दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) के चुनाव में एक बार फिर जोरदार मुकाबले की उम्मीद जताई जा रही है। दिल्ली में हुए GenZ आंदोलन और फिर सत्य निकेतन की घटना के बाद से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को बैकफुट पर माना जा रहा था। इसी बीच नेशनल स्टू़डेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के उम्मीदवारों की लिस्ट ने उसके ही घर में लड़ाई करा दी है। अब NSUI के ही दो मजबूत उम्मीदवार बागी होकर चुनाव में हैं और NSUI अपनों से ही लड़ने को मजबूर हो गई है।
NSUI के लिए यह मुश्किल भरा इसलिए भी है कि पिछले 7 में से पांच बार वह अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं जीत पाई है। उपाध्यक्ष पद पर 7 में 3 बार, सचिव पद पर सिर्फ एक बार और सह सचिव पद पर उसे सिर्फ 3 बार ही जीत मिली है। यानी 7 चुनाव के कुल 28 पदों में NSUI को सिर्फ 9 पर जीत मिली है जबकि 19 पर ABVP ने जीत हासिल की है।
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NSUI ने खो दिया मौका?
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में दिल्ली यूनिवर्सिटी के लड़के-लड़कियां बड़ी संख्या में गए थे। माना जा रहा है कि इसके चलते ABVP दबाव में है। ABVP के भी कई नेता मानते हैं कि उनके लिए यह चुनाव मुश्किल है। इस बीच NSUI की आपसी सिर फुटौव्वल देखकर ABVP की बांछें खिल गई हैं। जंतर-मंतर के बाद दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे ने भी NSUI को मौका दिया। खुद NSUI के अध्यक्ष विनोद जाखड़ वहां पहुंचे और ABVP से लेकर बीजेपी तक को घेरते दिखे। हालांकि, उम्मीदवारों के नाम का एलान इसके बाद हुआ और NSUI बंटती दिखी।
इस बार कौन-कौन है उम्मीदवार?
अध्यक्ष- यश डबास (ABVP), विजयशंकर मीणा(NSUI)
उपाध्यक्ष-इशू मौर्य (ABVP), वीर चतरथ (NSUI)
सचिव-रिया छाबड़ी(ABVP), नम्रता चौधरी (NSUI)
संयुक्त सचिव- लक्ष्यराज सिंह (ABVP), गोपाल चौधरी (NSUI)
वहीं, NSUI के ही दो बागी भी मैदान में हैं। दीपांशु शौकीन लगातार NSUI में सक्रिय रहे। उन्होंने नामांकन भी किया लेकिन बाद में उनसे नामांकन वापस लेने को कहा गया। इस पर दीपांशु शौकीन ने इनकार कर दिया और अब वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। वह उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं और माना जा रहा है कि इसका फायदा ABVP के इशू मौर्य को मिल सकता है।
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इसी तरह NSUI के विशेष यादव भी अब अलग बैनर तले मैदान में हैं। विशेष यादव ने भी नामांकन भरा था लेकिन जब टिकट नहीं मिला तो वह समाजवादी पार्टी की स्टूडेंट विंग यानी समाजवादी छात्रसभा के उम्मीदवार बन गए। अब वह संयुक्त सचिव पद के लिए समाजवादी छात्र सभा के आधिकारिक उम्मीदवार हैं।
कहां फंसी NSUI?
2024 में अध्यक्ष पद पर रौनक खत्री की जीत के चलते लंबे समय के बाद NSUI की वापसी हुई थी लेकिन 2025 में फिर उसे हार मिली। तब अध्यक्ष पद उतरीं जोसलीन नंदिता चौधरी के नाम पर NSUI के ही कई नेता सहज नहीं थे और कहा जा रहा था कि अचानक से उन्हें लाकर उतार दिया गया। यही हाल इस बार वीर चतरथ को लेकर है। टिकट ना मिलने से नाराज दीपांशु शौकीन का कहना है कि वह 3-4 साल से मेहनत कर रहे हैं लेकिन टिकट चंद महीने पहले आए शख्स को दे दिया गया।
2025 में भी इसी तरह उमांसी लांबा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतर गई थीं। उन्हें वोट तो कम मिले लेकिन उन्होंने जोसलीन को भी नहीं जीतने दीया। इसके बाद कन्हैया कुमार और तत्कालीन NSUI अध्यक्ष वरुण चौधरी की खूब आलोचना हुई थी। अब नए अध्यक्ष विनोद जाखड़ की अगुवाई में भी NSUI उसी स्थिति में फंस गई है।
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ऐसे में देखा यह जा रहा है कि चुनाव प्रचार में NSUI बिखरी हुई है और आधार काडर कन्फ्यूज हो गया है। इसके उलट ABVP का पैनल जोरशोर से और एकजुट होकर प्रचार कर रहा है। ABVP के उम्मीदवारों के पक्ष में कई बड़े नेता भी प्रचार करने उतर सकते हैं और माहौल और जोरदार बनाने की तैयारी है। वहीं, NSUI अभी भी अपने उम्मीदवार संभालने में ही फंसी हुई है।
देखना यह होगा कि आपसी मतभेद और खुलेआम हो रही बगावत के बावजूद NSUI जीत जाती है या फिर ABVP को इसका फायदा मिलता है और वह एक बार फिर से DUSU में अपना परचम लहरा पाती है।