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पूरे बिहार में जब्त हुई थी जमानत, 3 महीने में दोनों सदनों में जन सुराज की एंट्री

नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने पर 0 पर दिखने वाली जन सुराज साल भर के भीतर बिहार के दोनों सदनों में पहुंच गई है। अब दोनों सदनों में उसके पास एक-एक सदस्य हैं।

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर, File Photo Credit: PTI

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चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर पिछले कई साल से बिहार में पसीना बहा रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत झोंकने वाले प्रशांत किशोर सरकार बनाने का दावा कर रहे थे लेकिन उनकी जन सुराज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। तब कयास लगाए जा रहे थे कि शायद अब प्रशांत किशोर बिहार छोड़ देंगे। इसके उलट ना तो प्रशांत किशोर ने बिहार छोड़ा और ना ही उनकी पार्टी ने काम करना बंद किया। साल भर के भीतर और पिछले 3 महीने के अंदर ही अब बिहार के दोनों सदनों में जन सुराज की एंट्री हो चुकी है। खुद प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक बन गए हैं और अब उनकी ही पार्टी के सुरेश प्रसाद राय विधान पार्षद यानी MLC बन गए हैं।  

 

2 अक्तूबर 2024 को औपचारिक तौर पर पार्टी बनाने वाले प्रशांत किशोर को 14 नवंबर 2025 को गहरा धक्का लगा था। उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीती थी और सिर्फ 2 सीटों पर जमानत बचा पाई थी। तब माना जा रहा था कि अगले चुनाव यानी 2030 तक प्रशांत किशोर का बिहार में टिके रहना बड़ी चुनौती है। वह कई पार्टियों के नेताओं से मिलने भी जाते रहे और उनके बारे में कई तरह के कयास भी लगे। फिर जब वह पटना की एक कोठी छोड़कर आश्रम में शिफ्ट हुए तब भी उनकी आलोचना हुई लेकिन अब मामला पलट गया है।

बांकीपुर और MLC चुनाव ने पलटी किस्मत

प्रशांत किशोर को यह मौका मिला बीजेपी के एक फैसले से। बांकीपुर के विधायक और बिहार सरकार में मंत्री नितिन नवीन को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद नितिन नवीन ने पहले तो मंत्री पद छोड़ा। फिर उन्हें राज्यसभा भेजा गया तो उन्होंने विधायक पद से भी इस्तीफा दे दिया। यह प्रशांत किशोर के लिए ऐसा मौका था जिसे बहुत बड़ा रिस्क माना जा रहा था। 2025 में चुनाव ना लड़ने की रणनीतिक भूल करने वाले प्रशांत किशोर ने इस बार चुनाव लड़ने का एलान कर दिया।

 

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यह सीट वैसी थी जहां 1990 से लगातार जीतती आ रही थी। पहले इस सीट का नाम पटना सेंट्रल था। तब सुशील कुमार मोदी तीन बार और अरुण कुमार सिन्हा दो बार चुनाव जीते थे। जब से इस सीट का नाम बांकीपुर हुआ तब से लगातार चार बार नितिन नवीन यहां से चुनाव जीते थे। ऐसे में प्रशांत किशोर के सामने बहुत बड़ी चुनौती थी।

 

इस चुनाव में नितिन नवीन के साथ-साथ पूरी बीजेपी ने अपनी ताकत झोंक दी थी। प्रशांत किशोर को कांग्रेस के स्थानीय नेताओं का समर्थन मिलने लगा था। आरजेडी ने 2025 में हारने वाली रेखा कुमारी को फिर से टिकट दिया था। नतीजे आए तो हर कोई हैरान रह गया। पहला चुनाव लड़ रहे प्रशांत किशोर ने 64,151 वोट हासिल करके बीजेपी के नीरज कुमार और आरजेडी की रेखा कुमारी को हराकर चुनाव जीत लिया।

 

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MLC चुनाव में भी जन सुराज ने बड़ा दांव खेला। बीजेपी में टिकट ना मिलने से नाराज सुरेश प्रसाद राय जन सुराज में शामिल हो गए। जन सुराज ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और उन्होंने यह चुनाव जीतकर विधान परिषद में भी इस पार्टी की एंट्री करा दी। बता दें कि पिछली बार आफाक अहमद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जन सुराज के समर्थन से चुनाव जीते थे। इस बार जन सुराज ने उन्हें अपने सिंबल पर उतारा लेकिन वह चुनाव हार गए।   

MLC चुनाव में जन सुराज का क्या हाल रहा?

जन सुराज ने एक बार फिर से किसी गठबंधन के बिना ही अपने 8 उम्मीदवार उतारे थे। यानी जन सुराज ने स्नातक और शिक्षक वर्ग की सभी 4-4 सीटों पर अपने कैंडिडेट लड़ाए थे। इनमें से जीत एक को ही मिली लेकिन दूसरे उम्मीदवार अनुज सिंह भी भरपूर चर्चा में रहे। यह अनुज सिंह वही हैं जिनके समर्थन में विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध किया। इसी चक्कर में वह पार्टी से भी निकाल दिए गए।   

 

भले ही जन सुराज को एक ही सीट पर जीत मिली लेकिन उसके उम्मीदवार कई सीटों पर अच्छे-खासे वोट बटोरने में कामयाब हुए। उदाहरण के लिए, पटना स्नातक निर्चाचन क्षेत्र से जेडीयू के नीरज कुमार चुनाव जीते हैं और उन्हें 19,930 वोट मिले। वहीं, तीसरे नंबर पर रहे जन सुराज के अनुज सिंह को 11,278 वोट मिले। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जहां कांग्रेस को सिर्फ 21 वोट मिले वहीं जन सुराज की दिव्या ज्योति 1571 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहीं। आरजेडी के संजीव कुमार ने 4487 वोट पाकर जीत हासिल की।

 

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8 में से एक सीट जीतने वाली जन सुराज के 4-5 उम्मीदवार तीसरे नंबर पर रहे। दो उम्मीदवार चौथे नंबर पर रहे। जहां जन सुराज चौथे नंबर पर भी रही वहां भी उसे संतोषजनक वोट जरूर मिले हैं। यह दिखाता है कि जन सुराज ने हर सीट पर अपना वोटबैंक तैयार किया है और भविष्य की राजनीति के लिए अभी भी उसे खारिज नहीं किया जा सकता है। 

विधानसभा चुनाव में कैसा रहा था जन सुराज का प्रदर्शन?

बिहार में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में जन सुराज ने 243 में से 238 उम्मीदवार उतारे थे। दरअसल, कई उम्मीदवारों के हट जाने या नामांकन खारिज होने के चलते यह संख्या कम हुई थी वरना पार्टी ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद चुनाव में उतरे ही नहीं थे। माना जाता है कि यही उनकी रणनीजिक भूल साबित हुई और पार्टी के पक्ष में उतने वोट नहीं पड़े। 

 

238 में से सिर्फ 2 सीटें ऐसी थीं जहां जन सुराज की जमानत बची थी। बाकी की 236 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई थी। बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशांत किशोर की पार्टी को कुल 16.77 लाख यानी 3.4 प्रतिशत वोट मिले थे। इसकी जिम्मेदारी खुद प्रशांत किशोर ने ली थी और आगे और मेहनत की थी। तब माना जा रहा था कि प्रशांत किशोर अब शांत पड़ सकते हैं। हालांकि, एक साल के भीतर ही अब जन सुराज की हैसियत बदल गई है।   


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