पंजाब कांग्रेस एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां वह 2021 में खड़ी थी। सोशल मीडिया और मीडिया में उस समय पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने की खबरें सुर्खियों में थी। अब पंजाब कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाने की खबरें चल रही हैं। आलाकमान और कांग्रेस नेता नेतृत्व परिवर्तन से मना कर रहे हैं। इस दावे पर लोग कह रहे हैं कि ऐसा ही कुछ आलाकमान ने कर्नाटक के लिए भी कहा था लेकिन वहां तो उल्टा ही हुआ। अब पंजाब में क्या होगा इसका फैसला करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने तीन नेताओं को ऑब्जर्वर बनाकर भेज दिया है।
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। पंजाब चुनाव के बारे में तमाम राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस पार्टी पंजाब में मजबूत स्थिति में है लेकिन पार्टी की गुटबाजी से नुकसान होगा। 2022 में हार की वजह भी गुटबाजी को ही माना गया था। इसी गुटबाजी को खत्म करने के लिए पंजाब के नेताओं को दिल्ली बुलाकर कुछ दिन पहले राहुल गांधी मीटिंग कर चुके हैं। हालांकि, इस मीटिंग में भी गुटबाजी की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद आलाकमान की मीटिंग हुई जिसमें सिर्फ पंजाब के प्रभारी को बुलाया गया।
यह भी पढ़ें: पंजाब में सरकार बनाने के लिए अकाली दल को साथ लेगी BJP? जानिए क्यों है जरूरी
अब उतरेंगे तीन ऑब्जर्वर
विधानसभा चुनाव से पहले गुटबाजी खत्म करने के लिए आलाकमान ने तीन ऑब्जर्वर लगा दिए। इनमें अजय माकन भी शामिल हैं जिन्हें पार्टी कई अहम मुद्दों पर जिम्मेदारी दे चुकी है। इसके राहुल गांधी की करीबी नेता मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव को पंजाब में ऑब्जर्वर के रूप में भेजा गया है। ये तीनों नेता पंजाब आकर कार्यकर्ताओं-नेताओं से फीडबैक लेंगे और अपनी रिपोर्ट सीधे कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपेंगे।
क्या नेतृत्व परिवर्तन होगा?
नेतृत्व परिवर्तन के सवाल पर कांग्रेस का साफ कहना है कि कोई परिवर्तन नहीं होगा। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी राज्य में नए चेहरे को कमान सौंप सकती है और उसी की संभावना तलाशने के लिए इन तीन नेताओं को भेजा जा रहा है। कांग्रेस के लेटर के अनुसार, तीनों ऑब्जर्वर पंजाब में राजनीतिक सिनारियों पर चर्चा करेंगे और उसकी रिपोर्ट जल्दी से जल्दी हाईकमान को देंगे।
चन्नी बने आफत?
पंजाब कांग्रेस में इस समय पूर्व सीएम चरनजीत सिंह चन्नी और मौजूदा प्रधावा राजा वड़िंग के बीच खिंचतान चल रही है। बताया जा रहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की मौजूदगी में ही यह नेता भिड़ गए थे। इससे पहले चन्नी कांग्रेस की एक मीटिंग में पंजाब में दलितों की सबसे बड़ी आबादी होने के बावजूद संगठन में कम पद मिलने पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उनका आरोप सीधा जट्ट सिख नेताओं पर था। चन्नी ने हाल ही में दिल्ली में हुई मीटिंग में भी मुद्दा उठाया था कि राजा वडिंग के क्षेत्र में कांग्रेस की स्थानीय निकाय चुनाव में हार हुई है। चन्नी का कहना था कि जो नेता खुद अपने क्षेत्र में निकाय चुनाव नहीं जीतवा सका वह विधानसभा चुनाव में कैसे जीत दिलाएगा।
चन्नी के मजबूत प्वाइंट यह हैं कि वह पार्टी का दलित चेहरा हैं और दलित पंजाब में सबसे बड़ा वोटबैंक हैं। इसके अलावा वह पूर्व सीएम भी रह चुके हैं और आम लोगों में उनकी छवि अच्छी है। हालांकि, पार्टी के अंदर एक बड़ा धड़ा है जो उनके नेतृत्व को सिरे से खारिज कर रहा है। इसके साथ ही पिछले विधानसभा चुनाव में वह अपनी दोनों सीटों से चुनाव हार गए थे और इसके बाद लंबे समय तक पार्टी में काम नहीं किया। उनके विदेश जाने की चर्चा भी कांग्रेस को परेशान करती रही। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वह जमीन पर कम दिखाई देते हैं और विदेश में ज्यादा रहते हैं।
यह भी पढ़ें: खालिस्तान समर्थक MP अमृतपाल सिंह हुए मजबूत, 2027 से पहले मिला इस दिग्गज का साथ
यात्रा से पहले निकलेगा हल
कांग्रेस पार्टी की अब कुछ ही राज्यों में सरकार है और पार्टी को केरल के बाद अब पंजाब से उम्मीद है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के नेता पंजाब को लेकर मंथन कर रहे हैं। पार्टी ने गुटबाजी को कम करने और एकजुटता का संदेश देने के लिए पंजाब में तीन दिनों की बस यात्रा कर सभी 117 सीटों तक पहुंचने का प्लान बनाया है। दावा किया जा रहा है कि सभी नेता एक ही बस में सवार होंगे। हालांकि, पार्टी मनरेगा प्रदर्शन के समय भी ऐसी कोशिश कर चुकी है जिसमें गुटबाजी खुलकर सामने आ गई थी। अब बस यात्रा से पहले पार्टी पंजाब में सभी जिम्मेदारियों को तय करना चाहती है और उसके बाद चुनाव अभियान में जुटना चाहती है।