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बार-बार पत्रकारों को 'कर्तव्य' क्यों याद दिला रही है सरकार?

सरकार पत्रकारों को यह सिखा रही है कि रिपोर्टिंग कैसे करनी है। सरकार के कई हैंडल से पत्रकारों को प्रदर्शन कैसे करें, यह नसीहत दी जा रही है, कानून समझाया जा रहा है।

CJP Protest PTI कॉकरोच जनता पार्टी

दिल्ली में 16 अक्टूबर को भी प्रदर्शन हुए थे। Photo Credit: PTI

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देश की राजधानी दिल्ली बीते 5 महीनों से विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में है। 6 जून को नीट पेपर लीक और CBSE नतीजों में कथित धांधली को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ एक बड़ा जनाक्रोश दिल्ली में उमड़ा। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की अगुवाई में शुरू हुआ यह प्रदर्शन, जन आंदोलन में बदल गया। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। यह प्रदर्शन 30 दिनों से ज्यादा वक्त तक चला, 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा सौंपा। 

दिल्ली एक बार फिर आंदोलनों के केंद्र में है। इस बार गुस्सा ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ भड़का है। 2 अक्तूबर को कॉकरोच जनता पार्टी ने मुंबई के शिवाजी पार्क में जनसभा की। विपक्षी पार्टियां एकजुट दिखीं। 10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। एक दिन बाद अदालत ने CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके समेत तीन नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया। 

12 अक्टूबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला। इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए 25,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए। हजारों प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए और पुलिस की सख्ती के आरोप भी लगे। 16 अक्टूबर 2026 को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च और प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें पुलिस ने संस्थापक अभिजीत दीपके समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

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पत्रकारों के साथ क्या सलूक हुआ?

दिल्ली में कई पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। उन्हें बसों में ठूंसा गया, प्रेस कार्ड को लेकर सवाल किया गया। पुलिस ने पत्रकारों का कार्ड देखा, कार्ड पर ही सवाल उठाए। कुछ पत्रकारों से कहा गया कि PIB कार्ड दिखाओ, मीडिया संस्थानों तक के कार्ड पर सवाल उठाया गया। कई स्वतंत्र पत्रकारों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बुरा सलूक किया। पुलिस ने मीडिया कवरेज को लेकर सवाल उठाया। पुलिस ने पत्रकारों को सिखाया कि कैसे रिपोर्टिंग करनी है।

पत्रकारों को सिखा क्यों रही है पुलिस और सरकार?

अब प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की स्थितियों को कवर करने वाले पत्रकारों के लिए प्रोटेस्ट कवर करने विधा सरकार और पुलिस बता रही है। पुलिस का कहना है कि पुलिस बैरिकेड्स और प्रदर्शन स्थल से पत्रकार दूर रहें। प्रेस जैकेट और कार्ड जरूर दिखाएं, पुलिस के काम में बाधा न डालें। 

पुलिस पत्रकारों को नियम याद दिला रही है कि पत्रकार घटनाओं को कवर करते समय जानबूझकर स्थिति को बदलने या प्रभावित करने की कोशिश नहीं करते। वे किसी व्यक्ति की निजता का उल्लंघन तभी करते हैं जब सच्चा सार्वजनिक हित हो, सिर्फ उत्सुकता या सनसनी के लिए नहीं। 

पत्रकार ऐसी राजनीतिक, सामाजिक या व्यावसायिक गतिविधियों से दूर रहते हैं जो उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करें। उनका काम किसी भी तरह के पक्षपात से पूरी तरह मुक्त होता है।

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PCI ने पत्रकारों के लिए क्या नियम तय किए हैं?

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने पत्रकारों के लिए विरोध प्रदर्शन और प्रदर्शनों की कवरेज के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनका मकसद मीडिया कर्मियों की सुरक्षा, जिम्मेदार रिपोर्टिंग और पत्रकारों, मीडिया संगठनों और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल तय करना है। ये दिशानिर्देश 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के कुछ दिनों बाद अपनाए गए हैं, जिसमें कई पत्रकार हिरासत में लिए गए या घायल हुए थे।

पत्रकारों को क्या करने के निर्देश मिले हैं?

PCI ने कहा है कि पत्रकारों को अपना वैध प्रेस पहचान पत्र साफ दिखाना चाहिए। यह कार्ड मीडिया संगठन, प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) या राज्य सरकार के डायरेक्टोरेट ऑफ इंफॉर्मेशन एंड पब्लिसिटी का हो सकता है। आईडी कार्ड पहनते समय इसे सुरक्षित रखना चाहिए ताकि भीड़ या टकराव में उलझने का खतरा कम हो। 

PCI का कहना है कि पुलिस के सामने आने पर शांत और स्पष्ट तरीके से खुद को पत्रकार बताना चाहिए। पत्रकारों को निष्पक्ष रहना चाहिए। उन्हें प्रदर्शन में भाग नहीं लेना चाहिए, किसी पक्ष का समर्थन नहीं करना चाहिए, टकराव नहीं भड़काना चाहिए और न ही प्रदर्शनकारियों, विरोधियों या पुलिस के काम में दखल देना चाहिए।

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पत्रकारों को व्यवहार पर क्या निर्देश मिले?

PCI ने कहा है कि पत्रकारों को सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए, पुलिस के आदेशों का पालन करना चाहिए और तनावपूर्ण स्थिति में बहस से बचना चाहिए। सुरक्षा के लिए तत्काल निर्देश दिए जाएं तो उनका पालन करें, साथ ही जरूरत पड़ने पर शांत ढंग से अपना प्रेस स्टेटस बताएं। 

PCI ने सलाह दी है कि पत्रकार टकराव से उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखें, खासकर जब तनाव बढ़े या पुलिस कार्रवाई की संभावना हो। कैमरे या रिकॉर्डिंग उपकरण को पुलिस बैरिकेड, वाहनों या अन्य उपकरणों से इस तरह नहीं जोड़ना चाहिए जिससे आवाजाही में बाधा आए या संपत्ति को नुकसान पहुंचे।

भीड़ हो तो पत्रकारों को क्या करना चाहिए?

भीड़ में सावधानी से चलना चाहिए और छोटे कदम उठाने चाहिए ताकि गिरने या कुचले जाने का खतरा कम हो। अपनी स्थिति का लगातार आकलन करना चाहिए और आसपास के माहौल, भीड़ के व्यवहार, शोर और संभावित खतरों पर नजर रखनी चाहिए। 

बच निकलने के रास्ते और सुरक्षित जगहों को हमेशा याद रखना चाहिए और स्थिति बदलने पर उन्हें अपडेट करना चाहिए। धुएं या आंसू गैस की स्थिति में दिखाई देने वाले निशानों और सुरक्षित रास्तों का इस्तेमाल करके प्रभावित इलाके से बाहर निकलना चाहिए, भीड़ के अंदर और गहराई में नहीं जाना चाहिए।

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पुलिस कवरेज के लिए क्या निर्देश मिले हैं?

PCI ने कहा है कि घटनाओं की रिपोर्टिंग सटीक, वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष होनी चाहिए। सत्यापित तथ्यों को आरोपों, रायों और अपुष्ट दावों से अलग करना चाहिए। सूचना को कई स्रोतों से सत्यापित करना चाहिए। गवाहों से पूछना चाहिए कि उन्हें जानकारी कैसे मिली और उनकी विश्वसनीयता तथा पक्षपात की संभावना का आकलन करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों, आयोजकों, पुलिस और सरकार के बयानों को ध्यान से कवर करना चाहिए। पुलिस की रियल-टाइम स्थिति, मूवमेंट या भागने के रास्तों को तब तक प्रसारित नहीं करना चाहिए जब इससे सुरक्षा या ऑपरेशन प्रभावित हो। लोगों के इरादों या भावनाओं की जगह सच्चाई दिखाई जाए।

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