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ECI और सरकार को नोटिस, राहुल गांधी को फटकार; सुप्रीम कोर्ट ने ली सबकी खबर  

SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी की ओर दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। साथ ही, राहुल गांधी को भी फटकार लगाई है। 

राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने CEC को भेजा नोटिस

राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने CEC को भेजा नोटिस, Photo Credit: ChatGPT

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हाल ही में दिल्ली में हुए प्रदर्शनों, स्पेशल इंटेसिंव रिवीजन और प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के रवैये को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दोनों आयुक्तों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी फटकार लगाई है। साथ ही, जंतर मंतर का धरनास्थल का दर्जा खत्म करने के मामले में दिल्ली सरकार से भी जवाब मांगा है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने सभी एजेंसियों को कहा है कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में वे सभी CCTV फुटेज संभालकर रखें। दरअसल, कई वकीलों ने इसकी मांग की थी। जंतर-मंतर का धरना स्थल का दर्जा खत्म कर दिए जाने को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है। एक वकील ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है और उनकी बातें सुनी जानी चाहिए। 

 

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चुनाव आयोग और आयुक्तों से मांगा गया जवाब

SIR और मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इससे पहले, CJI सूर्यकांत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में जो भी याचिका दायर की जाएगी उस पर सुनवाई होगी। अब इसी याचिका के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य दो आयुक्तों यानी सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से जवाब मांगा है। 

 

विपक्षी नेताओं की याचिका पर CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने सुनवाई। बता दें कि यही याचिका दायर करने से पहले ही विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का एलान किया था। इन नेताओं ने CJI सूर्यकांत से मुलाकात का समय भी मांगा था लेकिन उन्होंने इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद 12 अक्तूबर को तमाम विपक्षी नेताओं ने मार्च निकाला था और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए थे। तब CJI ने सलाह दी थी कि इन नेताओं को याचिका दायर करनी चाहिए। 

 

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सुप्रीम कोर्ट तक मार्च पर जताई नाराजगी

विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हम नोटिस जारी कर रहे हैं... इस याचिका को पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ रहे हैं लेकिन हम एक याचिकाकर्ता से उसके आचरण के बारे में सवाल करना चाहेंगे।’ सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस नेता के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का जिक्र किया। इस पर CJI की बेंच ने कहा, ‘न्यायपालिका को कोई डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता। हम जमीनी हकीकत से बेखबर नहीं हैं।’

 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अवमानना के एक मामले में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की ओर से बिना शर्त माफी मांगे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि बिना शर्त माफी मांगने का यह मतलब नहीं है कि उठाए गए कदमों का बचाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। बेंच ने तुषार मेहता से कहा कि वह अधिकारियों के कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगने संबंधी मीडिया की खबरों का संज्ञान नहीं ले रही।

 

बता दें कि अवमानना का यह मामला ‘ कॉकरोच जनता पार्टी ’ (CJP) के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के कथित उल्लंघन से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट बैन करने, मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेन कैंसल करने को गलत बताते हुए कहा था कि ऐसा नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद जंतर-मंतर के आसपास कई किलोमीटर क्षेत्र में इंटरनेट बंद रखा गया था और कुल 45 मेट्रो स्टेशनों के दरवाजे बंद कर दिए गए थे।

 

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किन नेताओं ने दायर की थी याचिका?

इस याचिका पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा अखिलेश यादव , सौगत राय तेजस्वी यादव, संजय राउत, एम ए बेबी, डी राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ई टी मोहम्मद बशीर ने भी दस्तखत किए थे। इस याचिका में SIR में लगातार होते बदलावों को लेकर सवाल उठाए गए थे। साथ ही, आरोप लगाए गए थे कि गलत तरीकों से लोगों के वोट काटे गए।

 

सुप्रीम कोर्ट ने सभी एजेंसियों को कहा है कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में वे सभी CCTV फुटेज संभालकर रखें। दरअसल, कई वकीलों ने इसकी मांग की थी। जंतर-मंतर का धरना स्थल का दर्जा खत्म कर दिए जाने को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है। एक वकील ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है और उनकी बातें सुनी जानी चाहिए। 

 


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