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धर्मेंद्र कश्यप का इस्तीफा, कौशल किशोर नाराज! BJP में बढ़ी सियासी हलचल

UP विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण साधने में जुटी बीजेपी को दोहरा झटका लग सकता है। आंवला के पूर्व सांसद धमेंद्र कश्यप ने राज्य सभा में टिकट नहीं मिलने पर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

Former MP Dharmendra Kashyap, former Union Minister Kaushal Kishore

पूर्व सांसद धमेंद्र कश्यप, पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर, Photo Credit : Social Media

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उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सामाजिक समीकरण को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव के टिकट बंटवारे के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के परिवार की नाराजगी भी सार्वजनिक हो चुकी है। एक तरफ कश्यप के सपा में जाने की चर्चाएं तेज हैं तो दूसरी तरफ पासी समाज के बड़े चेहरे कौशल किशोर को लेकर भी बीजेपी में बेचैनी बढ़ी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2027 से पहले बीजेपी का कश्यप-पासी वोटबैंक प्रभावित हो सकता है?

राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी की सूची सामने आने के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने सोशल मीडिया पर 'टाटा-बाय बाय' पोस्ट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद बुधवार को उन्होंने बीजेपी से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी नाराजगी की वजह 2024 के लोकसभा चुनाव से जुड़ी बताई। उनका कहना है कि चुनाव में जिन लोगों ने उनके खिलाफ खुलकर काम किया, उन्हें बाद में पार्टी में महत्वपूर्ण पद दिए गए। ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं होने से वह नाराज हैं।

 

धर्मेंद्र कश्यप ने फिलहाल अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि समर्थकों के साथ बैठक के बाद आगे की राह तय करेंगे। हालांकि, उनके समाजवादी पार्टी में जाने की चर्चा तेज है।  उनके 18 अक्टूबर को सपा में शामिल होने की तैयारी की चर्चा है। धर्मेंद्र कश्यप पहले समाजवादी पार्टी में रह चुके हैं, इसलिए उनकी संभावित वापसी को सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है।

आंवला से दो बार सांसद रह चुके हैं धर्मेंद्र कश्यप

धर्मेंद्र कश्यप रुहेलखंड की राजनीति में कश्यप और अति पिछड़ा वर्ग के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। वह आंवला लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर 2014 और 2019 में लगातार दो बार सांसद चुने गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सपा के नीरज मौर्य से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद से ही पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं चलती रही थीं।

 

राज्यसभा में भेजे जाने की उम्मीद के बीच बीजेपी की सूची में नाम नहीं आने के बाद उनकी नाराजगी खुलकर सामने आई। अब बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद उनका अगला कदम 2027 की चुनावी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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कौशल किशोर के परिवार की नाराजगी भी खुली

उधर पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर को राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद उनके परिवार की नाराजगी सामने आई है। कौशल किशोर के बेटे विकास किशोर ने सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट की, जिसके बाद परिवार के पार्टी से दूरी बनाने की अटकलें तेज हो गईं।कौशल किशोर मोहनलालगंज से पूर्व सांसद रहे हैं और अवध क्षेत्र में बीजेपी के प्रमुख पासी नेताओं में गिने जाते हैं। 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद राज्यसभा के लिए उनका नाम चर्चा में था, लेकिन बीजेपी ने पासी समाज से प्रियंका सिंह रावत को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया। इसके बाद कौशल किशोर परिवार की नाराजगी फिर सामने आई।

कश्यप के बाद पासी वोट पर भी नजर

बीजेपी के लिए चुनौती इसलिए अहम है क्योंकि धर्मेंद्र कश्यप की पहचान कश्यप और अति पिछड़ा वर्ग के बीच प्रभावशाली चेहरे के तौर पर है, जबकि कौशल किशोर पासी समाज के बड़े नेताओं में शामिल हैं। बीजेपी यूपी में गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को अपने साथ जोड़कर चुनावी आधार मजबूत करती रही है।

 

सपा भी 2027 के लिए PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में धर्मेंद्र कश्यप का बीजेपी से अलग होना और सपा में संभावित एंट्री विपक्ष को कश्यप वोटों के बीच सेंध लगाने का मौका दे सकती है। दूसरी तरफ कौशल किशोर परिवार की नाराजगी को पासी वोटबैंक के लिहाज से बीजेपी के लिए चिंता का संकेत माना जा रहा है।

 

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क्या 2027 में बदलेगा वोटों का गणित?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि धर्मेंद्र कश्यप या कौशल किशोर की नाराजगी से पूरा कश्यप-पासी वोटबैंक बीजेपी से खिसक जाएगा लेकिन चुनाव से ठीक पहले दो प्रभावशाली सामाजिक चेहरों की नाराजगी ने पार्टी के सामने चुनौती जरूर खड़ी कर दी है।राज्यसभा टिकट बंटवारे के बाद शुरू हुआ असंतोष अब संगठन और सामाजिक समीकरण दोनों तक पहुंचता दिख रहा है। धर्मेंद्र कश्यप का अगला राजनीतिक कदम और कौशल किशोर का रुख 2027 से पहले बीजेपी, सपा और बसपा—तीनों के लिए अहम हो सकता है।

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