पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कांग्रेस पार्टी में पिछले कई महीनों से जारी गुटबाजी के कारण आखिरकार प्रदेश नेतृत्व में परिवर्तन करना ही पड़ा। परगट सिंह बाजवा को प्रधान और सचिन पायलट को प्रभारी बनाया गया है। अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की प्रधान के पद से छुट्टी हो गई है लेकिन वह पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय नजर आ रहे हैं। इस बीच उनकी पत्नी अमृता वडिंग भी सक्रिय हो गई हैं और उनके एक बयान से मुक्तसर जिले की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
अमृता वड़िंग ने श्री मुक्तसर साहिब से चुनाव लड़ने की इच्छा के संकेत दिए हैं। वह पिछले कुछ दिनों से इस जिले में काफी सक्रिय नजर आ रही हैं और नवरात्रि के दौरान एक कार्यक्रम में उन्होंने श्री मुक्तसर साहिब विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुक्तसर उनका मायका है और यह उनके तथा उनके पति राजा वड़िंग का जन्मस्थान भी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार को यहां के लोगों का हमेशा प्यार और समर्थन मिलता रहा है। अब तक के चुनावों में मिले समर्थन के लिए उन्होंने लोगों का धन्यवाद भी किया। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट के लिए उनकी दावेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
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गिद्दड़बाहा के बाद मिलेगी मुक्तसर से टिकट?
अमृता वड़िंग ने रामलीला के एक कार्यक्रम में कहा, 'मुक्तसर मेरा मायका है और यह मेरे व राजा वड़िंग का जन्मस्थान भी है। हमारे परिवार ने गिद्दड़बाहा, बठिंडा और लुधियाना से चुनाव लड़े, जिनमें मुक्तसर के लोगों का हमेशा बड़ा योगदान रहा। अब तक मैंने इस क्षेत्र की ओर राजनीतिक रूप से ध्यान नहीं दिया था, लेकिन अब यदि लोगों का साथ मिला तो जिस तरह गिद्दड़बाहा का विकास हुआ, उसी तर्ज पर मुक्तसर का विकास करने की इच्छा है।'उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कांग्रेस पार्टी उन्हें इस सीट से चुनाव लड़ने का मौका दे सकती है।
खींचतान शुरू
कांग्रेस पार्टी के अंदर श्री मुक्तसर साहिब विधानसभा सीट को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। जिले की दिग्गज नेता कर्ण कौर बराड़ भी इस सीट को लेकर अपनी बात रख चुकी हैं। वह 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर श्री मुक्तसर साहिब से चुनाव लड़ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, किस उम्मीदवार को टिकट दिया जाएगा, इसका अंतिम फैसला कांग्रेस पार्टी का हाईकमान ही करेगा।
कर्ण कौर बराड़ ने यह भी कहा कि उनका परिवार लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ है और मुक्तसर के लोगों की सेवा करता रहा है। उन्होंने साफ किया कि अगर पार्टी हाईकमान किसी दूसरे उम्मीदवार को टिकट देता है, तो वह पार्टी के फैसले का सम्मान करेंगी और उम्मीदवार का समर्थन करेंगी।
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क्या है कांग्रेस की स्थिति?
मुक्तसर जिले में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति मजबूत नहीं रही है और मौजूदा समय में पार्टी का एक भी विधायक इस जिले से नहीं है। इस जिले में मुक्तसर, मलोट, गिद्दड़बाहा और लंबी विधानसभा सीटें हैं। इन में से गिद्दड़बाहा सीट को राजा वडिंग ने जीता था लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी अमृता इस सीट से उपचुनाव हार गई थी और यह सीट आम आदमी पार्टी के पास चली गई थी।
मुक्तसर सीट पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय हरचरण सिंह बराड़ के परिवार का दबदबा रहा है। साल 2022 में उनकी पुत्रवधू को टिकट भी मिली थी। हालांकि, इस जिले में कांग्रेस सिर्फ गिद्दड़बाहा विधानसभा सीट ही जीत पाई थी। वहीं मुक्तसर में आम आदमी पार्टी के जगदीप सिंह काका बराड़, मलोट में डॉ. बलजीत कौर और लंबी में गुरमीत सिंह खुड्डियां ने जीत दर्ज की थी।