केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि अब शिवसेना का कोई दूसरा गुट नहीं है, सिर्फ एक शिवसेना है, वह एकनाथ शिंदे की है। अमित शाह ने शनिवार को कोल्हापुर में धन्यवाद रैली की और उद्धव ठाकरे पर खूब तंज कसे। उन्होंने कहा कि पहले हमें एकनाथ शिंदे गुट कहना पड़ रहा था लेकिन अब कोई गुट नहीं है।
अमित शाह ने कोल्हापुर के माता अंबाबाई मंदिर में पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर के आधुनिकीकरण और सुंदरीकरण की नींव रखी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार माता अंबाबाई मंदिर का नवीनीकरण और कॉरिडोर निर्माण कार्य कर रही है।
यह भी पढ़ें: शिवसेना के 6 दशक, दो धड़े, शिंदे से उद्धव तक, क्या खोया-क्या पाया?
अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री:-
पहले हमें शिवसेना शिंदे गुट कहना पड़ता था, लेकिन अब कोई गुट नहीं रहा। सिर्फ एक शिवसेना है।
अमित शाह का यह बयान शिवसेना (यूबीटी) में चल रही बगावत और बवाल के बीच आया है। पहले एकनाथ शिंदे ने पार्टी तोड़ दी, अब 2024 की जिस जीत से उद्धव ठाकरे उत्साहित थे, उसमें भी दरार पड़ गई। जीते हुए 9 सांसदों में 6 सांसदों ने बगावत छेड़ दी है।
खत्म हो गई है उद्धव ठाकरे की शिवसेना?
उद्धव ठाकरे के गुट में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत सांसदों की बड़ी संख्या शिंदे गुट में जा रही है। शिवसेना (यूबीटी) ने अब गैर-हाजिर सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। लोकसभा में पार्टी के चीफ व्हिप अनिल देसाई ने 24 घंटे के अंदर लिखित जवाब मांगा है।
शिवसेना के सांसद अगर जवाब नहीं देते तो पार्टी मान लेगी कि उन्होंने अपनी सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दी है और एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत कार्रवाई होगी। गुरुवार को दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में पार्टी की कुल 9 लोकसभा सांसदों में से सिर्फ 3 ही पहुंचे, जबकि 6 सांसद गायब रहे।
यह भी पढ़ें: दल बदल कानून से कैसे बच सकते हैं शिवसेना (UBT) के सांसद?
कांग्रेस की गोद में बैठने के आरोप क्यों लगते हैं?
अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री:-
कांग्रेस नेता और कांग्रेस की गोद में बैठे उद्धव, घुसपैठियों को वोट बैंक बनाकर अपनी सत्ता बचाए रखना चाहते हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की सुरक्षा के हर पहलू को सुनिश्चित किया जा रहा है।
साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद उद्धव ठाकरे की राजनीति, हिंदुत्व से हटकर, सेक्युलर पर शिफ्ट हो गई। बाल ठाकरे ने जब पार्टी की स्थापना की थी, तब यह पार्टी, हिंदुत्ववादी और कांग्रेस-विरोधी विचारधारा की पार्टी थी। 2019 में पहली बार बीजपी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन तोड़कर शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार बनाई।
बीजेपी और शिंदे गुट के लोग इसे बाल ठाकरे की विरासत से धोखा और सत्ता के लिए सिद्धांतों का त्याग मानते हैं। शिवसेना दशकों तक कांग्रेस के खिलाफ लड़ती रही थी। उद्धव ठाकरे के कांग्रेस के साथ लंबे गठबंधन, INDIA ब्लॉक में सहयोग और मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक बयानों की वजह से अब ये आरोप लगते रहे हैं।