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धर्म, धर्मांतरण, दलित और OBC, अमित शाह के पंजाब प्लान में क्या-क्या है?

भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में आगमी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। पार्टी इस बार नए सामाजिक और धार्मिक समीकरणों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

Punjab BJP

पंजाब बीजेपी के नेता, Photo Credit: BJP

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति को नए सिरे से जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। पार्टी अब राज्य में सिर्फ शहरी हिंदू वोट बैंक तक सीमित रहने के बजाय धर्म, कथित धर्मांतरण, नशा मुक्ति, OBC, दलित और ग्रामीण समाज जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर अपना राजनीतिक विस्तार करने की तैयारी में है। पंजाब में लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन की राजनीति करने वाली BJP अब अकेले चुनावी मैदान में उतरने की दिशा में काम करती दिखाई दे रही है। पार्टी के शीर्ष नेता गठबंधन के बिना चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।

 

BJP की रणनीति का पहला बड़ा मुद्दा धर्म और कथित धर्मांतरण है। धर्मांतरण के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक बीजेपी को जमकर समर्थन मिला है। हिंदूओं की बहुसंख्यक आबादी को अपने साथ जोड़ने के लिए पार्टी ने कई ऐसे मुद्दे उठाए जिससे हिंदू उनके साथ जुड़ सके। पिछले एक दशक से ज्यादा समय से बीजेपी की राजनीति का केंद्र बिंदु हिंदू ही बना हुआ है। हालांकि, पंजाब में हिंदू अल्पसंख्य है और सिख समुदाय की आबादी ज्यादा है। ऐसे में पंजाब में पार्टी को अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है। 

 

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धर्म और धर्मांतरण पर कैसे हो रहा काम?

भारतीय जनता पार्टी ने अब सिखों को साथ जोड़ने की कोशिश शुरू कर दी है। पार्टी अपने हिदू पार्टी के टैग को हटाना चाहती है और इसके लिए अब पार्टी ने एक हिंदू की जगह जट्ट सिख केवल सिंह ढिल्लों को प्रधान बनाकर साफ संकेत दे दिए हैं। पार्टी के तमाम हिंदू नेता भी सिर पर पगड़ी बांधकर राज्य में घूम रहे हैं। इसके साथ ही पार्टी गैर राजनीतिक सिख धार्मिक ग्रुप्स के साथ भी संपर्क बनाने की कोशिश कर रही है। इससे पार्टी को उम्मीद है कि उन्हें हिंदुओं के साथ-साथ सिख समुदाय के लोगों का वोट भी मिलेगा। 

 

इसके साथ ही पंजाब में धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। इस मुद्दे पर RSS ने मोर्चा संभाल रखा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, RSS सिखों के ईसाई धर्म में परिवर्तन के मुद्दे को उठा रही है। इसके साथ ही सिखों की सिख धर्म में वापसी भी करवा रही है। पंजाब के कई इलाकों में सिखों का ईसाई धर्म अपनाना एक प्रभावशाली मुद्दा बना हुआ है। 

नशे के मुद्दे पर मुखर

एक बड़ा मुद्दा नशा मुक्ति भी है। पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रही है। BJP इस मुद्दे को आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पंजाब चुनाव में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई, युवाओं को बचाने और राज्य को नशामुक्त बनाने का वादा BJP के प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल रहेगा। अमित शाह ने भी पंजाब में नशे, कर्ज और भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात कही थी।

 

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ओबीसी को साथ लाने की तैयारी

बीजेपी के लिए पंजाब चुनाव की रणनीति खुद अमित शाह तैयार कर रहे हैं। अमित शाह को उनकी राजनीतिक समझ और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए जाना जाता है। अमित शाह ने 2017 में उत्तर प्रदेश में भी जातियों का एक ऐसा सामाजिक गठजोड़ बनाया जिससे पार्टी को बंपर जीत मिली। अब पंजाब में उसी तर्ज पर काम शुरू कर दिया गया है। बीजेपी ने पंजाब में अपनी सामाजिक पहुंच बढ़ाने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जैसे नेताओं को भी आगे कर रही है। सैनी OBC समुदाय से आते हैं और पार्टी का एक बड़ा ओबीसी चेहरा बनकर उभरे हैं। खास बात यह भी है कि ओबीसी समाज के ज्यादातर लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, जहां बीजेपी को कमजोर माना जाता है। पार्टी आने वाले दिनों में एक राज्यस्तरीय ओबीसी सम्मेलन करने का प्लान बना रही है। 

दलित वोटबैंक को साधने की कोशिश

पंजाब में दलित सबसे बड़ा वोटबैंक है। हालांकि, इस बड़े वोटबैंक की सबसे बड़ी कमजोरी है इसका बिखराव। दलित समुदाय अलग-अलग गुटों में बंटा हुआ है। बीजेपी इस बात को अच्छी तरह समझ रही है और वह दलित आबादी को साथ लाने के लिए अलग-अलग दलित समुदायों में पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। रविदासिया समुदाय तक पिछले कुछ समय में पार्टी ने मजबूत पहुंच बनाई है। पीएम मोदी से लेकर अमित शाह तक तमाम नेता इस समुदाय के कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं। 

 

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आसान नहीं बीजेपी की राह

पंजाब में BJP की राह आसान नहीं है। राज्य की राजनीति में किसान आंदोलन, पंथक मुद्दे, क्षेत्रीय पहचान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और केंद्र-राज्य संबंध, बंधी सिखों की रिहाई, चंडीगढ़ का मुद्दा और पानी जैसे सवाल हमेशा प्रभावी रहे हैं। इन मुद्दों पर बीजेपी को अपनी बात जनता के सामने रखनी होगी जिनमें ज्यादातर समय पार्टी बैकफुट पर रही है। किसान आंदोलन के बाद से पार्टी के खिलाफ पंजाह में माहौल बन गया। उनकी पुरानी सहयोगी पार्टी भी अलग हो गई। ऐसे में 2027 का चुनाव पंजाब में बीजेपी की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है। 


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