भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को वंदे मातरम् को लेकर 10 सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया। इसमें पार्टी ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत को लेकर राजनीति करने और वोट बैंक के दबाव में फैसले लेने का आरोप लगाया। BJP ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के 19 अगस्त 2026 के उस फैसले का विरोध किया जिसमें 1937 के प्रस्ताव को फिर से स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की पहली दो कड़ियां गाने की बात कही गई थी।
BJP ने प्रस्ताव में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण की ऐतिहासिक विरासत और सम्मान बनाए रखने पर जोर दिया। पार्टी ने महात्मा गांधी के उस कथन का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने इसे साम्राज्यवाद विरोधी पुकार और शुद्ध राष्ट्रीय भावना से जुड़ा बताया था। BJP ने कहा कि राष्ट्रीय गीत को राजनीतिक सुविधा या तुष्टीकरण के लिए सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
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BJP ने कांग्रेस पर किया हमला
BJP ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के फैसले को लेकर कहा कि 1937 के प्रस्ताव के आधार पर वंदे मातरम् को सीमित करना उचित नहीं है। पार्टी के मुताबिक, पूरा वंदे मातरम् देश की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रतीक है। प्रस्ताव में BJP ने कहा कि किसी राजनीतिक दल का पुराना प्रस्ताव देश के संविधान और संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं हो सकता। पार्टी ने कांग्रेस के फैसले को इसी आधार पर चुनौती दी।
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BJP ने प्रस्ताव में संविधान सभा की 1950 की घोषणा का जिक्र करते हुए कहा कि वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया था। साथ ही, 2026 में संसद में हुए संशोधन का भी हवाला दिया गया जिसमें राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रीय गान की तरह ही कानूनी सुरक्षा देने की बात कही गई है। पार्टी ने कहा कि वंदे मातरम् को सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण या संकीर्ण वोट बैंक की राजनीति के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। BJP ने 1937 में वंदे मातरम् को लेकर उठे विवाद के ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को भी जनता के सामने रखने की बात कही।
महात्मा गांधी के विचारों और इतिहास का दिया हवाला
BJP ने महात्मा गांधी के उस बयान को भी अपने अभियान का हिस्सा बनाने की बात कही जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् को साम्राज्यवाद विरोधी पुकार बताया था। पार्टी अब अपने कार्यकर्ताओं के जरिए देशभर में इसके इतिहास, अर्थ और राष्ट्रीय महत्व को लोगों तक पहुंचाएगी।
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BJP ने कहा कि खास तौर पर युवाओं को वंदे मातरम् के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका के बारे में जागरूक किया जाएगा। प्रस्ताव में मुस्लिम लीग की आपत्तियों और उसके बाद की सांप्रदायिक राजनीति का भी उल्लेख किया गया है। पार्टी ने प्रस्ताव के अंत में कहा कि राजनीतिक सुविधा या तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम् के सम्मान और विरासत से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।