सरकारी तेल कंपनियां और कर्नाटक सरकार E20 पेट्रोल को लेकर आमने-सामने हैं। कर्नाटक सरकार ने दावा किया था कि पेट्रोल में
एथेनॉल
की मात्रा तय 20 प्रतिशत सीमा से ज्यादा है। सरकारी कंपनियों ने इसे खारिज कर दिया। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने शुक्रवार देर शाम बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार की जांच वैधानिक और तकनीकी प्रक्रिया के तहत नहीं हुई।
कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और विधिक माप विज्ञान मंत्री रिजवान अरशद ने इससे पहले दावा किया था कि राज्य की अधिकृत प्रयोगशालाओं ने पेट्रोल के नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक पाई है। उन्होंने इन नतीजों को चिंताजनक बताया था। कंपनियों का कहना है कि अक्टूबर में हुई यह जांच मोटर स्पिरिट एंड हाई स्पीड डीजल कंट्रोल ऑर्डर, 2005 और मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस, 2024 की शर्तों के मुताबिक नहीं थी।
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कंपनियों ने पेश किए अपने आंकड़े
कंपनियों के अनुसार नमूने उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना लिए गए। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय के सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी की गुणवत्ता जांच में 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डिपो और रिटेल आउटलेट से 893 नमूने लिए गए थे। सभी में एथेनॉल 19 से 21 प्रतिशत की तय सीमा के भीतर मिला। कंपनियों ने बताया कि कर्नाटक में जांचे गए 56 नमूने भी मानक पर खरे उतरे। इनमें तीनों कंपनियों के अलग-अलग स्थानों के नमूने शामिल थे। इनमें एथेनॉल 19 से 20 प्रतिशत के बीच रहा और औसत 19.3 प्रतिशत रहा।
तेल कंपनियां और कर्नाटक सरकार में ठनी क्यों?
तेल कंपनियों ने राज्य सरकार से पूरे सैंपलिंग दस्तावेज, आउटलेट के हिसाब से प्रयोगशाला रिपोर्ट और जांच की पद्धति की जानकारी मांगी है। उन्होंने काउंटरपार्ट नमूनों तक पहुंच की भी मांग की है, ताकि किसी अधिकृत प्रयोगशाला में राज्य सरकार और कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में स्वतंत्र जांच हो सके। कंपनियों ने यह भी कहा कि वे तय प्रक्रिया के तहत संयुक्त सैंपलिंग और जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं।
मंत्री रिजवान अरशद के मुताबिक 63 पेट्रोल पंपों में से 14 की प्रयोगशाला रिपोर्ट में कुछ इंडियन ऑयल पंपों पर अधिकतम 31.2 प्रतिशत और कुछ HPCL पंपों पर 30.5 प्रतिशत एथेनॉल मिला। इन 63 पंपों में नायरा, शेल और MRPL के पंप भी शामिल थे। सरकार का कहना है कि BPCL, नायरा और शेल के कुछ पंपों पर भी मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिली।
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क्या दावा कर रही है कर्नाटक सरकार?
कर्नाटक सरकार ने यह भी दावा किया कि नमूने पहले इंडियन ऑयल और HPCL की प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे। उसके मुताबिक इन प्रयोगशालाओं ने एथेनॉल की मात्रा नहीं बताई। सरकार ने इसे इन कंपनियों की पारदर्शिता पर सवाल बताया। कर्नाटक कांग्रेस का दावा है कि तेल कंपनियों के पेट्रोल सैंपल की जांच में एथेनॉल मिश्रण को लेकर बड़े अंतर का खुलासा हुआ है। अलग-अलग कंपनियों के ईंधन में एथेनॉल की मात्रा 13.5 फीसदी से लेकर 31.2 फीसदी तक दर्ज की गई है।
कांग्रेस के मुताबिक IOCL के सामान्य पेट्रोल (MS) में सबसे अधिक 31.2 प्रतिशत और HPCL के प्रीमियम 'पावर' पेट्रोल में 30.5 प्रतिशत तक एथेनॉल पाया गया, जबकि HPCL के नियमित पेट्रोल 27 प्रतिशत, BPCL के 'स्पीड' 26.5% और नायरा के 26.1%, शेल के सैंपल में यह 25.5% के स्तर से ऊपर रहा है। BPCL, MRPL और IOCL के सैंपल में यह मात्रा 19.2 फीसदी से 24.2 फीसदी के दायरे में दर्ज की गई। लिस्ट में सबसे कम 13.5 फीसदी एथेनॉल शेल के एक पेट्रोल सैंपल में सामने आया है। यह दावे कर्नाटक कांग्रेस के हैं। तेल कंपनियों ने इसे खारिज किया है।