पंजाब कांग्रेस में शुरू हुई कलह थमने का नाम नहीं ले रही है।
राहुल गांधी
की विदेश यात्रा के बाद अब कांग्रेस पार्टी लगातार दिल्ली में कलह खत्म करने के लिए मीटिंग कर रही है। इसी सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक राणा गुरजीत सिंह आज दिल्ली पहुंचे हैं। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से आज इन नेताओं की मुलाकात होगी। चरनजीत सिंह चन्नी पार्टी से नाराज चल रहे हैं और उन्हें मनाने के लिए रणदीप सुरजेवाला ने भी उनसे मुलाकात की है। सभी की नजर चन्नी पर है कि उनका अगला कदम क्या होगा।
कांग्रेस पार्टी ने कई दिनों के मंथन के बाद चुनाव के लिए टीम की घोषणा की थी। राजा वडिंग को अध्यक्ष पद से हटाए जाने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बना दिया गया। इसके बाद चन्नी ने बगावत का रुख अपनाया और मोहाली में अपने घर पर अपने समर्थनक नेताओं के साथ बैठक कर आलाकमान के फैसले को चैलेंज करने की बात कही। चन्नी राहुल गांधी और पार्टी आलाकमान से बात करने की जिद्द कर रहे हैं लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया है।
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चन्नी से नाराज आलाकमान
रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान चरनजीत सिंह चन्नी से नाराज है। वह राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें संदेश भेज दिया है कि मुलाकात फिलहाल संभव नहीं है। कल प्रताप सिंह बाजवा की दिल्ली में मीटिंह हुई और केसी वेणुगोपाल ने उन्हें चन्नी से मिलने भेजा। इसके बाद चन्नी और उनके बीच चंडीगढ़ में मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद आज चन्नी समेत अन्य सांसदों और नेताओं की दिल्ली में केसी वेणुगोपाल के साथ मीटिंग होगी।
वडिंग का हटना मुश्किल
कांग्रेस आलाकमान को अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद प्रभारी भूपेश बघेल ने साफ कर दिया है कि नेतृत्व परिवर्तन कोई खेल नहीं है। यानी पार्टी अभी भी राजा वडिंग के साथ ही चुनावी मैदान में उतरना चाहती है। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले संगठन में बदलाव करने से संगठन कमजोर होगा। इसलिए वडिंग का हटना मुश्किल माना जा रहा है। कांग्रेस आलाकमान भी चन्नी के बागी रुख को कुछ खास महत्व नहीं दे रहा।
क्या चन्नी ने गलत पंगा ले लिया?
चरनजीत सिंह चन्नी कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता हैं। अमरिंदर सिंह को हटाकर राहुल गांधी ने उन्हें ही सीएम के रूप में चुना था। इसके बाद उन्हीं को सीएम फेस बनाकर 2022 का चुनाव लड़ा गया और उन्हें दो सीटों से टिकट दिया गया। हालांकि, इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी बुरी तरह हार गई और चन्नी खुद दोनों सीटों से हार गए। इसके बाद चन्नी लोकसभा जीतकर दिल्ली पहुंचे और अब वह अध्यक्ष बनना चाहते हैं। पार्टी के सर्वे में चन्नी सबसे मशहूर चेहरे के रूप में सामने आए हैं।
हालांकि, चन्नी की इस बागी रुख के बाद पार्टी में उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही राहुल गांधी भी उनसे नाराज हैं और उन्हें मिलने तक का समय नहीं दिया। चन्नी को संदेश दिया गया है कि पार्टी आलाकमान के फैसले को मानना ही होगा। भूपेश बघेल ने साफ कर दिया है कि परिवर्तन नहीं होगा। अब चन्नी दिल्ली में मुलाकात कर रहे हैं और माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें समझा लेगी।
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क्या अलग पार्टी बनाएंगे चन्नी?
चरनजीत सिंह चन्नी की मोरिंडा मीटिंग में कांग्रेस के कई नेता पहुंचे थे, जिनमें पूर्व मंत्री, विधायक, उम्मीदवार और मौजूदा विधायकों समेत कई स्थानीय नेता भी शामिल थे। इसके बाद सुखजिंदर रंधावा ने भी उनका साथ दिया और दोनों साथ नजर आए। मोरिंडा मीटिंग में नेताओं ने कहा था कि चन्नी जो भी फैसला लेंगे वे उनके साथ हैं। हालांकि, पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और है। चन्नी के साथ दिखाई दे रहे ज्यादातर नेता चन्नी के साथ नहीं बल्कि राजा वडिंग के खिलाफ हैं। कांग्रेस पार्टी में पहले भी इस तरह की गुटबाजी देखी गई है, जहां एक गुट को हटाने के लिए अन्य सारे गुट एक साथ आए हैं। सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे कई अन्य नेता सिर्फ इसलिए चन्नी के साथ हैं क्योंकि वे प्रधान बदलना चाहते हैं। मीटिंग के बाद भी कई नेताओं ने कहा था कि कांग्रेस आलाकमान के साथ हैं लेकिन फैसले पर विचार किया जाना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर चन्नी अलग पार्टी बनाने या किसी दूसरी पार्टी में जाने का फैसला लेते हैं तो उनके साथ दिखाई दे रहे कई नेता कांग्रेस पार्टी के प्रति निष्ठा जाहिर करेंगे और कांग्रेस में ही रहेंगे। ऐसे में चन्नी अकेले पड़ जाएंगे। चन्नी भी यह बात जानते हैं कि पार्टी के खिलाफ बगावत करने में ज्यादा नेता उनका साथ नहीं देंगे।