देश में भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है और कई राज्यों में यह अब चिंता की बड़ी वजह बन गया है। राष्ट्रीय भूजल सर्वेक्षण 2025 के मुताबिक पंजाब, राजस्थान और हरियाणा में बड़ी संख्या में इलाके ऐसे हैं, जहां जरूरत से ज्यादा भूजल निकाला जा चुका है। वहीं उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भी भूजल पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में पीने के पानी और खेती के लिए गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है।
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा भूजल इस्तेमाल करने वाला देश है। देश की बड़ी आबादी पीने के पानी और खेती-किसानी के लिए भूजल पर निर्भर है। बढ़ती आबादी, तेजी से हो रहे शहरीकरण और खेती में पानी की बढ़ती मांग के कारण जमीन से जितना पानी निकाला जा रहा है, उतना प्राकृतिक रूप से वापस नहीं पहुंच पा रहा है। यही वजह है कि देश के कई इलाकों में हर साल भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।
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खेती में अंधाधुंध भूजल दोहन
देश में सबसे ज्यादा भूजल खेती-किसानी में इस्तेमाल होता है। खासकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में धान, गन्ना और दूसरी ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों की सिंचाई के लिए बड़े पैमाने पर ट्यूबवेल चलाए जाते हैं। बारिश के पानी को सहेजने और जमीन में वापस पहुंचाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से जितना पानी जमीन से निकाला जाता है, उसकी भरपाई नहीं हो पाती।
शहरीकरण और बढ़ती आबादी का दबाव
शहर तेजी से फैल रहे हैं, नई-नई कॉलोनियां बस रही हैं, उद्योग-धंधे और कारोबार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह से भूजल की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में लाखों लोग अपनी पानी की जरूरत के लिए बोरवेल पर निर्भर हैं। वहीं, कंक्रीट के बढ़ते निर्माण के कारण बारिश का पानी जमीन में रिसने के बजाय सीधे नालों में बह जाता है, जिससे भूजल का प्राकृतिक रिचार्ज प्रभावित हो रहा है।
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जलवायु परिवर्तन, कमजोर जल प्रबंधन और अवैध दोहन
मानसून के अनियमित होने, कम बारिश और बढ़ते तापमान की वजह से जमीन के नीचे का पानी पहले की तरह दोबारा भर नहीं पा रहा है। दूसरी तरफ, बारिश के पानी को सहेजने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तालाब और जलाशय अतिक्रमण की चपेट में हैं और कई इलाकों में बिना अनुमति बोरवेल के जरिए जरूरत से ज्यादा भूजल निकाला जा रहा है। इससे हालात और खराब होते जा रहे हैं।
लोगों में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता की भी कमी है और स्थानीय स्तर पर पानी के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अगर बारिश के पानी को सहेजने की व्यवस्था बढ़ाई जाए, भूजल के इस्तेमाल पर सख्त निगरानी रखी जाए और जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाया जाए तो इस संकट को काफी हद तक काबू में किया जा सकता है।