टीवी डिबेट के चर्चित चेहरों में से एक हाफिज गुलाम सरवर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने दावा किया है कि आजम खान की समाजवादी पार्टी में आजम खान,
अखिलेश यादव
के लिए मुसीबत हो गए हैं। वह तय करते हैं कि किस मुस्लिम चेहरे को पार्टी में टिकट मिलेगा, किसे नहीं मिलेगा। उनके फैसलों को काटने की हिम्मत अखिलेश यादव में भी नहीं है।
हाफिज गुलाम सरवर का दावा है कि आजम खान समाजवादी पार्टी में बड़ा चेहरा थे और यह तय करने की हैसियत रखते थे कि किसे टिकट मिलेगा और किसे नहीं। उनका कहना है कि यही बात पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए परेशानी बनी।
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जेल से आकर करोड़ों का सौदा कर गए आजम खान?
हाफिज गुलाम सरवर ने आजम खान के जेल जाने को राजनीतिक मामला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान जब थोड़े समय के लिए जेल से बाहर आए थे, तब उन्होंने पैसे लेकर टिकट बांटे। उनके अनुसार इससे अखिलेश यादव की स्थिति कमजोर हुई है।
आजम खान क्यों फंसे रहे गए?
पत्रकार शुभंकर मिश्र ने एक पॉडकास्ट में उनके साथ इंटरव्यू किया। उन्होंने सवाल किया कि आजम खान ही क्यों फंसे रह गए। उन्होंने जो दावा किया, वह चौंकाने वाला है।
हाफिज गुलाम सरवर:-
योगी जी से उनका व्यक्तिगत भी मामला है। आजम खान एक ऐसा चेहरा हैं समाजवादी पार्टी में जो यह हैसियत रखते थे कि टिकट किसको देंगे और किसको नहीं देंगे मुसलमानों में। तो अखिलेश यादव के लिए यह परेशानी की बात थी। टिकट के नाम पर पैसे मिलते हैं। अभी आजम खान कुछ दिनों के लए बाहर आए थे, 2-3 करोड़ रुपये लेकर चले गए टिकट दे दिया सबको। अब अखिलेश की हालत खराब है टिकट काट नहीं सकते।। इसी चिढ़ में और कि तुम रहो अंदर। आजमगढ़ और पूर्वांचल तक हाथ था।
अखिलेश पर किनारे करने का आरोप
हाफिज गुलाम सरवर का कहना है कि अखिलेश यादव आजम खान को राजनीतिक रूप से खत्म करना चाहते थे, ताकि पार्टी के फैसले सिर्फ वही लें। उनके मुताबिक इसी वजह से आजम खान को किनारे करने की कोशिश हुई। उन्होंने आजम खान के लंबे समय तक जेल में रहने को अन्याय कहा।
'जेल से आए, 2-3 करोड़ लेकर अंदर चले गए'
हाफिज गुलाम सरवर ने कहा, 'टिकट के नाम पर पैसे मिलते हैं, चंदा मिलता है। आजम खान दो-तीन करोड़ लेकर चले गए अंदर। अब पार्टी को जो चंदा मिलता था, अखिलेश जी की हालत खराब है। मुरादाबाद से लेकर के पूर्वांचल तक, आज़म खान का हाथ था।
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मुस्लिम राजनीति पर हाफिज गुलाम सरवर ने क्या कहा?
हाफिज गुलाम सरवर ने कहा कि भारतीय मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं ने समुदाय को सही दिशा नहीं दी। उन्होंने कांग्रेस पर मुस्लिम राजनीति के तुष्टिकरण और दंगों के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उनका यह भी कहना है कि समाजवादी पार्टी समेत दूसरे दल मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने आजम खान और असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति पर भी सवाल उठाए। सरवर ने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में मुसलमानों में सकारात्मक बदलाव आया है। उनके मुताबिक लोग अब सिर्फ राजनीतिक नारों पर नहीं, बल्कि शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दे रहे हैं।
क्या टीवी वाले मौलाना हैं हाफिज गुलाम सरवर?
टीवी बहसों में मौलानाओं की भूमिका पर सवाल उठाते हुए हाफिज गुलाम सरवर ने खुद को सिर्फ एक हाफिज बताया। उन्होंने कहा कि इस्लाम में लव जिहाद जैसी कोई अवधारणा नहीं है और यह राजनीतिक शब्द है। उन्होंने माना कि मुस्लिम समुदाय में भी सैयद, अंसारी और मंसूरी जैसे जातिगत भेदभाव मौजूद हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे लोग टीवी वाला मौलाना कहते हैं, इस्लामिक स्कॉलर कहते हैं, यह मैं नहीं खुद को कहलवाना चाहता हूं।'
मुस्लिमों से कस उम्मीद में हैं हाफिज गुलाम सरवर?
हाफिज गुलाम सरवर ने समुदाय से शिक्षा, इंटरनेट जैसी तकनीक और आधुनिक जीवनशैली अपनाने की अपील की। उन्होंने मदरसों के आधुनिकीकरण की वकालत की और कहा कि वहां गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर की पढ़ाई भी होनी चाहिए।