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'चीन बन सकता है खतरा', बलूचिस्तान से भारत को क्यों आया खुला पत्र?

बलोच नेता मीर यार ने भारत को खुल पत्र लिखकर बलूचिस्तान में चीन की बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान के साथ रणनीतिक संबंधों पर आगाह किया है। मीर यार का कहना है कि यह भविष्य में भारत और बलूचिस्तान के लिए बड़ा खतरा बनेगा।

External Affairs Minister S. Jaishankar and Mir Yar Baloch

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मीर यार बलोच। (Photo Credit: Social Media)

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मानवाधिकार कार्यकर्ता व बलूच नेता मीर यार बलूच ने नववर्ष के मौके पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखा। इसमें भारत के ऑपरेशन सिंदूर की जमकर तारीफ की गई। इसके अलावा बलूच नागरिकों के खिलाफ पाकिस्तान सेना के अत्याचार को जड़ से खत्म करने का आह्वान किया गया। बलूच नेता ने भारत और बलूचिस्तान के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया। पत्र में चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सहयोग का जिक्र है। वहीं भारत को आगाह किया गया है कि चीन बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात कर सकता है। यह तैनाती न केवल बलूचिस्तान, बल्कि भारत के सामने भी एक बड़ा खतरा होगी।

 

मीर यार बलूच ने लिखा, 'बलूचिस्तान के 6 करोड़ देशभक्त नागरिकों की तरफ से हम भारत के 140 करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और सभी सम्मानित व्यक्तियों को नए साल 2026 की हार्दिक बधाई देते हैं। यह शुभ अवसर उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वाणिज्यिक, आर्थिक, राजनयिक, रक्षा और बहुआयामी संबंधों पर विचार करने और उनका जश्न मनाने का मौका देता हैं, जिन्होंने सदियों से भारत और बलूचिस्तान को एक साथ बांधे रखा। हिंगलाज माता मंदिर स्थायी संबंधों के प्रतीक हैं। यह हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक संबंधों के शाश्वत प्रतीक के तौर पर खड़े हैं।'

 

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ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र

पत्र में पहलगाम हमले के बाद भारत के ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र है। बलूच नेता ने भारत के कदम की जमकर तारीफ की। मीर यार ने लिखा, 'हम पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के जरिये मोदी सरकार द्वारा उठाए गए साहसिक और दृढ़ कदमों की सराहना करते हैं, खासकर पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकी अड्डों को निशाना बनाने व पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ एक्शन की।'

'भारत को दोस्ती और विश्वास का भरोसा'

पत्र में पाकिस्तान सेना पर बलूच लोगों पर अत्याचार करने का आरोप लगाया गया। भारत से इलाके में स्थायी शांति और संप्रुभता को सुनिश्चित करने की अपील की गई है। इसमें लिखा है, बलूचिस्तान के लोग पिछले 77 वर्षों से पाकिस्तान के कब्जे, राज्य-प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकार अत्याचारों को सह रहे हैं। अब इस नासूर को जड़ से खत्म करने का समय आ गया है, ताकि स्थायी शांति और संप्रभुता सुनिश्चित की जा सके।

 

 

 

 

मीर यार ने कहा, बलूचिस्तान के लोगों की तरफ से हम भारत और वहां की सरकार को दोस्ती, विश्वास और आपसी हितों को बढ़ावा देने में अपना अटूट समर्थन दोहराते हैं। इसमें शांति, समृद्धि, विकास, व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, भविष्य की ऊर्जा चुनौतियां और छिपे हुए खतरों को कम करना भी शामिल है।

 

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चीन तैनात कर सकता अपनी सेना

पत्र में भारत और बलूचिस्तान के सामने उभरने वाले खतरों का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया कि पाकिस्तान और चीन के रणनीतिक गठजोड़ को बलूचिस्तान बेहद खतरनाक मानता है। अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता बलों को मजबूत नहीं किया गया। लंब समय के पैर्टन के मुताबिक नजरअंदाज किया गया तो यह संभव है कि चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियों को तैनात करना शुरू कर दे। छह करोड़ बलूचों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान के भविष्य के लिए एक चुनौती और खतरा होगा।

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