उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को साधने की सियासी कवायद तेज हो गई है। चुनावी साल में योगी सरकार अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी की तैयारी में है। प्रस्ताव मंजूर हुआ तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 हजार से बढ़कर 12 हजार और सहायिकाओं का 4 हजार से बढ़कर 6 हजार रुपये प्रतिमाह हो जाएगा। इसके साथ ही सरकार की ओर से रसोइयों का मानदेय बढ़ाने, छात्राओं को स्कूटी देने और 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा जैसी घोषणाएं पहले ही की जा चुकी हैं। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी अध्यक्ष
अखिलेश यादव
ने महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये देने का बड़ा चुनावी वादा किया है। ऐसे में यूपी में महिला वोट को लेकर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के दांव आमने-सामने दिखाई देने लगे हैं।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव के मुताबिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का 4 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। इससे प्रदेश की करीब 1.89 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 1.67 लाख सहायिकाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रस्ताव पर वित्त, कार्मिक और न्याय विभाग के स्तर पर सहमति मिलने की बात सामने आई है। अब कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है।
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सरकार पर पड़ेगा 3 हजार करोड़ से ज्यादा का भार
मानदेय बढ़ोतरी लागू होने पर प्रदेश सरकार के खजाने पर सालाना 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है। खास बात यह है कि बढ़ोतरी का अतिरिक्त भार राज्य सरकार स्वयं उठाएगी। मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ
ने अप्रैल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने की घोषणा की थी। अब विभागीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे अमलीजामा पहनाने की तैयारी है।
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रसोइयों का मानदेय भी बढ़ाया
महिला वर्ग से जुड़े मानदेय में सरकार पहले भी बढ़ोतरी कर चुकी है। स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों का मानदेय 2 हजार से बढ़ाकर 3 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है।इससे बड़ी संख्या में महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ मिला है। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में संभावित वृद्धि को उसी सिलसिले की अगली बड़ी कड़ी माना जा रहा है।
छात्राओं को स्कूटी और बुजुर्ग महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा
योगी सरकार ने छात्राओं के लिए भी बड़ा ऐलान किया है। प्रदेश में 50 हजार छात्राओं को स्कूटी देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा शुरू करने की घोषणा भी की गई है।यानी सरकार का फोकस महिला वर्ग के अलग-अलग हिस्सों पर दिखाई दे रहा है—कामकाजी महिलाओं से लेकर छात्राओं और बुजुर्ग महिलाओं तक।
अखिलेश का 40 हजार रुपये वाला चुनावी दांव
उधर समाजवादी पार्टी महिला मतदाताओं को साधने के लिए बड़ा आर्थिक वादा कर चुकी है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ के तहत महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये देने की घोषणा की गई है। समाजवादी पार्टी का यह वादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पात्र महिलाओं के बड़े वर्ग को आर्थिक सहायता देने की बात करता है। इसके अलावा पार्टी ने महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 33 फीसदी आरक्षण और छात्राओं से जुड़े कई अन्य वादे भी किए हैं।
महिला वोट बना चुनावी केंद्र
यूपी में चुनावी साल के साथ महिला मतदाताओं को लेकर दोनों प्रमुख दलों की रणनीति साफ होती जा रही है। सरकार एक के बाद एक महिला केंद्रित योजनाओं और आर्थिक राहत की घोषणाओं के जरिए अपना संदेश मजबूत कर रही है, तो सपा बड़े आर्थिक वादों के जरिए महिला वोटरों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है।सबसे खास बात यह है कि आंगनबाड़ी मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव अभी ताजा मुद्दा है, जबकि रसोइयों का मानदेय, छात्राओं को स्कूटी और महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा पहले की घोषणाएं हैं। दूसरी ओर ₹40 हजार सालाना सहायता सपा का चुनावी वादा है।
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अब बड़ा सवाल किसका दांव पड़ेगा भारी?
एक तरफ आंगनबाड़ी से लेकर छात्राओं और बुजुर्ग महिलाओं तक सरकार की योजनाओं का दायरा बढ़ रहा है, दूसरी तरफ अखिलेश यादव का 40 हजार रुपये सालाना आर्थिक सहायता का वादा महिला वोटरों के बड़े वर्ग को सीधे साधने की कोशिश है।2027 के चुनाव से पहले महिला मतदाताओं के लिए यह मुकाबला अभी शुरुआत में है। आने वाले दिनों में अगर दोनों तरफ से और बड़ी घोषणाएं होती हैं तो यूपी की चुनावी राजनीति में ‘महिला वोट’ सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बन सकता है।