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BJP या सपा, अयोध्या में कौन ज्यादा मजबूत है? लोकसभा से विधानसभा के बिगड़े समीकरण

अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने को लेकर अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अयोध्या में सपा और बीजेपी कौन ज्यादा मजबूत है।

 Akhilesh yadav, Yogi Adityanath,

अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, AI एडिट। Photo Credit: ChattGPT

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से अयोध्या की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी मुकाबले को नया रंग दे दिया है। अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी, तो योगी ने पलटवार करते हुए अखिलेश को ही उनके सामने चुनावी मैदान में उतरने की चुनौती दे दी।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अखिलेश भी अयोध्या से नामांकन करें और वह भी वहां से अपनी किस्मत आजमाएंगे। दोनों नेताओं की इस बयानबाजी के बीच अयोध्या के पिछले चुनावी आंकड़े भी चर्चा में हैं। 2012 में सपा ने यहां जीत दर्ज की थी, 2017 में बीजेपी ने बड़े अंतर से बाजी पलटी और 2022 में भी सीट अपने पास रखी। साल 2022 में सपा के मत प्रतिशत में बड़ी बढ़ोतरी हुई। दूसरी तरफ, फैजाबाद लोकसभा सीट पर 2024 में सपा के अवधेश प्रसाद ने बीजेपी के लल्लू सिंह को हराकर बड़ा उलटफेर किया। ऐसे में सवाल है कि अयोध्या में बीजेपी की पकड़ कितनी मजबूत है और सपा की बढ़ती चुनौती 2027 में क्या गुल खिला सकती है?

अखिलेश और योगी के लिए  सियासी अखाड़ा है अयोध्या?

अयोध्या को लेकर योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अखिलेश ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि अगर बीजेपी अपने काम और दावों को लेकर आश्वस्त है तो योगी आदित्यनाथ अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं। इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने भी पलटवार किया और अखिलेश यादव को उनके सामने चुनाव लड़ने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश अयोध्या से नामांकन करें और वह भी वहीं से चुनाव लड़कर अपनी किस्मत आजमाएंगे।

अखिलेश यादव ने अयोध्या में बीजेपी की स्थिति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी के प्रत्याशी पवन पांडेय को टक्कर देने वाला उम्मीदवार बीजेपी को नहीं मिल रहा है। वहीं, योगी ने अयोध्या को आस्था का केंद्र बताते हुए कहा कि वह वहां राजनीति के लिए नहीं, बल्कि विकास के लिए जाते हैं। दोनों नेताओं की बयानबाजी ने अयोध्या को 2027 के चुनावी विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

 

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2012 में सपा की जीत, पवन पांडेय ने बनाई थी बढ़त

अयोध्या विधानसभा सीट पर 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के पवन पांडेय ने 55,262 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। बीजेपी के लल्लू सिंह को 49,857 वोट मिले थे। इस तरह सपा ने 5,405 वोटों के अंतर से सीट अपने नाम की थी। पवन पांडेय को कुल मतों का 28.74 प्रतिशत मिला, जबकि लल्लू सिंह का मत प्रतिशत 25.93 रहा।पांच साल बाद 2017 में चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

 

बीजेपी ने वेद प्रकाश गुप्ता को मैदान में उतारा और उन्हें 1,07,014 वोट मिले। सपा के पवन पांडेय को 56,574 वोट हासिल हुए। बीजेपी ने 50,440 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इस चुनाव में बीजेपी का मत प्रतिशत बढ़कर 49.20 प्रतिशत पहुंच गया, जबकि सपा का मत प्रतिशत घटकर 26.01 प्रतिशत रह गया। 2012 में जिस सीट पर सपा आगे थी, वहां 2017 में बीजेपी ने मजबूत बढ़त बना ली।

2022 में सपा का वोट प्रतिशत बढ़ा, BJP की जीत का अंतर घटा

2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वेद प्रकाश गुप्ता पर दोबारा भरोसा जताया। गुप्ता को 1,13,414 वोट मिले और उन्होंने 49.04 प्रतिशत मत हासिल किए। सपा के पवन पांडेय को 93,424 वोट मिले और उनका मत प्रतिशत बढ़कर 40.40 प्रतिशत पहुंच गया। इस बार बीजेपी की जीत का अंतर घटकर 19,990 वोट रह गया। 2017 में बीजेपी ने 50,440 वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 में उसकी बढ़त काफी कम हो गई।

 

सपा का मत प्रतिशत 26.01 से बढ़कर 40.40 प्रतिशत हो गया। बीजेपी सीट बचाने में सफल रही, लेकिन सपा ने अपने मत आधार में उल्लेखनीय विस्तार किया। यही वजह है कि अयोध्या विधानसभा सीट के पिछले चुनावी आंकड़े दोनों दलों के बीच मुकाबले को समझने के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।

लोकसभा चुनाव में भी बदली तस्वीर

अयोध्या विधानसभा सीट फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। लोकसभा चुनाव के नतीजे भी बीजेपी और सपा के बीच बदलते मुकाबले की कहानी बताते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लल्लू सिंह ने 4,91,761 वोट हासिल किए थे, जबकि सपा के मित्रसेन यादव को 2,08,986 वोट मिले थे। लल्लू सिंह ने 2,82,775 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। 

लल्लू सिंह को 5,29,021 वोट मिले, जबकि सपा के आनंद सेन को 4,63,544 वोट हासिल हुए। इस बार बीजेपी की जीत का अंतर घटकर 65,477 वोट रह गया। पिछले चुनाव की तुलना में मुकाबला काफी करीबी हो गया था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला।

सपा के अवधेश प्रसाद ने 5,54,289 वोट हासिल किए, जबकि बीजेपी के लल्लू सिंह को 4,99,722 वोट मिले। अवधेश प्रसाद ने 54,567 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस परिणाम ने फैजाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी की लगातार दो जीत का सिलसिला तोड़ दिया। लोकसभा चुनाव के इन नतीजों से स्पष्ट हुआ कि जहां बीजेपी ने 2014 और 2019 में बढ़त बनाए रखी थी, वहीं 2024 में सपा उसे पीछे छोड़ने में सफल रही।

 

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2027 से पहले क्या संकेत दे रहे हैं चुनावी आंकड़े?

अयोध्या के विधानसभा और लोकसभा चुनावों के आंकड़ों को एक साथ देखने पर अलग-अलग रुझान सामने आते हैं। विधानसभा में बीजेपी ने 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज की, लेकिन 2022 में उसकी जीत का अंतर घट गया। दूसरी ओर, सपा ने अपना मत प्रतिशत बढ़ाकर मुकाबले को मजबूत किया। लोकसभा चुनाव में भी 2014 से 2019 के बीच बीजेपी की जीत का अंतर कम हुआ और 2024 में सपा ने सीट जीत ली।2027 के विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे, विकास कार्य, सामाजिक समीकरण, उम्मीदवारों का चयन और मतदाताओं का रुझान अहम भूमिका निभा सकते हैं।

 

सपा की ओर से पवन पांडेय को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद मुकाबले को लेकर चर्चा और तेज है। अब अखिलेश यादव की चुनौती और योगी आदित्यनाथ के पलटवार ने इस चर्चा को और धार दे दी है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के परिणामों की सीधे तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि दोनों में चुनावी क्षेत्र, उम्मीदवार और मतदान के मुद्दे अलग हो सकते हैं।  अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों नेताओं की चुनावी चुनौती आगे किस दिशा में जाती है और 2027 में अयोध्या का सियासी मुकाबला क्या रूप लेता है।

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