logo

मूड

ट्रेंडिंग:

2017,2022 और अब 2027, साल बदले लेकिन पंजाब कांग्रेस में बगावत की वही कहानी

पंजाब कांग्रेस में घमासान जारी है। चरनजीत सिंह चन्नी पार्टी से नाराज चल रहे हैं और उन्होंने समर्थकों के साथ मीटिंग की है। इससे पहले 2017 और 2022 में भी चुनाव से पहले पार्टी को इस तरह की गुटबाजी का सामना करना पड़ा था।

Punjab Congress rift

पंजाब कांग्रेस में बगावत, Photo Credit: Social Media

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर बगावत देखने को मिल रही है। इस बार पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व सीएम चरनजीत सिंह चन्नी ने बागी तेवर दिखाए हैं। उन्हें कांग्रेस ने पंजाब कांग्रेस की कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया था लेकिन उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनना था। इसके बाद उन्होंने बगावत छेड़ दी और राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने की मांग कर दी। इसके साथ ही उन्होंने 3 जुलाई को अपने घर पर अपने गुट के नेताओं की एक मीटिंग भी बुलाई। इस मीटिंग के बाद से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। 

 

पंजाब कांग्रेस में इसी तरह का माहौल साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले भी दखने को मिला था। 2022 चुनाव से कुछ महीने पहले ही कांग्रेस पार्टी ने गुटबाजी के कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद से हटाया था और उसके बाद चरनजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया था। इससे पहले नवजोत सिंह सिद्दू को मनाने के लिए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि, जब चन्नी सीएम बने तो उन्हें कुछ ही दिनों का समय मिला था और चुनावों की घोषणा हो गई थी। 

 

यह भी पढ़ें: ममता बनर्जी से क्यों अलग हुईं चंद्रिमा भट्टाचार्य? TMC बंगाल अध्यक्ष पद छोड़ा

सीएम फेस घोषित करने पर अड़े थे चन्नी

2022 में चन्नी को कुछ दिन का कार्यकाल ही मिला था। इसके बाद पार्टी को चुनाव का सामना करना पड़ा था। इस दौरान भी चरनजीत सिंह चन्नी और पार्टी आलाकमान के बीच टकराव देखने को मिला था। पार्टी बिना सीएम फेस के चुनावी मैदान में उतरना चाहती थी लेकिन चन्नी ने इसका विरोध किया। बतौर प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्दू सीएम पद के प्रबल दावेदार थे। हालांकि, चन्नी को यह बात मंजूर नहीं थी। उन्होंने पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाया और खुद को सीएम फेस घोषित करने के लिए कहा। इसके बाद खुद राहुल गांधी ने चन्नी को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया। 

2017 से कैप्टन ने खोला था मोर्चा

पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ बगावत का यह पहला वाक्या नहीं है। इससे पहले 2017 के चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह भी पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ बगावत कर चुके हैं और वह इसमें कामयाब भी रहे थे। प्रताप सिंह बाजवा 2015 में पार्टी के अध्यक्ष थे लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद अध्यक्ष बनना चाहते थे। कैप्टन ने बाजवा को हटाने के लिए कांग्रेस हाईकमान पर पूरा दबाव बना दिया था। यहां तक कि पार्टी छोड़कर भाजपा या फिर अलग पार्टी बनाने की धमकी भी दे डाली थी। 

राहुल गांधी के समर्थन के बावजूद हटे थे बाजवा

प्रताप सिंह बाजवा को राहुल गांधी का समर्थन हासिल था। हालांकि, राहुल गांधी भी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नहीं रख सके थे। कैप्टन की जिद्द के आगे राहुल गांधी को भी झुकना पड़ा था। पंजाब कांग्रेस में घमासान बहुत ज्यादा हो गया था और दोनों नेताओं ने एक दूसरे पर जमकर कीचड़ उछाला था। इसके बाद पार्टी ने बाजवा की जगह कैप्टन अमरिंदर सिंह को कमान सौंप दी थी और कांग्रेस के सीएम फेस के रूप में उनके नाम की घोषणा कर दी थी। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 10 साल बाद सत्ता मिली थी। 

 

यह भी पढ़ें: समाजवादी पार्टी का मुख्य सचेतक कौन? 3 चेहरे हैं प्रबल दावेदार

2027 से पहले गुटबाजी

पंजाब में कांग्रेस पार्टी की गुटबाजी एक बार फिर से खुलकर सामने आ गई है। अगले साल की शुरुआत में चुनाव होंगे लेकिन पार्टी के नेता एक साथ काम करने को तैयार नहीं है। चरनजीत सिंह चन्नी पार्टी अध्यक्ष या सीएम फेस से कम पर मानने को तैयार नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही कई अन्य नेताओं को पार्टी को एडजस्ट करना है। पार्टी बिना सीएम फेस के चुनाव में जाना चाहती है। 

Related Topic:#Punjab News#Congress

और पढ़ें