US-भारत की डील हुई ही नहीं तो विरोध क्यों करने लगे किसान? हर सवाल का जवाब जानिए
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ पंजाब से हजारों किसानों ने भी दिल्ली की ओर कूच कर दिया है। किसानों का कहना है कि लंबे समय में इससे देश के किसानों को नुकसान होगा, उनकी कमाई कम हो जाएगी

भारत-अमेरिका ट्रेड डील, Photo Credit Chat GPT
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को हुए भारी बवाल के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन आज भी जारी है। दूसरी ओर भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ पंजाब से हजारों किसानों ने भी दिल्ली की ओर कूच कर दिया है। कई राज्यों के किसान 21 जुलाई को दिल्ली में 'किसान महापंचायत' करने निकले हैं। ये किसान भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। अभी भारत और अमेरिका के बीच यह समझौता हुआ नहीं है, बस इस पर बात चल रही है।
किसानों का कहना है कि समझौता होने के बाद बदलाव करना मुश्किल होगा इसलिए वे पहले ही इसका विरोध कर रहे हैं। किसान संगठनों की मांग है कि सरकार ऐसा कोई समझौता न करे, जिससे भारतीय कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों को नुकसान पहुंचे। वहीं दूसरी ओर सरकार कृषि को भारत के लिए 'रेड लाइन' बता रही है, उनका कहना है कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
यह भी पढ़ें: छात्रों के प्रदर्शन के बीच आज किसान करेंगे दिल्ली कूच, आखिर मांग क्या है?
क्या है भारत-अमेरिका ट्रेड डील?
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत चल रही है। इस तरह के समझौते में आमतौर पर दोनों देश कुछ सामानों पर टैक्स और व्यापार संबंधी रुकावटें कम करते हैं, ताकि कारोबार आसान हो सके। इसके तहत दोनों देश आपसी व्यापार को सरल बनाने के लिए टैरिफ, आयात कोटा और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त करते हैं। दोनों देशों के बीच कई महीनों से BTA पर बातचीत चल रही है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, सेवाएं, डिजिटल ट्रेड और कृषि जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं। इनमें से ज्यादा विवाद कृषि को लेकर चल रहा है।
इसकी जरूरत क्यों है?
यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच हो रहा है। दोनों देश आपस में व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। भारत और अमेरिका दोनों ही देश चाहते हैं कि कंपनियों के लिए सामान खरीदना-बेचना आसान हो, निवेश बढ़े और दोनों देशों के कारोबार को फायदा मिले। हालांकि कृषि क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। दोनों ही देश बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों देशों के बीच पहले से ही अरबों डॉलर का व्यापार चल रहा है लेकिन कई उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ और व्यापारिक नियमों की वजह से कारोबार में बाधाएं आती हैं। प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) इन बाधाओं को कम कर सकता है।
- भारत को क्या फायदा हो सकता है? इससे भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में ज्यादा पहुंच मिल सकती है। कपड़ा, दवा, इंजीनियरिंग और आईटी जैसे क्षेत्रों का निर्यात बढ़ सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।
- अमेरिका को क्या फायदा हो सकता है? वहीं इससे अमेरिका को भारत के बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। अमेरिकी कंपनियों के लिए निवेश और कारोबार आसान होगा। कृषि, डिजिटल सेवाओं और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में व्यापार बढ़ सकता है।
ट्रेड डील साइन हुई तो क्या होगा?
किसान संगठनों का कहना है कि अमेरिका में किसानों को सरकार से सब्सिडी और आधुनिक तकनीक मिलती है। इससे उनकी लागत काफी कम हो जाती है। वहीं भारत में अधिकतर किसान छोटे या मिडिल क्लास के हैं। उनके लिए लागत ज्यादा हो जाती है। ऐसे में अगर अमेरिकी कृषि प्रोडक्ट बिना किसी भारी आयात शुल्क यानी टैरिफ के देश में आएंगे तो वे काफी सस्ते हो जाएंगे। इसका सीधा असर स्थानीय फसलों के दाम पर होगा और देश के किसानों को नुकसान होगा। उनकी कमाई कम हो जाएगी।
यह भी पढ़ें: PM आवास के पास राहुल गांधी का प्रदर्शन, 'प्रधानमंत्री इस्तीफा दो' के लगे नारे
ट्रेड डील से किस पर पड़ेगा असर?
किसान नेताओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है लंबे समय में इस डील का असर देखने को मिल सकता है। ड्राई फ्रूट्स, सेब, दालें, सोयाबीन तेल और ज्वार-मक्का (पशु चारा) जैसे प्रोडक्ट के आयात शुल्क में छूट से देसी उत्पादकों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, अमेरिका भारतीय डेयरी और पोल्ट्री यानी मुर्गी पालन मार्केट में अपनी पैठ बनाना चाहता है। इससे देश के करोड़ों पशुपालकों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि भारत में अमेरिका से जेनेटिकली मॉडिफाइड GM (तकनीक की मदद से बदले गए अनाज) अनाज और खाद्य सामग्री आने की आशंका भी जताई जा रही है। इस ट्रेड डील से किसानों को चिंंता है कि-
- इससे डेयरी सेक्टर पर असर होगा
- दाल, मक्का, सोयाबीन जैसी फसलों की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा
- MSP व्यवस्था कमजोर होगी।
- छोटे किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।
- कृषि बाजार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रभाव बढ़ेगा।
अब तक कहां तक पहुंचा यह समझौता?
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) अभी अंतिम चरण की बातचीत में है। इस पर अभी हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। भारत सरकार के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक, इसको लेकर दोनों देशों के बीच फ्रेमवर्क (रूपरेखा) तैयार है। इस पर भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है। साथ ही दोनों पक्ष की बीच व्यापार, निवेश, डिजिटल ट्रेड, बाजार तक पहुंच और कृषि जैसे मुद्दों पर चर्चा कर चुके हैं।
इसमें सबसे बड़ा मतभेद कृषि क्षेत्र को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि उसके कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में ज्यादा पहुंच मिले। भारत ने कृषि को अपनी 'रेड लाइन' बताया है और किसानों के हितों से समझौता करने से इनकार किया है।
यह भी पढ़ें: 2 मांगें तो मान ली, किसान अब दिल्ली आएंगे या नहीं? पूरा प्लान समझ लीजिए
अब आगे क्या?
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। सरकार का कहना है कि समझौता तभी होगा, जब वह भारत के किसानों, उद्योगों, कारोबार और उपभोक्ताओं के हित में होगा। वहीं, इस पर सड़कों पर उतरे किसानों की मांग है कि कृषि क्षेत्र में कोई ऐसी रियायत न दी जाए, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो।
ट्रेड डील की बातचीत में पारदर्शिता रखी जाए। समझौते से पहले किसानों और अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा की जाए। उन्होंने मांग की है कि ट्रेड डील से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। सरकार ने कहा है कि कृषि भारत के लिए 'रेड लाइन' है और किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि समझौता तभी होगा, जब वह भारत के किसानों, कारोबार, मजदूरों और उपभोक्ताओं के हित में होगा।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | EDITORIAL POLICY | Sitemap




