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'छोटू गैस' पर इतना जोर क्यों दे रहे हैं इण्डेन और भारत गैस? वजह क्या है

सरकार गैस कंपनियों ने प्रवासी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बड़ी राहत देते हुए 5 किलो का एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का फैसला किया है।

chotu gas cylinder

इण्डेन छोटू गैस सिलेंडर।

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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की बजाय बढ़ रहा है। हालांकि, विश्व के 60 से भी अधिक देशों ने ब्रिटेन के नेतृत्व में इस संघर्ष में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज स्ट्रेट' को खुलवाने के लिए हाई लेवल बैठक की। इसमें भारत भी शामिल हुआ। इस बैठक का मकसद साफ है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाया जा सके, ताकि एनर्जी संकट को कम किया जा सके। इन घटनाक्रमों के बीच में भारत में बड़े पैमाने पर एलपीजी संकट है। लोगों को आसानी से गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। उन्हें 25 दिनों के लिए लंबी वेटिंग करनी पड़ रही है।

 

गैस की किल्लत सबसे ज्यादा शहरों में है क्योंकि यहां करोड़ों लोग रहते हैं। यह लोग खाना पकाने के लिए एलपीजी गैस के भरोसे रहते हैं ऐसे में सिलेंडर नहीं मिलने पर उनके सामने 'भूख' का सवाल उठ खड़ा हुआ था। लकड़ी और उपले के चुल्हे शहरों में नहीं जल पाते इसलिए गावों की तुलना में शहरों में एसपीजी की भारी डिमांड है। केंद्र सरकार यह डिमांड पूरी नहीं नहीं कर पा रही थी, लेकिन अब सरकार ने इस किल्लत को कम करने के लिए कदम उठाए हैं। 

बड़े शहरों से हो रहा है पलायन!

दिल्ली-मुंबई, चेन्नई हैदराबाद समेत तमाम बड़े शहरों से बड़ी संख्या में श्रमिक, छात्र गैस की किल्लत के चलते अपने घरों की तरफ जा रहे हैं। कई ट्रेनें और बसें ठसाठस भरी हैं। इन श्रमिक और छात्रों के सामने एक ही समस्या है कि बगैर गैस के खाना कैसे पकाएं? इण्डेन और भारत गैस जैसी सरकारी कंपनियां भले ही 14.2 किलो और 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर नहीं दे पा रही हैं, मगर 5 किलो का 'छोटू गैस सिलेंडर' देने पर जोर दे रही हैं, ताकि श्रमिकों और छात्रों का फौरी राहत दी जा सके। 

 

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आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत

केंद्र सरकार ने प्रवासी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बड़ी राहत देते हुए 5 किलो का एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का फैसला किया है। सरकार ने इस छोटे सिलेंडर को लॉन्च करने के पीछे व्यावहारिक और आर्थिक कारण बताए हैं, जिनमें सस्ती रिफिलिंग, स्वच्छ ईंधन का लगातार इस्तेमाल और ले जाने में आसानी शामिल हैं। इसके अलावा सरकार ने सबसे बड़ी राहत जो दी है वह यह कि घर से दूर रहने वाले लोगों के लिए पते के प्रमाण की झंझट को ही खत्म कर दिया है। 

 

इण्डेन गैस और भारत गैस ने आज अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर 5 किलो के सिलेंडर को लेकर कई पोस्ट किए हैं। इसमें सीधी अपील की गई है कि आप नजदीकी एजेंसी में जाएं और 5 किलो का गैस सिलेंडर ले सकते हैं। 

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने दिया भरोसा

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, 'छोटी ज़रूरतों के लिए इण्डेन का 5 किलो FTL सिलेंडर बड़ा भरोसा है। यह उन लोगों के लिए एक सुविधाजनक विकल्प है जिनकी गैस की खपत कम है या जिनके पास स्थानीय पते का प्रमाण नहीं है। इसका पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सप्लाई लगातार जारी है।'

 

 

 

 

इंडियन ऑयल ने लोगों से अपील करते हुए आगाह किया कि कृपया अफवाहों पर ध्यान न दें। साथ ही कहा, 'हम आपकी रसोई तक गैस पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं।'

 

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भारत पेट्रोलियम ने भी किया वादा

इसी तरह से भारत पेट्रोलियम ने भी छोटे सिलेंडर की पहुंच को कम आय वर्ग, श्रमिक और छात्रों तक पहुचाने के लिए ऐसे ही कदम उठाए हैं। इस सरकारी कंपनी ने कहा, 'ऐसा गैस कनेक्शन चाहिए जो आपके साथ कहीं भी चल सके? भारतगैस मिनी- प्रवासी श्रमिक, छात्रों, कामकाजी युवाओं और ऐसे लोगों के लिए बेहतरीन है जिनके पास स्थायी पता नहीं है, लेकिन उन्हें भरोसेमंद कुकिंग फ्यूल चाहिए। बस अपने नजदीकी भारतगैस डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाएं, आईडी दिखाकर भुगतान करे और तुरंत अपना 5 किलो का कॉम्पैक्ट सिलेंडर लेकर इस्तेमाल करना शुरू करें।'

 

 

 

 

कंपनी ने कहा क कि आज की तेज-रफ्तार जिंदगी के लिए आसान और भरोसेमंद विकल्प यही है। देशभर में गैस की सप्लाई करने वाली दोनों कंपनियों के कहने का साफ मतलब है कि अगर आप घर से दूर रहते है और आपका कोई स्थायी पता नहीं है, आप एलपीजी सिलिंडर के लिए परेशान है तो आप अपना वैध आईडी कार्ड दिखाकर छोटा एलपीजी सिलिंडर ले सकते हैं।


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