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CBG के दाम 43% बढ़े, CNG-PNG पर फिर भी असर क्यों नहीं? समझिए खेल

सरकार ने कहा है कि गोबरधन योजना के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी की नई कीमत से सीएनजी और घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं पर कोई बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा।

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बायोगैस प्लांट। Photo Credit: MoPNG

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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी गोबरधन योजना के बारे में एक खबर सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि गोबरधन (GOBARdhan) योजना के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) की नई दरों से सीएनजी (CNG) और पाइप वाली रसोई गैस (PNG) के ग्राहकों पर भारी बोझ पड़ेगा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इसे खारिज किया है। मंत्रालय ने कहा है कि यह अधूरी और गलत धारणाओं पर आधारित है। 

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि यह केवल उत्पादकों से गैस खरीदने की दर है, न कि वह कीमत जो सीधे आम उपभोक्ता चुकाते हैं। इस पूरी लागत का भार ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। सरकार उत्पादकों को 10 रुपये प्रति किलोग्राम की आर्थिक मदद देगी। यह 95 प्रतिशत मीथेन युक्त कंप्रेस्ड बायोगैस के लिए करीब 215 रुपये प्रति मैट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) के बराबर है। 

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कीमतें कम करने के लिए सरकार क्या कर रही है?

सरकार कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को बढ़ावा देने और इसकी कीमतें काबू में रखने के लिए अपनी तरफ से 10 रुपये प्रति किलो की आर्थिक मदद दे रही है। गैस की ऊर्जा मापने की इकाई (MMBTU) के हिसाब से देखें तो 95 प्रतिशत मीथेन वाली अच्छी क्वालिटी की CBG पर यह छूट लगभग 215 रुपये बैठती है।

सबसे राहत की बात यह है कि इस छूट का पैसा सरकार अपने सरकारी बजट से भरेगी। इसका बोझ आम गैस उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं डाला जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि पहले जिस CBG की कुल लागत 2,110 रुपये प्रति MMBTU आ रही थी, वह सरकार के 215 रुपये वहन करने के बाद घटकर लगभग 1,895 रुपये रह जाएगी। सरकार के इस कदम से आम ग्राहकों को यह बायोगैस पहले के मुकाबले सस्ती दरों पर मिल सकेगी।

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CNG या PNG के दाम पर क्यों असर नहीं पड़ेगा? 

सरकार ने कहा है कि गोबरधन योजना के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG की नई कीमत से CNG और घरेलू PNG उपभोक्ताओं पर कोई बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा। एक अखबार की खबर में दावा किया गया था कि संशोधित कीमत से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़ेगा, लेकिन सरकार का कहना है कि यह तस्वीर सही नहीं है और यह कुछ गलत मान्यताओं पर आधारित है।

क्यों ग्राहकों के लिए नहीं बढ़ेंगे दाम?

सरकार ने CBG बनाने वाले उत्पादकों को बढ़ावा देने के लिए उनकी खरीद कीमत में अच्छी बढ़ोतरी की है, लेकिन इसका सीधा बोझ आम गैस उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा। पुरानी व्यवस्था में उत्पादकों को करीब 1,478 रुपये प्रति MMBTU मिलते थे, जिसे अब गोबर्धन योजना के तहत बढ़ाकर 2,110 रुपये प्रति MMBTU कर दिया गया है। कागज पर यह करीब 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखती है, लेकिन यह केवल उत्पादकों को मिलने वाला खरीद भाव है। यह आम जनता के लिए तय की गई कीमत नहीं है। 

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सरकार ने कैसे दाम नहीं बढ़ाया?

आम लोगों को महंगाई से बचाने के लिए सरकार ने दोहरे सुरक्षा उपाय किए हैं। पहला, सरकार अपने बजट से प्रति किलो 10 रुपये की सब्सिडी खुद वहन करेगी। इसे करीब 215 रुपये प्रति MMBTU कह सकत हैं। इस छूट के बाद कंपनियों के लिए गैस की प्रभावी लागत घटकर 1,895 रुपये रह जाएगी। असली इजाफा 43 प्रतिशत न होकर केवल 28 प्रतिशत के करीब होगी। इस बढ़ी हुई लागत को सीधे किसी एक उपभोक्ता पर नहीं डाला जाएगा।

 

पहले इस खर्च का बंटवारा केवल सीएनजी और घरों में जलने वाली पीएनजी के एक छोटे हिस्से पर होता था। अब इस लागत को देश के कुल घरेलू गैस के कारोबार में मिला दिया जाएगा। जब यह अतिरिक्त खर्च करोड़ों उपभोक्ताओं और बड़े गैस नेटवर्क में बंटेगा तो प्रति व्यक्ति या प्रति परिवार इसका असर बिल्कुल न के बराबर होगा। उत्पादकों को उनकी मेहनत का बेहतर दाम भी मिल जाएगा और आम उपभोक्ता की जेब पर भी कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

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क्या है गोबरधन योजना?

फरवरी 2018 के बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस योजना का एलान किया था। इसका मकसद गांवों में पशुओं के गोबर और खेतों के कचरे को खाद, उर्वरक, बायोगैस और बायो-सीएनजी में बदलकर स्वच्छता बढ़ाना था। 30 अप्रैल 2018 को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने इसे शुरू किया। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के दूसरे चरण (2020-2027) में यह ठोस कचरा प्रबंधन का अहम हिस्सा है, जिसमें गोबर और रसोई के बचे हुए कचरे से बायोगैस और बायो-स्लरी बनाई जाती है।

 

हर जिले को पूरे कार्यक्रम काल में 50 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाती है। इसका मकसद है कि गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर सामुदायिक और क्लस्टर बायोगैस प्लांट लगाए जा सकें। सीबीजी प्लांट्स की जानकारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय से ली जा सकती है और संबंधित पोर्टल भी उसी मंत्रालय द्वारा चलाया जाता है।

 


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