उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण के मुद्दे को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। शनिवार को अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के सामने पहुंच गए और ‘आरक्षण दो, न्याय दो’ की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी। अभ्यर्थियों का कहना है कि 5 जनवरी 2022 को जारी 6800 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की सूची में शामिल होने के बावजूद उन्हें अब तक नियुक्ति नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को प्रस्तावित होने के बीच अभ्यर्थियों ने सरकार से अपनी नियुक्ति के लिए प्रभावी पैरवी की मांग की है।
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने 5 जनवरी 2022 को 6800 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की थी। इसमें आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शामिल किया गया था, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस सूची को रद्द कर दिया था। बाद में मामला आगे की न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले फिर दबाव
अभ्यर्थियों का कहना है कि 69 हजार शिक्षक भर्ती का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और 8 सितंबर को सुनवाई होनी है। उनका आरोप है कि विभाग उन 6800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के पक्ष को प्रभावी तरीके से अदालत के सामने नहीं रख रहा, जिनकी सूची चार साल पहले जारी की गई थी।फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से 6800 अभ्यर्थियों को समायोजित करने की संभावना पर जवाब मांगा था।
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अभ्यर्थियों ने कहा- मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
अयोध्या से आंदोलन में शामिल अर्चना शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलकर अभ्यर्थी अपनी समस्या पहले भी रख चुके हैं। उनका कहना है कि सूची जारी होने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिल सकी। अभ्यर्थी आशुतोष पटेल का आरोप है कि अदालत में सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से उनकी सूची के पक्ष में प्रभावी पैरवी नहीं की जा रही है। आंदोलन में शामिल यशवंत ने कहा कि शनिवार से शुरू हुआ आंदोलन अब अनवरत चलेगा। अगर मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं कराई गई तो अभ्यर्थी सामूहिक भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दे रहे हैं।
आरक्षण विवाद से जुड़ा है पूरा मामला
69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण के निर्धारण को लेकर शुरुआत से ही विवाद रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष दायर याचिकाओं में आरक्षित वर्ग को निर्धारित अनुपात में आरक्षण नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया था। अदालत में इस मामले से जुड़ी कई याचिकाएं दाखिल हुईं और 6800 अभ्यर्थियों की अतिरिक्त चयन सूची भी न्यायिक विवाद में फंस गई। वहीं, 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पूरी 69 हजार भर्ती की चयन सूची को नए सिरे से तैयार करने का आदेश दिया था, जिसके बाद मामला और जटिल हो गया।
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मंत्री आवास के बाहर जुटे अभ्यर्थी
भूख हड़ताल में गंगा शरण, नजमा, अमर मौर्य, चंदन, संजय और संगम निषाद समेत कई अभ्यर्थी शामिल रहे। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका संघर्ष नियुक्ति मिलने तक जारी रहेगा। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और सरकार के रुख पर टिकी हैं।