एक समय समाजवादी पार्टी की सरकार में कन्नौज की राजनीति में नबाब सिंह यादव का दबदबा किसी बादशाह से कम नहीं था। स्थानीय राजनीति से प्रशासनिक गलियारों तक उनकी पहुंच की चर्चा होती थी, लेकिन बीते कुछ वर्षों में हालात ऐसे बदले कि कभी सत्ता के केंद्र में रहने वाले नबाब सिंह यादव और उनके भाई नीलू यादव को गैंगस्टर एक्ट के मामले में आठ-आठ वर्ष की सजा सुनाई गई है। दोनों भाइयों के खिलाफ गंभीर धाराओं में 61 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं और उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति भी प्रशासन कुर्क कर चुका है।
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छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
कन्नौज जिले के अड़गापुर गांव निवासी नबाब सिंह यादव ने पीएसएम डिग्री कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद जीतकर राजनीति में कदम रखा था। वर्ष 2000 में जब अखिलेश यादव ने कन्नौज लोकसभा सीट के उपचुनाव में जीत दर्ज की तब नबाब सिंह समाजवादी पार्टी से जुड़े। पार्टी ने उन्हें समाजवादी लोहिया वाहिनी का जिलाध्यक्ष बनाया, जिसके बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया।
समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर नबाब सिंह कन्नौज सदर ब्लॉक के प्रमुख बने। बाद में उनके भाई नीलू यादव भी ब्लॉक प्रमुख चुने गए। उस दौर में नबाब सिंह का राजनीतिक प्रभाव इतना बढ़ गया था कि कई बड़े नेता और अधिकारी भी उनके संपर्क में रहते थे। डिंपल यादव के लोकसभा चुनाव अभियान में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
सत्ता बदलते ही बदली तस्वीर
उत्तर प्रदेश में भाजपा की दोबारा सरकार बनने के बाद नबाब सिंह का राजनीतिक प्रभाव कमजोर पड़ने लगा। समाजवादी पार्टी के कई नेता उनसे दूरी बनाने लगे। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वह कई बार सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ चुनावी मंच साझा करते दिखाई दिए।
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दुष्कर्म के आरोप के बाद बढ़ीं मुश्किलें
11 अगस्त 2024 को एक 15 वर्षीय किशोरी ने नबाब सिंह यादव पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद पुलिस ने उन्हें उनके कॉलेज परिसर से हिरासत में लिया था। मामले में किशोरी की बुआ का नाम भी सामने आया। पुलिस ने दुष्कर्म और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। बाद में साक्ष्य छिपाने के आरोप में नबाब सिंह के भाई नीलू यादव को भी गिरफ्तार किया गया।
33 करोड़ की संपत्ति हो चुकी कुर्क
दुष्कर्म प्रकरण के आधार पर पुलिस ने नबाब सिंह यादव, नीलू यादव और एक महिला के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की। जिला प्रशासन ने चंदन होटल, चौधरी चंदन सिंह डिग्री कॉलेज, कई प्लॉट, मकान और अन्य संपत्तियों को कुर्क कर लिया। प्रशासन अब तक करीब 33 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुका है।
सूत्रों के अनुसार नबाब सिंह और उनके परिवार से जुड़ी कई अन्य संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। प्रशासन बैनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल रहा है।
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61 से अधिक मुकदमों का सामना
नबाब सिंह यादव और उनके भाई नीलू यादव के खिलाफ हत्या, रंगदारी, मारपीट, भूमि विवाद और अन्य गंभीर धाराओं में 61 से अधिक मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। शासन और प्रशासन स्तर पर इन मुकदमों की निगरानी की जा रही है तथा लंबित मामलों में तेजी से गवाही कराई जा रही है।
जेल में रहते हुए जीता बार एसोसिएशन चुनाव
नबाब सिंह का प्रभाव उस समय भी चर्चा में रहा जब जेल में बंद रहते हुए उन्होंने बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा और जीत भी लिया। उनके समर्थित कई अन्य प्रत्याशी भी चुनाव जीतने में सफल रहे। इसके बाद प्रशासन ने उन्हें कन्नौज जेल से बांदा जेल और नीलू यादव को कौशांबी जेल स्थानांतरित कर दिया था।
गैंगस्टर एक्ट में आठ साल की सजा
हाल ही में गैंगस्टर एक्ट के मामले में अदालत ने नबाब सिंह यादव और उनके भाई नीलू यादव को आठ-आठ वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 20-20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं सह-आरोपी एक महिला को छह वर्ष कारावास की सजा सुनाई।
बेटियों की सुरक्षा से समझौता नहीं: असीम अरुण
कन्नौज सदर से विधायक एवं समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार बेटियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। कानून के सामने सभी बराबर हैं और अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे सजा अवश्य मिलेगी।