आखिरी कोशिश भी फेल! कांग्रेस ने अखिल गोगोई से नहीं किया गठबंधन, नुकसान होगा?
असम में राजयोग दल और कांग्रेस का गठबंधन बनने से पहले ही टूट गया है। इसकी घोषणा खुद पार्टी चीफ अखिल गोगोई ने की है।

अखिल गोगोई। Photo Credit- PTI
असम विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग इस महीने के आखिर में कभी भी चुनावी तारीखों की घोषणा कर सकता है। राज्य में चुनावी तारीखों की घोषणा हो इससे पहले असम के सभी राजनीतिक दल सीट बंटवारे को लेकर या तो स्थिती क्लियर कर चुके हैं या फिर इसपर निर्णय लेने के लिए बैठकें कर रहे हैं। इस बीच असम में पिछले 10 साल से सत्ता के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस का 'रायजोर दल' के साथ गठबंधन टूट गया है। इस बात की जानकारी खुद रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने दी है।
रायजोर दल के चीफ अखिल गोगोई ने 6 मार्च को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा। इसमें उन्होंने लिखा, 'आखिरी कोशिश भी फेल हो गई।' इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में असम में आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर सीट बंटवारे को लेकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। गठबंधन के साथियों को अब सम्मानजनक सीटें मिलने को लेकर संशय पैदा हो गया है क्योंकि राजयोर दल और कांग्रेस का गठबंधन सीट बंटवारे को लेकर ही टूटा है।

विपक्षी मोर्चा बनाने की कवायद
अखिल गोगोई ने गठबंधन टूटने की घोषणा ऐसे समय में की है जब कांग्रेस और कई विपक्षी पार्टियों ने ऐलान किया है कि वे राज्य के कोने-कोने में मिलकर सामुहिक चुनावी कैंपेन मीटिंग शुरू करेंगे। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी अभी एक बड़ा विपक्षी मोर्चा बनाने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट), असम जातीय परिषद और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस के साथ मिलकर काम कर रही है।
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दूसरी तरफ सत्तारूढ़ बीजेपी अपने गठबंधन में छोटे-छोटे दलों को मिलाकर सीट बंटवारे पर काम कर रही है।
गठबंधन को बड़ा करने की जुगत
गोगोई ने पहले कहा था कि कांग्रेस अखिल गोगोई की रायजोर दल समेत दूसरे दलों के साथ भी बातचीत कर रही है। साथ ही उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में यह गठबंधन और बड़ा होगा। गोगोई ने कहा, 'अब से, हम पूरे असम में जॉइंट कैंपेन मीटिंग करेंगे। ऊपरी असम में कुछ संभावित जगहों पर बातचीत पहले ही हो चुकी है। हम राज्य के दूसरे हिस्सों पर भी बातचीत करेंगे।' उन्होंने कहा, 'अब समय आ गया है कि हम मिलकर अपने विचार जनता तक पहुंचाएं। इसलिए, हम अब से जॉइंट कैंपेन शुरू करेंगे।'
इन बयानबाजियों के बीच कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने अभी तक सीट-शेयरिंग को लेकर स्थिती फाइनल नहीं की है। कांग्रेस पहले ही ऐलान कर चुकी है कि पार्टी 126 विधानसभा सीटों वाली असम विधानसभा में से अकेले 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जबकि 26 सीटें गठबंधन दलों के लिए छोड़ेगी। इस कड़ी में कांग्रेस ने पहले ही 42 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
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इस बीच कांग्रेस गठबंधन में शामिल AJP के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने कहा है कि गठबंधन में सभी दलों ने यह संदेश देने के लिए हाथ मिलाया है कि वे भारतीय जनता पार्टी को हराने की अपनी कोशिश में एकजुट हैं। CPI(M) के राज्य सचिव सुप्रकाश तालुकदार ने गठबंधन को एक अच्छी शुरुआत। साथ ही इसे और मजबूत बनाने की बात कही।
कांग्रेस से राजयोर दल की डिमांड क्या थी?
सामाजिक कार्यकर्ता से राजनेता बने विधायक अखिल गोगोई की पार्टी रायजोर दल, कांग्रेस के साथ विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन चाहती थी। दोनों दलों के नेताओं के बीच लंबे समय से सीट शेयरिंग को लेकर बात नहीं बन पा रही थी। इस सिलसिले में अखिल गोगोई की असम के लिए कांग्रेस प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई के सा बातचीत हो चुकी थी, लेकिन दोनों दलों के बीच सीट-शेयरिंग को लेकर शुरू से तनाव रहा।

बता दें कि अखिल गोगोई ने कांग्रेस से कम से कम 12-15 विधानसभा सीटों की मांग की थी। इसमें वह खासकर अपनी पसंद की और जीतने वाली सीटों की डिमांड कर रहे थे। मगर, कांग्रेस ने उनको 4 सीटें ऑफर की थी, जिसे अखिल गोगोई ने स्वीकार नहीं किया। इसी डिंमाड के चलते राजयोग दल की कांग्रेस के साथ गछबंधन की बात नहीं बन पाई। अब अखिल गोगोई ने विधानसभा चुनाव में अकेले उतरने की बात कही है।
अखिल गोगोई की असम में ताकत कितनी?
अखिल गोगोई की पार्टी राजयोर दल 2021 के असम विधानसभा चुनाव में पहली बार लड़ी थी। इस चुनाव में रायजोर दल ने कुल 29 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को केवल एक सीट मिली थी, जो खुद अखिल गोगोई जीते थे। वह शिवसागर विधानसभा क्षेत्र से जीतकर विधानसभा पहुंच थे।
जब अखिल गोगोई चुनाव जीते तो वह CAA विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में जेल में बंद थे। इसके अलावा राजयोर दल का कुल प्रदर्शन सीमित रहा था। गोगोई की पार्टी मुख्य तौर से विपक्षी दलों के बीच वोट कटवा के रूप में चर्चा में रही। कुछ विधानसभा सीटों में उनकी पार्टी के वोट बीजेपी की जीत के अंतर से ज्यादा थे, जिससे कांग्रेस को नुकसान पहुंचा माना जाता है।
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