कांग्रेस की अगुवाई में इंडिया ब्लॉक के नेता शुक्रवार को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग लगाने वाले हैं। विपक्ष 3.30 बजे नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास 10 राजाजी मार्ग पर मॉक संसद सत्र आयोजित कर रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांकेतिक महाभियोग चलाया जाएगा। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग लोकतांत्रिक सुरक्षा उपायों को कमजोर कर रहा है। विपक्ष मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (
SIR
) में चुनाव आयोग पर मनमाने ढंग से फैसले लेने का आरोप लगा रहा है।
यह सत्र पहले से तय पटकथा के हिसाब से चलेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश करेंगे। इसके बाद कार्यवाही दूसरे प्रतिभागियों के लिए खोल दी जाएगी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष
राहुल गांधी
अंतिम भाषण देंगे। लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार सत्र की अध्यक्षता करेंगी। अभी साफ नहीं है कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
या CEC की भूमिका कोई निभाएगा या नहीं।
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पहले अशोका होटल और रामलीला मैदान में मांगी थी जगह
विपक्ष का कहना है कि पहले अशोका होटल में मॉक सत्र की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद रामलीला मैदान में भी अनुमति नहीं दी गई। रामलीला मैदान में विपक्ष 1 नवंबर को बड़ी रैली करने वाला है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि अनुमति न देना विपक्ष की राजनीतिक लामबंदी को रोकने की कोशिश है। उनके मुताबिक बार-बार जगह बदलना इस बात का हिस्सा है कि सरकार उनके अभियान में बाधा डाल रही है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पहले योजना थी कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों और विधि विशेषज्ञों को बुलाया जाए। कम से कम पांच पूर्व जजों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया। शुरुआती योजना में तीन सांसदों से प्रस्तुति कराने की बात थी लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने इस पर दोबारा सोचा है।
कांग्रेस की तैयारी क्या है?
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सभी विपक्षी सांसद, पार्टी नेता, सिविल सोसायटी के जाने-माने लोग और छात्र नेता शामिल होंगे। वे लोग भी आएंगे जिनके नाम SIR में कटे बताए जा रहे हैं। ऐसे लोगों को अपना अनुभव रखने का मौका मिलेगा। उनके साथ विपक्षी सांसद और कानूनी विशेषज्ञ भी अपनी बात रखेंगे। विपक्ष इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग पर अपने आरोप सामने रखना चाहता है।
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क्यों ऐसी कवायद कर रहा है विपक्ष?
विपक्ष 1 नवंबर की रैली के लिए माहौल बनाना चाहता है। विपक्ष इस रैली को वोट चोरी के खिलाफ बता रहा है। विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहा है। विपक्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर उन्हें हटाने की मांग भी कर चुका है। दूसरी मांग 2023 के उस कानून को रद्द करने की है, जो CEC और चुनाव आयुक्तों को सुरक्षा देता है। विपक्ष का आरोप है कि CEC ने SIR के दौरान सामूहिक अधिकारों का एकतरफा और मनमाना इस्तेमाल किया।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इतना गुस्सा क्यों?
चुनाव आयुक्त को संसद से हटाया जा सकता है। इसकी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी है। CEC या कोई चुनाव आयुक्त राष्ट्रपति को लिखित इस्तीफा देकर भी पद छोड़ सकता है। कांग्रेस ने पिछले महीने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात कही थी। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि ज्ञानेश कुमार अपने दो साथी आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हैं, मनमानी करते हैं, राज्यों के निर्वाचन आयोग में गैर जरूरी दखल देते हैं। अब इस रिपोर्ट को आधार बनाकर देशभर में प्रदर्शन हुए हैं।