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टैरिफ से राहत: भारत को खुश नहीं... सावधान होने की जरूरत; खेल कर सकते हैं ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल पर अस्थायी टैरिफ राहत दी है। जानें इस फैसले के मायने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर इसके संभावित असर।

Donald Trump and PM Modi

प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत पांच देशों को बड़ी राहत दी है। इन देशों पर रूसी तेल खरीदने पर अभी कोई टैरिफ नहीं लगाई जाएगी। हालांकि यह छूट अस्थायी है। अमेरिका में हाल ही में 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' पास हुआ। इसके तहत ट्रंप के पास भारत और चीन समेत रूसी तेल खरीदने वाले दुनिया के पांच सबसे बड़े तेल खरीदारों पर 100 फीसद तक टैरिफ लगाने की शक्ति है। 

 

डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किया और सभी देशों को फिलहाल टैरिफ से राहत दी। हाल ही में अमेरिका ने रूस के साथ डीजल डील है। इसके बाद से ही अन्य देशों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। ट्रंप ने भी छूट को अमेरिका के हित में बताया।

 

उधर, थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का कहना है कि अमेरिका से अस्थायी राहत मिली है। वाशिंगटन का नई दिल्ली पर दबाव बढ़ने का बाद में खतरा बढ़ गया है। 

 

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छूट वापस ले सकता है अमेरिका

थिंक टैंक का कहना है कि इस छूट को किसी भी वक्त वापस लिया जा सकता है। अमेरिका को टैरिफ धमकी और द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में इसके इस्तेमाल का मौका मिल जाएगा। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा तय करने, व्यावसायिक शर्तों पर तेल खरीदने और अस्थायी राहत के बदले स्थायी रियायत देने से बचने की सलाह दी गई है। 

 

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना, 'यह छूट भारत को समय देती है। मगर कोई स्थायी निश्चितता नहीं मिलती है। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करना चाहिए। वाणिज्यिक शर्तों पर तेल खरीदने और अमेरिका के बढ़ते दबाव के लिए तैयार रहना चाहिए। अस्थायी टैरिफ राहत स्थायी व्यापार रियायतों का आधार नहीं हो सकती' 

 

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अमेरिकी व्यापार नीति में अनिश्चितता

थिंक टैंक का कहना है कि मौजूदा राहत से टैरिफ का मूल खतरा समाप्त नहीं होता है। छूट की समय सीमा भी निश्चित नहीं है। वाशिंगटन पलट भी सकता है। थिंक टैंक का कहना है कि अमेरिका प्रतिबंधों की धमकी देता है। मगर जब उसके लिए प्रतिबंधों को लागू करना असुविधानजक होता है तो वह पीछे हट जाता है। इससे अमेरिकी व्यापार नीति में अनिश्चितता उजागर होती है।

दोहरे मानदंड पर घिर सकता था अमेरिका

अमेरिका ने 9 अक्टूबर को रूस के साथ डीजल समझौता किया, ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके। पिछले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब अमेरिका पहुंचे ट्रंप प्रशासन ने 10 जनवरी तक टैरिफ न लगाने का समझौता किया। थिंक टैंक का मानना है कि रूस से डीजल खरीदने और चीन को राहत मिलने के बाद भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में मुश्किलें आ सकती हैं। इसके अलावा अमेरिका पर दोहरे मानदंड अपनाने के आरोप भी लग सकते है। 


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