विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस समय विपक्षी दलों से ज्यादा अपना घर संभालने की दिखाई दे रही है। पंजाब से लेकर गोवा तक पार्टी को संगठन के भीतर असंतोष, नेतृत्व को लेकर खींचतान और कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। जिन राज्यों में पार्टी को एकजुट होकर विरोधी पार्टी से लड़ना था उन्हीं राज्यों में पार्टी के नेता आपस में लड़ रहे हैं।
सबसे गंभीर संकट पंजाब कांग्रेस में है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमों के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान लगातार बढ़ी है। कांग्रेस हाईकमान ने वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया, लेकिन चन्नी समर्थक इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। जून में हाईकमान को स्थिति का आकलन करने के लिए तीन वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक बनाकर भेजना पड़ा था और जुलाई में चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाकर अन्य नेताओं को भी जगह दी गई लेकिन चन्नी इससे संतुष्ट नहीं हुए।
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चन्नी हुए बागी
इसके बाद करीब 50 कांग्रेस नेताओं की चन्नी के आवास पर बैठक और कई वरिष्ठ नेताओं के उनके साथ खड़े होने से विवाद और खुलकर सामने आया। इनमें सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक परगट सिंह जैसे नेता भी शामिल रहे। कुछ नेताओं ने वड़िंग के कार्यक्रमों के बहिष्कार तक का फैसला किया। इसके बाद भूपेश बघेल पंजाब में स्थिति संभालने के लिए आए लेकिन स्थिति उल्टा खराब हो गई। चन्नी के समर्थकों ने पार्टी कार्यक्रमों में उनके समर्थन में नारे लगाए, जिसके बाद पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को अनुशासनहीनता करने वालों को पार्टी से निकालने तक की चेतावनी देनी पड़ी। इसके बाद एक परिवार एक टिकट को लेकर पार्टी में घमासान चल रहा है। अभी
राहुल गांधी
के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
गोवा में खड़गे नहीं संभाल पाए बगावत
गोवा में कांग्रेस के लिए स्थिति और असहज तब हो गई जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दौरे से ठीक पहले 100 से ज्यादा बूथ स्तर के एजेंट और कार्यकर्ताओं के इस्तीफे की खबर सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक इन कार्यकर्ताओं ने पार्टी में सुस्ती और नेतृत्व को लेकर स्पष्टता की कमी जैसी वजहें बताईं। खड़गे गोवा में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से मिलने और संगठन को मजबूत करने पहुंचे थे, लेकिन उनके दौरे की शुरुआत ही इस घटनाक्रम से हुई। इससे कुछ दिन पहले संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी गोवा गए थे लेकिन उन्हें भी विरोध का सामना करना पड़ा था।
गोवा में क्या है लड़ाई?
गोवा कांग्रेस में लड़ाई अमित पाटकर और गिरीश चोडनकर के बीच नेतृत्व परिवर्तन को लेकर है। जून 2026 में कांग्रेस हाईकमान ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमित पाटकर को हटाकर गिरीश चोडनकर को दोबारा गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया। चोडनकर इससे पहले भी प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था। पाटकर को हटाकर चोडनकर को वापस लाने के फैसले से पार्टी के एक धड़े में नाराजगी बढ़ी और इसे लेकर कई नेताओं व कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए।
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यूपी, उत्तराखंड में असहज
अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी चुनाव होने हैं। इन चुनावों के लिए तमाम राजनीतिक दल तैयारी कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस यहां भी कई बार असहज स्थिति में नजर आती है। उत्तर प्रदेश में पार्टी
अखिलेश यादव
के साथ गठबंधन में लड़ना चाहती है लेकिन पार्टी के भीतर सीटों की संख्या को लेकर कलह है। कई नेता तो खुलकर ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा उत्तराखंड में भी कांग्रेस पार्टी के भीतर सब कुछ सही नहीं चल रहा है। कई नेताओं के नाराज होने की खबरें सामने आती रही हैं लेकिन यहां पंजाब और गोवा जैसी खुली बगावत देखने को नहीं मिली है।