उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (BSP) अपनी खोई विरासत को पाने के लिए जूझ रही है। वह एक बार फिर से 2007 की सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले पर काम कर रही है। हालांकि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उसका कोर वोट भी खिसक गया। पार्टी इसको समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की संविधान बदलने की फैलाई गई अफवाह का कारण मान रही है। BSP ने अपने कोर वोट को साधने के लिए संगठन की कई बार बैठक की है। मायावती यूपी के साथ उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव को लेकर भी सक्रिय है। उन्होंने मंगलवार को उत्तराखंड के सभी जिलों के पदाधिकारियों के साथ कई घंटे की बैठक करके उनको जीत का मंत्र दिया और पदाधिकारियों को जी जान से अपने क्षेत्र में जुटने के लिए प्रेरित किया।
मायावती ने उत्तराखंड के पदाधिकारियों को बताया कि BSP पूंजीपतियों और धन्नासेठों के धनबल के आधार पर राजनीति नहीं करती है। उन्होंने कहा, 'BSP या उसकी सरकार इनके इशारों पर नहीं चलती है। इसलिए प्रदेश में छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन करके दलित, आदिवासी, अति पिछड़ों के साथ सामान्य वर्ग के गरीबों को जोड़ने का काम करें। उनको BSP की नीतियों के बारे में बताएं। BSP कैसे सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की राजनीति करती है। BSP के आने से उत्तराखंड प्रदेश में नए जिलों व तहसीलों की स्थापना की जाएगी।'
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2022 में उत्तराखंड में 2 सीटें जीती थी BSP
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में BSP ने यूपी में महज एक सीट पर जीत हासिल की थी जबकि उत्तराखंड में पार्टी ने मंगलौर और लक्सर विधानसभा सीटें जीतकर अन्य पार्टियों को चौंका दिया था। बीएसपी ने साल 2002 में उत्तराखंड में 13 सीटों पर जीत हासिल की थी।
साल 2007 और 2012 में BSP ने विधानसभा की तीन-तीन सीटों पर जीत का परचम लहराया था। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी खाता नहीं खोल पाई थी लेकिन 2022 के विधानसभा में 2 सीटें जीतने के बाद BSP में खोई हुई विरासत को पाने की उम्मीद जाग गई।