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ED बनाम TMC का झगड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, अब क्या रुख अपनाएंगी ममता बनर्जी?

ED और ममता बनर्जी के बीच पश्चिम बंगाल में एक छापेमारी के दौरान विवाद शुरू हुआ था। अब यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

Mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। Photo Credit: PTI

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पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों के लिए रणनीति तैयार करने वाली कंपनी आई-पैक में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड को लेकर सियासी हंगामा बरपा है। पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ईडी के बीच टकराव का यह मुद्दा, अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। प्रतीक जैन के घर हुई छापेमारी के बाद शुरू हुआ बवाल, पहले हाई कोर्ट पहुंचा, फिर अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। 

8 जनवरी 2026 को ईडी ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस का हिस्सा थी। ED का कहना है कि इस केस में करीब 10 करोड़ रुपये के गलत कमाए पैसे हवाला के जरिए I-PAC को पहुंचाए गए थे। 

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ईडी की रेड को लेकर शुरू हुआ था टकराव

I-PAC को तृणमूल कांग्रेस ने 2022 के गोवा चुनाव में काम के लिए पैसे दिए थे। I-PAC 2019 से TMC के साथ जुड़ी हुई है और अभी 2026 के विधानसभा चुनाव की रणनीति बना रही है। छापेमारी के दौरान अचानक ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के घर और फिर I-PAC ऑफिस पहुंच गईं। उनके साथ बड़े पुलिस अधिकारी भी थे। 

ईडी ने क्या आरोप लगाए हैं?

ED का आरोप है कि ममता बनर्जी ने वहां से महत्वपूर्ण कागजात और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जबरन छीन लिया, जिससे जांच प्रक्रिया में बाधा पहुंची। ED ने इसे जांच में बाधा डालने और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं। ईडी ने कहा है कि स्थानीय पुलिस ने भी ED अधिकारियों को जांच करने नहीं दिया, जिससे स्वतंत्र जांच नहीं हो पाई।

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ईडी की मांग क्या है?

ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। ED चाहता है कि या तो CBI जांच करे या कोई स्वतंत्र एजेंसी, क्योंकि राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इधर, पश्चिम बंगाल सरकार ने ED की चाल को भांपते हुए पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दिया है। कैविएट का मतलब है कि कोर्ट कोई आदेश देने से पहले राज्य सरकार को सुनें।

ईडी चाहती है ममता बनर्जी पर हो FIR?

कलकत्ता हाई कोर्ट में भी दोनों पक्ष पहुंचे थे। ED ने ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की, लेकिन हाई कोर्ट ने सुनवाई 14 जनवरी तक टाल दी। TMC और I-PAC ने भी काउंटर याचिका दाखिल की, जिसमें कहा कि जब्त किए गए दस्तावेज सिर्फ चुनाव की रणनीति से जुड़े हैं, इनका मनी लॉन्ड्रिंग से कोई लेना-देना नहीं। 

पश्चिम बंगाल में ईडी की रेड के खिलाफ रैली निकाल रहीं हैं ममता बनर्जी। Photo Credit: PTI

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TMC ने ईडी पर क्या आरोप लगाए हैं?

TMC ने ED पर आरोप लगाया कि वो राजनीतिक दस्तावेज चुराने की कोशिश कर रहा है।प्रतीक जैन के परिवार ने भी ED पर दस्तावेज चोरी का आरोप लगाया। कोलकाता पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ चोरी, घर में घुसना और IT एक्ट के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस CCTV फुटेज और गवाहों के बयान ले रही है। इस विवाद के बाद 9 जनवरी को ममता बनर्जी ने कोलकाता में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने बॉलीवुड बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े कलाकारों के साथ रैली निकाली। 

ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल:-
मैंने कुछ गलत नहीं किया। ED मेरे पार्टी के डेटा चोरी करने आई थी। मैंने सिर्फ अपनी पार्टी के गोपनीय दस्तावेज बचाए।

अब ममता बनर्जी के पास क्या विकल्प हैं?

ED का कहना है कि यह छापेमारी पूरी तरह कानूनी थी और इसमें कोई राजनीतिक मकसद नहीं है। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है। ED 12 जनवरी को चीफ जस्टिस के सामने इसे तुरंत सुनने की मांग कर सकता है, जिससे सबूतों को हासिल किया जा सके। पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी अब बढ़ गई है। 


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