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यूपी में कांग्रेस आंखें क्यों तरेर रही है? सपा पर दबाव या मैदान में अकेले उतरेगी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता गठबंधन की उम्मीद कर रहे हैं।

Congress SP alliance

यूपी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन।

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है। चुनाव को देखते हुए बीजेपी और विपक्षी दलों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। गठबंधन को धार देने से लेकर संगठन को एकजुट करने पर काम चल रहा है। साथ ही सभी दल विधानसभा में अपने-अपने उम्मीदवारों की तलाश के लिए मंथन कर रहे हैं। बीजेपी से लेकर सपा और बसपा तक जातिगत समीकरण साध रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में तो सोशल इंजीनियरिंग करके पहले ही फेरबदल हो चुका है। वहीं कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता गठबंधन की उम्मीद कर रहे हैं।

 

हालांकि, दोनों सपा-कांग्रेस की तरफ से गठबंधन की कोई घोषणा नहीं होने के बावजूद दोनों पार्टियों के नेता इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि भविष्य में गठबंधन होगा। गठबंधन को लेकर दोनों दलों की तरफ से कुछ एक संकेत भी मिले हैं।

बड़े भाई की भूमिका में समाजवादी पार्टी

इसमें समाजवादी पार्टी बड़े भाई की भूमिका में है। वह कांग्रेस को सीटें अपनी शर्तों पर देगी, इसमें कांग्रेस को दबाव या फिर जिस भी तरीके से उससे सीटें लेनी है। हालांकि, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को कांग्रेस कुछ ज्यादा फायदा नहीं मिला। मगर, समाजवादी पार्टी जानती है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन से दोनों पार्टियों को फायदा हुआ छा। दोनों के पास मिलकर उत्तर प्रदेश की 80 में से 43 सीटें हैं। उनका तर्क है कि अगले चुनाव के लिए इसे जारी रखना ही सही है।

यूपी सियासत की बातें

सपा-कांग्रेस गठबंधन होने में अभी कई मुश्किलें हैं। मसलन- सीट बंटवारा, सीटों का चुनाव आदि। जिस सपा-कांग्रेस गठबंधन को यूपी में भारी सफलता मिली वह विधानसभा में भी मिलेगी यह पक्का नहीं है क्योंकि राज्य स्तर के चुनाव में गठबंधन से बहुत कम फायदा होता है। समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं को हमेशा से यह शिकायत रही है कि कांग्रेस का अब राज्य में कोई मजबूत आधार नहीं रहा और वह सिर्फ उनकी पार्टी का फायदा उठा रही है।

 

 

समाजवादी पार्टी के एक धड़े का कहना है कि 2017 के खराब नतीजों के बाद, दोनों पार्टियों ने 2022 में अलग-अलग चुनाव लड़ा था और उस चुनाव में कांग्रेस को महज 2.33 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सिर्फ दो सीटें ही मिली थीं। 2017 के चुनावों के बाद भी दोनों पार्टियों के बीच अनबन जारी रही थी। इसी बीच 2019 के मध्य प्रदेश चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को एक भी सीट नहीं दी थी। कांग्रेस अकेले ही चुनाव लड़ी और बीजेपी के हाथों चुनाव हार गई।

कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल का नाम क्यों ले रही?

दरअसल, दिल्ली, बिहार, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विपक्षी पार्टियां चुनाव हार चुकी हैं। बंगाल में तो बीजेपी के चुनाव जीतने के बाद से टीएमसी बिखर चुकी है। कांग्रेस यूपी में ज्यादा से ज्यादा सीटें पाने के लिए समाजवादी पार्टी के सामने दवाब बना रही है कि अगर कांग्रेस उचित सम्मान नहीं मिलता है तो सपा का हाल इन्हीं राज्यों जैसा हो सकता है। इसके साथ ही कांग्रेस का यह भी कहना है कि राहुल गांधी की छवि समय के साथ में मजबूत हुई है, इसलिए भी उसे ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए। इसको लेकर सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और पूर्व विधायक अलका लांबा बयान भी दे चुके हैं। 

कांग्रेस कह क्या रही है?

उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने अपने केंद्रीय नेतृत्व को एक प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि अगर सम्मानजनक सीट बंटवारा नहीं होता है तो पार्टी 403 की 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने में सक्षम है।

 

कांग्रेस के यूपी के लिए प्रभारी अविनाश पांडे ने मीडिया का दिए एक बयान में कहा, 'उत्तर प्रदेश में कांग्रेस-सपा गठबंधन पर फैसला हमारी टॉप लीडरशिप करेगी। हमारी अभी की प्राथमिकता पार्टी संगठन को मजबूत करना है। वोटर लिस्ट में बदलाव के बाद, हम हर जिले में संगठन को मजबूत करने पर ध्यान लगा रहे हैं। हम बीजेपी का अच्छे से मुकाबला करने के लिए सभी 403 सीटों पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।'

अखिलेश यादव का जिलों में दौरा

इन सबके बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के हर जिले का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने इसी रविवार को आगरा का दौरा किया और जिले का फीडबैक लिया। पार्टी ने हर जिले में जाति सर्वे किया है। इसके बाद, अखिलेश यादव टिकट बांटने का फैसला करने से पहले अपने स्थानीय नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए जिलों का दौरा कर रहे हैं।

 

इस बीच कुछ सीनियर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कांग्रेस और सपा के बीच अच्छा तालमेल है। कांग्रेस ने कहा, 'हम सभी सीटों पर तैयारी कर रहे हैं। जब तक हम खुद मजबूत नहीं होंगे, दूसरों की मदद नहीं कर सकते। इसलिए हम दोनों का मजबूत होना जरूरी है। यूपी में राजनीतिक माहौल बदल रहा है। बदलाव आने वाला है।'

आखिरी फैसला अखिलेश-राहुल के हाथ

इन घटनाक्रमों में एक बात तय है कि यूपी में सीट-शेयरिंग पर आखिरी फैसला अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच सीधी बातचीत से ही होगा। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी अपने सहयोगी के लिए 60-80 सीटों पर कर रही है। 


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