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22006 के बदले 6.25 Cr देने वाले फैसले पर रोक, सुभाष चंद्रा को NCLT ने दिया झटका

NCLT की एक बेंच ने सुभाष चंद्रा इनसॉल्वेंसी केस में 25 अगस्त के फैसले पर रोक लगा दी है। एक बार फिर सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रहीं हैं।

Essel- Zee Group Founder Subhash Chandra.

एस्सेल ग्रुप-जी के चेयरमैन सुभाष चंद्रा, Photo Credit-Social Media

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जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी केस में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की 5 सदस्यीय बेंच ने मंगलवार एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसे उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। बेंच ने 25 अगस्त फैसला सुनाने वाले बेंच के फैसले पर रोक लगा दी है। अब पूरे मामले पर दोबारा सुनवाई होने वाली है। 

बेंच में NCLT के अध्यक्ष जस्टिस (रि.) अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल, ज्यूडिशियल मेंबर बचू वेंकट बलराम दास, महेंद्र खंडेलवाल, टेक्निकल मेंबर अतुल चतुर्वेदी और रविंद्र चतुर्वेदी शामिल हैं। बेंच ने कहा कि पिछले फैसले में कोई साफ बहुमत नहीं बन पाया था। अब बेंच ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है और मामले की सुनवाई नए सिरे से करने का फैसला लिया है।

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क्या फैसला लिया गया है?

सुभाष चंद्रा को किसी भी संपत्ति को सीधे या परोक्ष रूप से बेचने या ट्रांसफर करने से रोक दिया गया है। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की ओर से शुरू किए गए दिवालियापन की प्रक्रिया से जुड़ा है। सुभाष चंद्रा ने अपने रिपेमेंट प्लान में लेनदारों के लगभग 22,006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा था। इसमें प्रक्रिया में खर्च होने वाले 25 लाख रुपये भी शामिल थे।

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अचानक क्यों बदला फैसला?

पहले बेंच के दोनों सदस्यों की राय अलग-अलग थी। एक सदस्य ने प्लान को सिर्फ समर्थन करने वाले लेनदारों के लिए मंजूर करने की बात कही, जबकि दूसरी सदस्य ने प्रक्रिया में गंभीर खामियां बताते हुए योजना को खारिज कर दिया। इसके बाद तीसरे सदस्य ने 25 अगस्त को योजना मंजूर कर दी, लेकिन कुछ दावों को बाहर रखा और कहा कि यह सभी लेनदारों पर बाध्यकारी होगी। जब मामला वापस मूल बेंच के पास गया तो उन्होंने कहा कि तीनों राय अलग-अलग हैं, इसलिए कोई बहुमत नहीं बना। अब पूरा मामला पांच सदस्यीय बेंच के सामने नई सुनवाई के लिए आ गया है।


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