'हमारी नजर में सब बराबर...', राहुल गांधी के 'VIP ट्रीटमेंट' पर SC ने क्यों कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट की नजर में सब बराबर हैं। अगर जल्दी सुनवाई चाहिए तो अदालत में तय प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ेगा।

राहुल गांधी। Photo Credit: PTI
सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मानहानि से जुड़े राहुल गांधी के एक मामले में कहा है कि अदालत की नजर में सब बराबर हैं। अगर राहुल गांधी त्वरित सुनवाई चाहते हैं तो उन्हें तय प्रक्रिया का पालन करना होगा, अदालत आना होगा। आरोप लगे थे कि कोर्ट रजिस्ट्री राहुल गांधी से VVIP की तरह सलूक कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालत की नजर में हर कोई बराबर ही है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने यह टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया ने कोर्ट से कहा था कि पहले सुनवाई का निर्देश दिए जाने के बावजूद राहुल गांधी की अपील अब तक सूचीबद्ध नहीं की गई है। गौरव भाटिया, पूर्व बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव की तरफ से पेश हुए थे।
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क्यों ऐसे आरोप लगे हैं?
गौरव भाटिया ने अदालत में कहा है कि राहुल गांधी कोई VVIP नहीं हैं और यह मामला पांच महीने पहले भी सूचीबद्ध हुआ था लेकिन उस पर सुनवाई नहीं हो सकी। यह संस्थान के लिए भी सही नहीं है। उनका इशारा दिसंबर 2025 के एक आदेश से जुड़ा था। आदेश में कहा गया था कि केस को 22 अप्रैल को सूचीबद्ध किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गौरव भाटिया की बेंच से कहा कि तय प्रक्रिया के तहत जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दाखिल करें। बेंच ने कहा कि उनकी नजर में सब बराबर हैं और आवेदन दाखिल करने पर मामले पर विचार किया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा है मामला?
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कोर्ट ने आपराधिक मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था। यह मामला दिसंबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प को लेकर गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने 4 अगस्त 2025 को इस मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। उस बेंच ने राहुल गांधी से पूछा था कि उनके इस दावे का आधार क्या है कि चीनी सैनिकों ने भारत के 2,000 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जा किया। यह भी कहा था कि सीमा विवाद से जुड़े ऐसे मुद्दे संसद में उठाए जाने चाहिए।
राहुल गांधी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि वह अभिव्यक्ति की आजादी के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह उन मुद्दों की तरफ जनता का ध्यान खींचना चाहते हैं जिन्हें उनकी नजर में पर्याप्त तरीके से नहीं उठाया जा रहा।
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शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए हैं?
शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव ने लखनऊ की एक अदालत में गुहार लगाई थी कि राहुल गांधी की टिप्पणी भारतीय सेना को बदनाम करने वाली है। वह बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन में निदेशक रह चुके हैं, जिसे उन्होंने सेना में कर्नल के रैंक के बराबर बताया था। लखनऊ की एक अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था।
मई 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसमें दखल देने से इनकार करते हुए कहा था कि उदय शंकर श्रीवास्तव CrPC की धारा 199 के तहत 'पीड़ित व्यक्ति' के तौर पर यह शिकायत जारी रख सकते हैं। राहुल गांधी ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। दिसंबर में इस मामले को द वायर से जुड़े एक अलग मानहानि मामले के साथ 22 अप्रैल 2026 को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इस पर सुनवाई नहीं हो सकी।
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गौरव भाटिया की दलील क्या है?
गौरव भाटिया ने यह भी दलील दी है कि उनके मामले को गलत तरीके से द वायर की याचिकाओं के साथ जोड़ा गया है। अदालत को उनके मामले को अलग करने का आदेश देना चाहिए। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री सिर्फ इसलिए इस मामले को सूचीबद्ध नहीं कर सकती क्योंकि उनकी नजर में राहुल गांधी VVIP हैं और उन्हें पहले ही स्टे मिल चुका है। इस पर बेंच ने गौरव भाटिया से कहा कि वह जल्द सुनवाई और मामले को अलग करने के लिए तय तंत्र का इस्तेमाल करें।
राहुल गांधी की तरफ से क्या कहा गया है?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में राहुल गांधी ने दावा किया है कि उनके खिलाफ पहले से ही भाषण से जुड़े 20 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि ये कार्यवाहियां कानून का दुरुपयोग हैं जिनका मकसद सरकार की नीतियों के खिलाफ उनकी आवाज को दबाना है। याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 223(1) का भी हवाला दिया गया है, जिसके तहत मजिस्ट्रेट को किसी अपराध का संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनना जरूरी है।
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यह मामला, राहुल गांधी के किस बयान से जुड़ा है?
उदय शंकर श्रीवास्तव ने अपनी याचिका में कहा है कि राहुल गांधी का 2022 का बयान झूठा और आधारहीन था और इसे भारतीय सेना का मनोबल गिराने की गलत मंशा से दिया गया था। उन्होंने बताया कि गांधी के दावे के उलट 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश के यांग्त्से इलाके में हुई झड़प में भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को अपने इलाके में घुसने से रोका और उन्हें खदेड़ दिया था। उन्होंने इस बारे में सेना के आधिकारिक बयान का भी हवाला दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि राहुल गाधी ने यह बयान जानबूझकर भारतीय सेना की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने की मंशा से दिया है।
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