जलकर, डूबकर और अब कुचलकर मरे लोग, दिल्ली की इमारतें जानलेवा हैं?
बीते कुछ साल में दिल्ली में आग लगने, बिल्डिंग गिरने और ऐसे ही अन्य कारणों से दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। तमाम आश्वासनों के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

दिल्ली में लगातार हो रहे हादसे, Photo Credit: Khabargaon
देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर से हादसा हुआ है। इस बार एक बिल्डिंग धराशायी हुई है और खबर लिखे जाने तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। देश की सत्ता का केंद्र कही जाने वाली दिल्ली में यह हादसा उस वक्त हुआ है जब BRICS सम्मेलन की तैयारियां चल रही हैं और एक खास इलाके में बने विश्व स्तरीय भारत मंडपम को इसकी मेजबानी के लिए सजाया-संवारा जा रहा है। बीते कुछ साल में कई अंतरराष्ट्रीय आयोजन कर चुकी इसी दिल्ली में दर्जनों लोग पहले तो पानी में डूबकर, फिर बिल्डिंग में लगी आग में जलकर और अब बिल्डिंग गिर जाने के चलते कुचलकर मर गए हैं। हर बार जांच, कार्रवाई और सुधार जैसे शब्द उछले लेकिन ये सारे शब्द अगले हादसे के शोर में दब जाने का इंतजार भर करते रह गए।
एक बार फिर से दिल्ली नगर निगम (MCD) निशाने पर है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने उसी MCD के खिलाफ प्रदर्शन किया जिसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) चला रही है। केंद्र, दिल्ली सरकार और MCD की सत्ता पर काबिज बीजेपी के रहते ही इन तीन में से दो हादसे हुए हैं। जुलाई 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर की एक कोचिंग के बेसमेंट में पानी भरने से बच्चों की मौत के बाद बीजेपी ने इसके लिए उस वक्त आम आदमी पार्टी (AAP) शासित MCD और दिल्ली सरकार को दोषी ठहरा रही थी। तब AAP के दफ्तर के खिलाफ बीजेपी ने प्रदर्शन भी किए थे। दो साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, सत्ता बदल गई है लेकिन लोग फिर से अप्राकृतिक मौत मरे हैं। बदला है तो सिर्फ उनके मरने का तरीका।
तीन हादसे खोल रहे पोल
1. ओल्ड राजेंद्र नगर में कोचिंग के बेसमेंट में डूबने से 3 की मौत (27 जुलाई 2024): दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर इलाके में चलने वाली एक कोचिंग Rau's IAS के बेसमेंट में पानी भर जाने के चलते 3 छात्र डूबकर मर गए थे। उस वक्त भी बिल्डिंग में अवैध तरीके से बेसमेंट बनाने, उसमें लाइब्रेरी खोलने और इस सबकी अनुमति मिल जाने की बात सामने आई थी। इस मामले में मैजिस्ट्रैट जांच के आदेश दिए थे।
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मैजिस्ट्रेट जांच में सामने आया कि बेसमेंट का गलत तरीके का इस्तेमाल हो रहा था। रिपोर्ट में लिखा गया कि नगर निगम और फायर डिपार्टमेंट को इसकी जानकारी थी इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। इतना ही नहीं, उसी महीने 1 जुलाई को फायर डिपार्टमेंट ने निरीक्षण भी किया ता लेकिन कार्रवाई नहीं की। साथ ही, बाहर के नालों की सफाई की जिम्मेदारी MCD की थी। जलभराव की आशंका होने के बावजूद MCD ने पांच साल में नालों की सफाई ही नहीं करवाई थी।
इस केस की जांच CBI को सौंपी गई और कोचिंग के मालिक अभिषेक गुप्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई। 28 जुलाई को अभिषेक गुप्ता समेत कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। सितंबर 2024 में अभिषेक गुप्ता को अंतरिम जमानत मिली और फिर फरवरी 2025 में उन्हें नियमित जमानत मिल गई।
नवंबर 2025 में दिल्ली के उपराज्यपाल ने फायर सेफ्टी विभाग के डिविजल अधिकारी वेद पाल और असिस्टेंट डिविजल अफसर उदयवीर सिंह को सस्पेंड कर दिया। इन दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए। हालांकि, यहां देखने की बात यह है कि हादसे के एक साल से भी ज्यादा समय के बाद यह कार्रवाई हुई। इस केस में MCD के दो इंजाीनियर समेत कई कर्मचारी सस्पेंड किए गए।

रोचक बात है कि जुलाई 2026 में CBI ने अपनी फाइनल रिपोर्ट पेश की। सीबीआई ने इस रिपोर्ट में MCD के दो वरिष्ठ अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी और माना कि उनकी तरफ से कोई चूक नहीं हुई थी। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में MCD के भवन विभाग के तीन अधिकारियों को दोषी बताया है। अब इन तीनों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चल रही है। इसमें से जूनियर इंजीनियर अर्णव कुमार दत्ता के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है।
2. मालवीय नगर के होटल में आग में 23 की मौत (3 जून 2026): दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में 3 जून 2026 को एक होटल कम रेस्तरां के निचले फ्लोर पर आग लगी। आग ऊपर तक फैली और पूरे होटल को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में कुल 22 लोगों की जान गई। होटल के मालिक लवकेश बजाज फिलहाल जेल में हैं और 4 सितंबर को ही कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज की है। हालांकि, इस केस में एक आरोपी को 27 जुलाई को जमानत मिल गई थी।
इस मामले में सामने आया था कि होटल को जितने कमरों की मंजूरी मिली थी उससे ज्यादा बेड किराए पर दिए जा रहे थे। साथ ही, यह होटल बिना फायर NOC के ही चल रहा था। इसी हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने B&B योजना बंद करने का फैसला लिया जिसके तहत लोगों को अपने घर में रेस्तरां और लोगों के रुकने का इंतजाम करने की अनुमति दी जा रही थी।
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हाल ही में तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दायर की गई है। इसी केस में MCD में संविदा पर काम करने वाले सहायक जन स्वास्थ्य निरीक्षक को नौकरी से निकाल दिया गया था। हालांकि, किसी भी बड़े अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एलान किया था कि बिना अनुमति के गेस्ट हाउस चलाने जैसी गतिविधियां करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सत्य निकेतन का हादसा बता रहा है कि ऐसी कार्रवाई करने में लापरवाही हुई है।
3. सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने से मौत (6 सितंबर 2026): ताजा हादसा सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने का है। इस हादसे में अभी तक 6 लोग मर चुके हैं और सामने आ रहा है कि बिल्डिंग को सील किए जाने के बावजूद इसमें पीजी चल रहा था। कई लोग घायल भी हुए हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में क्या कार्रवाई होगी? साथ ही, इस बात पर ज्यादा चर्चा होगी कि इसके बाद ऐसी इमारतों का क्या होगा?
जानलेवा हैं दिल्ली की इमारतें?
ये तीन हादसे दिखाते हैं कि दिल्ली की कई इमारतों में फायर सेफ्टी, सुरक्षित निर्माण और अन्य मानकों का पालन ना के बराबर किया गया। ऐसी कई अन्य घटनाएं भी हुईं जिनमें दिल्ली नगर निगम, फायर सेफ्टी विभाग और अन्य एजेंसियों के अधिकारी स्पष्ट तौर पर जिम्मेदार पाए गए। सबसे ज्यादा बार MCD की ही जिम्मेदारी सामने आई। हर साल खतरनाक इमारतों की जांच करके आंकड़े देने वाली MCD पर उस बीजेपी के नेताओं को ही भरोसा नहीं है जो इसे चला रही है। इस साल जब जून में MCD ने बताया कि कुल 27 लाख घरों का सर्वे हुआ और सिर्फ 19 इमारतें खतरनाक पाई गई हैं तो बीजेपी नेताओं ने ही इस पर सवाल उठा दिए।

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मानसून से पहले जब आंकड़े जारी किए थे तब तक 32.55 लाख में से कुल 27.84 लाख इमारतों का सर्वे हो चुका था। इसमें से 15 इमारतों को मेंटेनेंट विभाग ने तो 4 इमारतों को बिल्डिंग विभाग ने खतरनाक बताया था। रोचक बात है कि पिछले 7 साल में यह संख्या लगातार कम होती गई। 2021 में कुल 703, 2022 में 375, 2023 में 370, 2024 में 57, 2025 में 82 और 2026 में सिर्फ 19 इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया। यही वजह थी कि आंकडे़ आते ही बीजेपी नेता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि यह लापरवाही है। उन्होंने दिल्ली के मेयर और कमिश्नर को चिट्ठी लिखकर कहा कि सैकड़ों खतरनाक इमारतें तो सिर्फ पुरानी दिल्ली के ही इलाकों में हैं।
ना पहला हादसा, ना आखिरी?
सत्य निकेतन में हुए इस हादसे से पहले अगस्त 2023 में ओखला में बिल्डिंग गिरने से 2 लोगों की मौत हो गई थी। सितंबर 2024 में करोल बाग में बिल्डिंग गिरने से 4 लोगों की मौत हुई, जनवरी 2025 में बिल्डिंग गिरने से 5 की मौत हुई, अप्रैल 2025 में मुस्तफाबाद में 3 बच्चों की मौत हुई, मई 2025 में पहाड़गंज में दीवार गिरने से 3 की मौत हुई, अगस्त 2025 में घर की दीवार गिरने से जैतपुर इलाके के 6 लोग मर गए। इसी साल जुलाई 2026 में रोहिणी सेक्टर 16 में एक बिल्डिंग गिरने से 6 लोगों की और मई 2026 में साकेत में बिल्डिंग गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई थी।
इसी साल जून के महीने में फायर सेफ्टी विभाग ने बताया था कि उन्हें पिछले 5 महीने में ही बिल्डिंग गिरने से जुड़े 76 घटनाओं के बारे में फोन आए थे। 2025 में 544 और 2024 में कुल 464 हादसे हुए। इन हादसों में सिर्फ 2024 और 2025 में ही 46 लोगों की मौत हो गई।
कितना होता है ऐक्शन?
ऐसे हादसों के बाद हर बार कहा जाता है कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई होगी। हालांकि, बातों की तुलना में ऐक्शन कितना हुआ इसका जवाब आंकड़े देते हैं। दिल्ली नगर निगम ने साल 2025 में कुल 4766 अवैध निर्माण के खिलाफ केस दर्ज किए। इसमें से 3989 मामलों में ध्वस्तीकरण के आदेश दिए। हालांकि, इसमें से सिर्फ 22 को पूरी तरह से ध्वस्त किया गया। बाकी की 2249 इमारतों में थोड़ी-बहुत तोड़फोड़ ही की गई। 1023 संपत्तियों को सील भी किया गया। इन सभी पर अवैध निर्माण करने, बिल्डिंग प्लान और नियमों का उल्लंघन करने का आरोप था।
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फायर सेफ्टी और जल निकासी के मामले में भी लापरवाही
दिल्ली में बीते कुछ साल में आग लगने की खूब घटनाएं भी सामने आई हैं। खुद फायर विभाग के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली की कुल 898 में से सिर्फ 101 सोसायटी ऐसी हैं जिनके पास फायर सेफ्टी से जुड़ी NOC है। 73 सोसायटी में खामियां पाए जाने के चलते उनके आवेदन रद्द कर दिए गए। वहीं, 724 सोसायटी ने या तो रिन्यूअल नहीं कराया या फिर कभी NOC के लिए आवेदन ही नहीं किया।

नियमों के मुताबिक, 15 मीटर से ऊंची सभी बिल्डिंग यानी 4-5 फ्लोर वाली बिल्डिंग में इमरजेंसी एग्जिट, सीढ़ियां, वेंटिलेशन सिस्टम, छत तक आसान से पहुंचने की सुविधा, पानी की मोटर, फायर एक्सटिंगुइशर, बेसमेंट से निकलने की सुविधा और लिफ्ट की व्यवस्था होनी चाहिए। फायर सेफ्टी विभाग के मुताबिक, बिना NOC के चल रही सोसायटी वे हैं जो रजिस्टर्डर हैं और इनमें 18 से 20 लाख लोग रहते हैं। बता दें कि दिल्ली में 1500 से ज्यादा अवैध बस्तियां है और इनमें लगभग 40 से 50 लाख लोग रहते हैं। इन कॉलोनियों में फायर सेफ्टी, जल भराव की निकासी और बिल्डिंग की हालत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अभी तक इन इलाकों में जितने भी निर्माण होते रहे हैं उनके लिए DDA या MCD की ओर से कोई NOC जारी ही नहीं होता है तो उनकी गुणवत्ता के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
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