हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में एक भीषण अग्निकांड हुआ जिसमें अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है। जून 2023 में दिल्ली के ही मुखर्जी नगर में स्थित एक कोचिंग में भी आग लगी थी। दोनों ही घटनाओं में आग का कारण शॉर्ट सर्किट था। यह शॉर्ट सर्किट सिर्फ इन दो घटनाओं तक ही सीमित नहीं है। भारत में रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों में लगने वाली ज्यादातर आग का कारण शॉर्ट सर्किट ही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी बताते हैं कि हर साल लगने वाले आग की घटनाओं में शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। इस तरह की आग का कारण सस्ते और खराब गुणवत्ता वाले तार और उपकरण, तय क्षमता से ज्यादा लोड और नियमों की अनदेखी बड़ा कारण है।
NCRB के आंकड़े बताते हैं कि साल 2023 में आग लगने की कुल 7054 घटनाएं हुईं जिसमें से शॉर्ट सर्किट के कारण 1780 हादसे हुए। इसी तरह 2024 में आग लगने की कुल 5971 घटनाएं हुईं जिसमें से 1042 घटनाएं शॉर्ट सर्किट के कारण हुईं। यह दिखाता है कि शॉर्ट सर्किट आग लगने का एक बड़ा कारण है और रिहायशी इमारतों में यह बेहद खतरनाक और जानलेवा हो सकती है। गर्मी के दिनों में यह भी देखा जाता है कि एयर कंडीशनर में ब्लास्ट हो जाता है और पूरे घर में आग लग जाती है। यह भी शॉर्ट सर्किट या ओवरलोडिंग का एक बड़ा कारण है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
शॉर्ट सर्किट क्यों बड़ी समस्या है?
भारत के ज्यादातर घरों में बिजली का सामान्य सा कनेक्शन लिया जाता है लेकिन लोड समय के साथ बढ़ता जाता है। छोटे घरों यानी कि 1 BHK वाले घर के लिए 1 से 2 किलो वॉट वाले बिजली कनेक्शन की जरूरत होती है। 2-3 BHK वाले घर के लिए 2 से 4 kW, 4-5 BHK वाले घरों के लिए 5 से 8 kW वाले कनेक्शन और इससे ज्यादा बड़े घर या ज्यादा खपत वाले कनेक्शन के लिए 5 से 10 किलो वॉट वाले कनेक्शन की जरूरत होती है।
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अगर आप अपने घर में 6 लाइट, पंखे, एक टीवी, एक फ्रिज और एक एसी के अलावा लैपटॉप ही चला रहे हैं तो आपका लोड लगभग 2.4 किलोवॉट का होगा। ऐसे में आपको कम से कम 3 किलोवॉट का कनेक्शन लेना चाहिए। एसी की संख्या, पंखों की संख्या और अन्य उपकरणों की संख्या बढ़ने के साथ ही लोड क्षमता भी बढ़ानी चाहिए ताकि लोड न पड़े। हालांकि, ज्यादातर उपभोक्ता बिल बचाने के चक्कर में कम लोड वाले कनेक्शन पर ही ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करते रहते हैं। इसके चलते देश की बिजली कंपनियों को हर साल 6 से 7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान भी होता है।
कम लोड वाले कनेक्शन पर ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करने पर जुर्माना भी लगता है। इसी तरह भारत में सस्ती तारों का भी इस्तेमाल खूब होता है। ज्यादा लोड और खराब क्वालिटी वाली ये तार आसानी से गर्म होकर जल सकती हैं और आग लगने का कारण भी बनती हैं। साथ ही, लूज कनेक्शन आग लगने का बहुत बड़ा कारण है। भारत में तार जोड़ने, कनेक्शन करने जैसे कई काम लोग या तो खुद करने लगते हैं या फिर अकुशल लोगों को बुला लेते हैं। ये लोग जरूर सुरक्षा उपाय नहीं अपनाते जिसके चलते कनेक्शन ढीला रहता है और थोड़ा सा हिलने पर भी यह स्पार्क करके आग लगा सकता है।
आग वाले हादसों में हजारों की मौत
NCRB की साल 2024 की रिपोर्ट बताती है कि एक साल में आग के चलते कुल 5888 लोगों की मौत हो गई। इसमें से 60 प्रतिशत यानी 3555 लोग रिहायशी इमारतों में लगने वाली आग में मारे गए। अगर घायलों की संख्या देखें तो एक साल में 330 लोग आग वाले हादसों में बुरी तरह घायल भी हुए।
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शॉर्ट सर्किट के प्रमुख कार
- खराब क्वालिटी के तार या उपकरण
- कम क्षमता के तार जल्दी गर्म होकर जल सकते हैं
- ज्यादा लोड होने पर शॉर्ट सर्किट के चांस बढ़ जाते हैं
- लूज कनेक्शन होने पर भी शॉर्ट सर्किट ज्यादा होती है
बचाव के तरीके
अगर ऐसे हादसे से बचना है तो घर बनाने समय बिजली का कनेक्शन और वायरिंग लोड क्षमता के हिसाब से कराएं। अगर आपको अपने घर में 2-3 एसी, फ्रिज, कूलर, वॉशिंग मशीन, पंखे जैसे सारे जरूरी उपकरण चलाने हैं तो ज्यादा क्षमता वाले तारों का इस्तेमाल करें। वायरिंग कराते समय कटे हुए तारों को खुला न छोड़ें, कहीं पर भी लूज कनेक्शन न होने दें। साथ ही, रोजाना के इस्तेमाल के समय इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा लोड वाले उपकरण पावर प्लग से ही चलाए जाएं।