कांग्रेस ने साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। कांग्रेस ने इशारा किया है कि गोवा विधानसभा चुनाव के लिए 'गोवा फॉरवर्ड पार्टी' के साथ गठबंधन हो सकता है। गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (GPCC)के अध्यक्ष अमित पाटकर ने शनिवार को ऐसे संकेत दिए हैं।
कांग्रेस समिति में गोवा मामलों के प्रभारी माणिकराव ठाकरे और GFP चीफ विजय सरदेसाई की मौजूदगी में अमित पाटकर ने कहा है कि साल 2027 में गोवा फॉरवर्ड के साथ गठबंधन हो सकता है। उन्होंने यह सीधे तौर पर नहीं कहा है।
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अमित पाटकर, अध्यक्ष, GPCC:-
'अभी आपको केवल चार दिनों के लिए कार्निवल में खाने-पीने और आनंद लेने को कहा गया है। जब हम गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे, तब आप हर दिन खाने-पीने और आनंद लेने का मौका पाएंगे।'
GFP का क्या कहना है?
जीएफपी प्रमुख विजय सरदेसाई ने कहा कि कांग्रेस ने राज्य के विकास के लिए काम किया है, लेकिन अब इसकी गति धीमी हो गई है। उन्होंने विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस का जिक्र करते हुए कहा कि अब पार्टी को तेजी से काम करना होगा।
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गोवा में कांग्रेस की ताकत क्या है?
गोवा में कुल 40 विधानसभा सीटें हैं। कांग्रेस के पास सिर्फ 3 विधायक हैं, वहीं गोवा फॉरवर्ड पार्टी के पास सिर्फ 1 सीट है।
बीजेपी के लिए कितनी बड़ी चुनौती है यह गठबंधन?
कांग्रेस आखिरी बार 2012 में गठबंधन के सहारे सत्ता में आई थी। उसके बाद कभी कांग्रेस सत्ता में नहीं आई। बीजेपी ने साल 2012 के बाद से ही अपनी जड़ें मजबूत कीं। कांग्रेस का जनाधार साल-दर साल कमजोर होता गया। अब कांग्रेस गोवा फॉरवर्ड के सहारे अपनी जड़ें मजबूत करने में जुटी है।
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क्या मुश्किलें बढ़ सकती हैं?
कांग्रेस और गोवा फॉरवर्ड पार्टी संभावित गठबंधन से बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जानकारों का कहना है कि इस गठबंधन के साथ विपक्षी वोटों का बिखराव रुकेगा, क्योंकि पहले कांग्रेस, जीएफपी, एएपी और आरजीपी के बीच वोट बंटने से बीजेपी को लाभ मिलता था। अब अगर यह मुकाबला हुआ तो एंटी इनकंबेंसी के खिलाफ जनता को एक विकल्प मिलेगा।
जहां कैथोलिक और क्षेत्रीय वोटर मजबूत स्थिति में हैं, वहां बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष का कुल वोट शेयर बीजेपी से ज्यादा था। अब जमीन पर नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।