भारत में शादियों में जब तक बैंड की आवाज ना सुनाई दे तब तक लोगों को शादी का आनंद नहीं आता और बैंड शादी में बहुत जरूरी माना जाता है। वैसी भी शादी का दिन किसी भी परिवार के लिए सबसे खास माना जाता है और इस दिन बैंड बजाने को लोग शुभ भी मानते हैं। हिमाचल प्रदेश में एक परिवार के लिए शादी में बैंड बाजे का ना आना पूरी शादी में परेशानी का कारण बन गया। बारात निकलने का समय हो चुका था, मेहमान और रिश्तेदार तैयार थे, लेकिन जिस बैंड को पहले से बुक किया गया था, वह मौके पर नहीं पहुंचा।
परिवार वालों के अनुसार, काफी देर तक इंतजार के बाद परिवार को मजबूरी में दूसरी व्यवस्था करनी पड़ी। शादी के बाद परिवार वालों ने बैंड वालों के खिलाफ जिला कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत की। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना और बैंड संचालक की सेवा में कमी और बिजनेस में अनु्चित व्यवहार का दोषी माना। इसके साथ ही कोर्ट ने बैंड वालों को 39 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
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क्या है पूरा मामला?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने अपनी शादी के लिए पहले से एक बैंड बुक कराया था। इसके लिए एक महीने पहले ही 4200 रुपये एडवांस दे दिए गए थे और कुल 9000 रुपये में बुकिंग की गई थी, ताकि शादी वाले दिन किसी तरह की परेशानी न हो। हालांकि, शादी वाले दिन जब बारात निकलने का समय आया तो बैंड मौके पर नहीं पहुंचा। परिवार की ओर से कई बार फोन कर संपर्क करने की कोशिश की गई और बैंड वाले ने शुरुआत में कहा कि वह रास्ते में है। बाद में उसने अपना फोन बंद कर लिया और उससे संपर्क नहीं हो पाया। काफी देर तक बाराती इंतजार करते रहे और बारात भी लेट हो गई। इसके बाद परिवार वालों ने कुछ और व्यवस्था की।
शिकायतकर्ता का कहना था कि बैंड नहीं आने की वजह से उन्हें अंतिम समय में दूसरी व्यवस्था करनी पड़ी, जिससे 10 हाजर का एक्स्ट्रा खर्च उठाना पड़ा। इसके अलावा रिश्तेदारों और मेहमानों के सामने परिवार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। शादी जैसे खास मौके पर हुई इस लापरवाही से पूरे परिवार को मानसिक तनाव और परेशानी झेलनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने जिला कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने बैंड को माना दोषी
सुनवाई के दौरान कंज्यूमर कोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की। बैंड वाले कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए नहीं आए। इसके बाद कंज्यूमर कोर्ट ने माना कि बैंड संचालक तय समय पर अपनी सेवा देने में विफल रहा। कंज्यूमर कोर्ट ने कहा कि शादी जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में समय पर सेवा उपलब्ध कराना बैंड संचालक की जिम्मेदारी होती है। अगर बुकिंग लेने के बाद भी सेवा नहीं दी जाती है तो यह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में कमी मानी जाएगी।
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39 हजार का जुर्माना लगाया
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बैंड संचालक की लापरवाही के कारण शिकायतकर्ता और उसके परिवार को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक पीड़ा और सामाजिक असुविधा भी हुई। इन्हीं तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने बैंड संचालक को कुल 39 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसमें एडवांस दिए गए 4000 रुपये, शादी के समय बैंड पर खर्च किए गए 1000 रुपये, मुकदमे की फीस और अन्य खर्च शामिल हैं। कोर्ट ने माना की वादे के अनुसार सेवा देना बैंड वाले की जिम्मेदारी थी। कोर्ट ने आदेश की कॉपी दोनों पक्षों को दे दी है और वेबसाइट पर भी अपलोड कर दी है।