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अंकिता भंडारी केस: उत्तराखंड में बिखरी कांग्रेस, कलह छोड़कर एक कैसे हो गई है?

उत्तराखंड में कांग्रेस दो गुटों में बंट गई थी। एक गुट हरीश रावत के साथ साथ, दूसरा गणेश गोदियाल के साथ। अब उत्तराखंड कांग्रेस की कलह अंकिता भंडारी के मुद्दे पर खत्म हो गई है।

अंकिता भंडारी को इंसाफ की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन

अंकिता भंडारी को इंसाफ की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन। Photo Credit: PTI

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उत्तराखंड कांग्रेस की कलह, अंकिता भंडारी केस की वजह से खत्म होती नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की राजनीतिक सक्रियता से असहज हुई कांग्रेस, एक बार फिर एक हो रही है। उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, हरीश रावत और हरक सिंह हाल के दिनों में पहली बार किसी मुद्दे पर एकसाथ आए हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखे हैं। कांग्रेस के दिग्गजों के बीच पनपी सियासी कलह ने कांग्रेस आलाकमान की मुश्किलें बढ़ा दी थीं लेकिन अब सभी नेता एक आवाज में अंकिता भंडारी के लिए इंसाफ मांग रहे हैं।

कांग्रेस नेता हरीश रावत और गणेश गोदियाल शुक्रवार को एक मंच पर दिखे। हरीश रावत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हत्या के आरोपी पहले से जेल में हैं, ऐसे में सीबीआई आखिर किस बात की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि अंकिता ने जिस VIP का जिक्र किया था, उसका पता लगाना सीबीआई का काम है। उनके मुताबिक अब तक न राज्य सरकार ने यह कहा है कि ऐसा कोई VIP नहीं है और न सीबीआई ने उसे दोषमुक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पूरे उत्तराखंड को एकजुट होकर अपनी बात रखनी होगी।
 

अंकिता भंडारी केस की वजह से गणेश गोदियाल, उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा और हरीश रावत, तीनों एक जैसी बात कहते नजर आ रहे हैं कि उत्तराखंड की बेटी को न्याय मिलना चाहिए। हरक सिंह रावत ने भी कहा है कि अंकिता भंडारी को न्याय मिलना चाहिए। जो तीन प्रमुख गुट हैं, वे सामूहिक तौर पर मांग कर रहे हैं कि इस केस की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद पर नियुक्त न किया जाए।

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हरीश रावत, कांग्रेस के अगुवा हो गए?

शुक्रवार को गणेश गोदियाल और हरीश रावत साथ आए। हरीश रावत को उनकी अलग समर्थन यात्रा निकालने को लेकर कांग्रेस पार्टी की पहले ही किरकिरी हो चुकी है। कुमारी सैलजा ने इस रैली का विरोध किया था, जवाब तक मांग लिया था। कांग्रेस का आधिकारिक स्टैंड भी हरीश रावत से अलग ही थी। हरीश रावत को यह तक कहना पड़ा था कि अगर पार्टी नहीं चाहती कि वह सड़क पर जाएं तो वह घर बैठ जाएंगे।

हरीश रावत:-
हमारा लक्ष्य पार्टी हित होना चाहिए और मैं अपने कलमी भाइयों और राजनीतिक दोस्तों को स्पष्ट बता देना चाहता हूं कि जिस क्षण हरीश रावत को लगेगा कि मैं पार्टी के लिए भार हो रहा हूं या मुझसे कहा जाएगा कि आप घर बैठिए, मैं बिना पलक झपकाए आदेश का पालन करूंगा। मगर किसी को तो सही आकलन करना पड़ेगा। ऐसा न हो, मैं  अपने आप कोई फैसला लूं और कल मेरे कुछ दोस्तों को यह लिखना पड़े कि हरीश रावत के इस फैसले ने पार्टी की संभावनाओं को कमजोर किया है।

अब हरीश रावत, अंकिता भंडारी केस में पार्टी का नेतृत्व करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता मामले ने सबको सावधान किया है। उनके अनुसार राज्य में सैकड़ों रिजॉर्ट खुल गए हैं, यहां तक कि दूर-दराज के इलाकों में भी। राज्य सरकार के पास इनका कोई आंकड़ा नहीं है और इन पर प्रभावी नियंत्रण भी नहीं दिखता। उन्होंने बताया कि वे यह मुद्दा एक-दो बार पहले भी उठा चुके हैं।

 

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VIP वाला मुद्दा, कांग्रेस को एक कर रहा है?

हरीश रावत ने दावा किया कि अंकिता ने अपने दोस्त से बातचीत में एक VIP का जिक्र किया था। उनका कहना है कि अंकिता के बयान को मृत्यु से पहले का बयान माना जा सकता है, लेकिन सरकार ने इसे अनदेखा किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि माता-पिता के बयानों को एफआईआर का हिस्सा बनाने के बजाय अलग तरह की एफआईआर दर्ज कराई गई। बीआई जांच की घोषणा तब हुई, जब जनता में नाराजगी बढ़ी और दबाव बना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मांग की थी कि जांच सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में हो।

 

अंकिता भंडारी के माता-पिता के इंडिया गेट पर धरने का भी उन्होंने जिक्र किया। रात के समय उन्हें हिरासत में लिए जाने की उन्होंने निंदा की। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने माता-पिता से मुलाकात कर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया। हरीश रावत ने यह भी कहा कि माता-पिता जिस VIP का नाम ले रहे हैं, उसे राजभवन भेजा जाना उत्तराखंड के स्वाभिमान पर चोट है। उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता और कोई इम्युनिटी स्वीकार नहीं है। 

जिस VIP के बारे में ये बातें की जा रहीं हैं, वह दुष्यंत गौतम ही हैं। आरोप लगते रहे हैं कि अंकिता से जिस VIP के लिए सेक्सुअल फेवर मांगा गया था, वह दुष्यंत गौतम थे। उत्तराखंड में कांग्रेस इसे मुद्दा बना रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार रात में अंकिता भंडारी के माता-पिता से इंडिया गेट पर मुलाकात की थी, न्याय के लिए लड़ने का भरोसा दिया था। राहुल गांधी की मुलाकात के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में यह एकजुटता दिखने भी लगी है। 

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कुमारी सैलजा, उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी:-
जहां इंसाफ होना चाहिए, वहां इंसाफ नहीं है। अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांग रहे हैं। पूरा उत्तराखंड, पूरा पहाड़ अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांग रहा है। लेकिन इंसाफ देने के बजाय उल्टा उसके माता-पिता को ही उठाया जा रहा है। इससे भाजपा सरकार की सोच साफ दिखाई देती है। जिस व्यक्ति का नाम इस मामले में सामने आ रहा है, जिसकी सीबीआई जांच की मांग हो रही है, उसे आप राज्यपाल बना देते हैं। संवैधानिक संरक्षण दे देते हैं। आखिर किसलिए? क्या बीजेपी सरकार को डर है कि जांच में उसका नाम सामने आएगा? उसे कानूनी संरक्षण देने के पीछे क्या साजिश है? बीजेपी सरकार का यही अहंकार है कि अपने लोगों पर कभी कार्रवाई नहीं करती। सिर्फ अंकिता को नहीं, उत्तराखंड की उन सभी बेटियों को इंसाफ मिलेगा जिनके साथ अन्याय हुआ है। यह कांग्रेस पार्टी का वादा है।

कैसे खत्म हो रही है कांग्रेस की कलह?

कांग्रेस ने हरीश रावत के मानने के बाद शुक्रवार को एक अहम बैठक भी बुलाई। बैठक में कुमारी सैलजा, हरीश रावत और गणेश गोदियाल भी दिखे। कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अंकिता भंडारी प्रकरण की वजह से उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी पूरी तरह तो नहीं सुलझी है, लेकिन इस संवेदनशील मुद्दे ने अलग-थलग पड़े गुटों को कम से कम साझा मंच पर एकजुट जरूर किया है। 

हरीश रावत, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल जैसे नेता, जिनकी अनबन सार्वजनिक हुई है, कम से कम इस मामले में एकजुट नजर आए हैं। 'कथित वीआईपी' एंगल और सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक साथ सड़कों पर उतरकर कार्यकर्ता, बीजेपी सरकार के खिलाफ आक्रामक प्रदर्शन कर रहे हैं। 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह एकजुटता वैचारिक या संगठनात्मक कलह के स्थाई समाधान के जगह स्थानीयता और क्षेत्रीय अस्मिता के नाम पर सरकार को घेरने की राजनीतिक मजबूरी भी। एक धड़ा यह भी कह रहा है कि ऐसे मुद्दों को जो भुना लेगा, जिसका नाम ज्यादा उछलेगा उसका आलाकमान के सामने कद बढ़ेगा। पद की दावेदारी और नेतृत्व को लेकर अंदरूनी मतभेद और खींचतान की जड़ें पार्टी में अब भी जस की तस बनी हुई हैं लेकिन अंकिता भंडारी के मुद्दे पर पार्टी एकजुटता दखा रही है। 

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अंकिता भंडारी केस है क्या, उत्तराखंड से दिल्ली तक मचा है बवाल?

सितंबर 2022 में ऋषिकेश के पास वनांतरा रिजॉर्ट में काम करने वाली अंकिता भंडारी 18 सितंबर को गायब हो गईं। कुछ दिनों बाद उनकी लाश चिल्ला कैनाल से मिली। रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्या, तत्कालीन बीजेपी नेता विनोद आर्या के बेटे, मैनेजर सौरभ भास्कर और असिस्टेंट मैनेजर अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। तीनों ने कबूल किया कि उन्होंने अंकिता को कैनाल में धकेल दिया था। पुलिस के चार्जशीट के मुताबिक, अंकिता पर मेहमानों को 'स्पेशल सर्विस' देने का दबाव बनाया जा रहा था। यहीं से विवाद शुरू हुआ और अंकिता की हत्या हुई। 


18 सितंबर 2022: अंकिता गायब हुईं थीं। 23 से 24 सितंबर 2022 के बीच में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। अंकिता की लाश एक नहर से मिली थी। दिसंबर 2022 को करीब 500 पेज का चार्जशीट दाखिल  हुआ। हत्या, सबूत मिटाने, यौन उत्पीड़न और इम्मोरल ट्रैफिक एक्ट की धाराएं लगीं। मार्च 2023 को कोर्ट ने आरोप तय किए। 30 मई 2025 को कोटद्वार कोर्ट ने तीनों को दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

इस केस का VIP एंगल है क्या?

चार्जशीट में बताया गया था कि अंकिता को VIP मेहमानों के लिए स्पेशल सर्विस देने को मजबूर किया जा रहा था। 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में उर्मिला सनावर ने वीडियो-ऑडियो जारी किए, जिसमें गट्टू नाम के किसी सीनियर लीडर का जिक्र था। इससे बीजेपी के तत्कालीन उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम का नाम चर्चा में आया। परिवार और कुछ लोग उन्हें ही वह VIP बता रहे हैं। दुष्यंत गौतम ने आरोपों से इनकार किया है और मानहानि का केस भी किया है।

कई दौर के विरोध प्रदर्शनों के बाद जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने VIP एंगल की जांच के लिए CBI की सिफारिश की। CBI अभी इस पहलू की जांच कर रही है। तीनों आरोपियों की सजा हत्या के मामले में हो चुकी है, लेकिन VIP वाला हिस्सा अलग है और अभी साबित नहीं हुआ है।

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दिल्ली से उत्तराखंड तक बवाल क्यों?

12 अक्टूबर 2026 को दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का गवर्नर नियुक्त किया गया। अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी मांग कर रहे हैं कि CBI जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति रोकी जाए। 14 और 15 अक्टूबर को उन्होंने इंडिया गेट पर धरना दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस नेताओं ने उनसे मुलाकात की। धरने की वजह से अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ा गया। उन्होंने 24 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया।

16 अक्टूबर को वे CBI अधिकारियों से मिले। मदद का भरोसा दिया गया है। दुष्यंत गौतम की शपथ 19 अक्टूबर होगी। यह मामला, उत्तराखंड के सबसे चर्चित मामलों में से एक है। पुलिस ने तब रिजॉर्ट का कुछ हिस्सा गिराया भी था। पुलिस का कहना है कि मुख्य हत्या के आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर सजा दिलवाई गई, जबकि VIP एंगल का राज अभी तक अनसुलझा है। परिवार इसका जवाब चाहता है, कांग्रेस इसे मुद्दा बना रही है।


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