहां काम शुरू नहीं हो सकता। इसका मतलब है कि 47,316 में से लगभग 23,183 गांवों में अभी प्लानिंग का काम ही पूरा होना बाकी है।

'कवरेज' और 'डिक्लेरेशन' के बीच के कड़े मानक

किसी भी गांव को योजना के तहत आने का मतलब है कि उसे सिर्फ चुना गया है, आदर्श ग्राम का दर्जा नहीं मिला है। आदर्श ग्राम का दर्जा तब तक नहीं मिलता, जब तक 3 मानक पूरे नहीं होंगे-

  • पेयजल और स्वच्छता 
  • बिजली और बारहमासी सड़कें
  • साक्षरता और स्वास्थ्य सेवाओं का तय मानक

किन गांवों ने पूरे किए हैं मानक?

16,759 गांवों ने इन मानकों को पार कर लिया है, जबकि बाकी 30 हजार से अधिक गांव अभी इस सीमा को छू रहे हैं। सरकार ने एक साथ सारे 47 हजार गांवों में आधा-अधूरे काम को देखकर ही सबको आदर्श ग्राम की लिस्ट में नहीं रख रही है। जिन गांवों में विकास काम पूरा हुआ है, उन्हें चुना जा रहा है। 

केंद्र-राज्य का तालमेल भी जिम्मेदार

PM-AJAY एक ऐसी योजना है जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से चलती है। कई राज्यों में जमीन आवंटन, सामुदायिक हिस्सेदारी और डिजिटल डेटा एंट्री की रफ्तार धीमी होने की वजह से गांवों को 'आदर्श' घोषित करने की अंतिम मंजूरी अटकी हुई है। 

आदर्श ग्राम का मतलब क्या है?

जिन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, सड़क, बिजली और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ समग्र विकास का मॉडल बनाया जाता है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का कहना है कि यह पिछड़े गांवों को मुख्यधारा में लाने की पहल है।

Related Topic:#Narendra Modi

और पढ़ें