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क्या सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल? केंद्र सरकार ने बता दिया अपना प्लान

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 27 फरवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार कीमतों में कटौती करेगी या नहीं?

Union Minister Hardeep Singh Puri

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी। (Photo credit: PTI)

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अमेरिका और ईरान के बीच जंग थम चुकी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पहले की अपेक्षा समुद्री परिवहन भी सामान्य होने लगा है। 28 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें सबसे निचले स्तर पर हैं। अब सबके मन में सवाल है कि क्या सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती करेगी, क्योंकि जब कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ था तो सरकार ने तुरंत दाम बढ़ा दिए थे, लेकिन घटने पर भी क्या ऐसा ही कदम उठाया जाएगा?

कीमत घटाने पर क्या बोले मंत्री हरदीप पुरी?

इस सवाल पर गुरुवार को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार का रुख साफ कर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि कच्चे तेल में आई भारी गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती की उम्मीद कम है।

 

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न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक जब हरदीप पूरी से पूछा गया कि ईंधन की कीमतों में कमी होगी या नहीं, इस पर उन्होंने कहा अगर अगले कुछ हफ्तों तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें कमी बनी रहती हैं तो यह एक वाजिब सवाल होगा।

रणनीतिक भंडार बढ़ाएगा भारत

मध्य पूर्व संकट के बीच पुरी ने रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने की वकालत भी की। उन्होंने कहा कि शायद यही एक सबक है जो हमने सीखा है। हमने सीखा है कि हम भंडारण बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर फोकस

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने कहा कि भारत मौजूदा समय में तेल की कीमतों में आई गिरावट का इस्तेमाल ईंधन भंडार क्षमता का विस्तार और द्विपक्षीय भागीदारों के साथ संबंध मजबूत करके अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में करेगा। बंदरगाहों, टर्मिनलों, रिफाइनरियों और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों 76 से 80 दिनों का कच्चा तेल है।

कीमत घटाने से क्यों बच रही सरकार?

मंत्री हरदीप पुरी ने तर्क दिया कि पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल कंपनियों ने बढ़ी हुई कीमतों पर कच्चे तेल की खरीद की थी। अभी इस कच्चे तेल को रिफाइन किया जा रहा है। 30 जून तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत मूल्य से कम पर बेचा गया। इस वजह से तेल विपणन कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। मगर कंपनियां पहले ही महंगे दामों पर तेल खरीद लिया था। अब यही तेल रिफाइन किया जा रहा है।

 

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मतलब साफ है कि तेल कंपनियां अभी जिस तेल को रिफाइन कर रही हैं, उसकी खरीद पहले ही बढ़ी कीमत पर की गई थी। ऐसे में कीमत घटाकर कंपनियों को घाटा तो नहीं दिलाया जा सकता है, लेकिन एक उम्मीद है कि जब घटी हुई कीमत पर कच्चा तेल खरीद शुरू हो गई तो सरकार शायद कीमतों में कटौती भी करे।

कच्चा तेल सबसे निचले स्तर पर

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। 30 अप्रैल को एक बैरल की कीमत 126 डॉलर थी। मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 27 फरवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला किया था। इसके बाद कच्चे तेल ने आसमान छू लिया था। 

 

 

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