श्रीनगर में बुधवार को सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) सड़कों पर उतरीं। यह 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहला बड़ा राजनीतिक विरोध प्रदर्शन है। दोनों पार्टियों ने एक दूसरे पर जम्मू कश्मीर के लोगों से किए गए वादे पूरे न करने का आरोप लगाया। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने केंद्र सरकार पर राज्य का दर्जा बहाल न करने का आरोप लगाया जबकि बीजेपी ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार अपने चुनावी वादे पूरे करने में नाकाम रही।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के मंत्री विधायक नेता और कार्यकर्ता राजबाग स्थित गिंदुन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास जमा हुए। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग को लेकर जवाहर नगर में बीजेपी मुख्यालय का घेराव करने का ऐलान किया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बीजेपी दफ्तर की ओर बढ़ने से पहले ही रोक दिया।
बीजेपी ने पुलिस पर अपने विधायकों से बदसलूकी करने का आरोप लगाया। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक्स पर लिखा कि उसके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोका गया जबकि बीजेपी को सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करने दिया गया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस क्यों सड़कों पर उतरी है?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक और मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा, 'बीजेपी ने राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा नहीं किया। चुनाव हुए दो साल हो चुके हैं फिर भी राज्य का दर्जा बहाल नहीं हुआ। नेशनल कॉन्फ्रेंस तब तक विरोध जारी रखेगी जब तक 5 अगस्त 2019 को छीना गया राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटियां वापस नहीं मिल जातीं।'
प्रदर्शन करने बैठे नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता। Photo Credit: PTI
BJP ने घेर लिया सचिवालय
बीजेपी नेता और कार्यकर्ता उमर अब्दुल्ला सरकार के खिलाफ लाल चौक पर घंटाघर के पास जमा हुए। प्रदर्शनकारियों ने सिविल सचिवालय का घेराव करने की योजना बनाई थी लेकिन पुलिस ने उन्हें हरि सिंह हाई स्ट्रीट के पास रोक दिया। विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोग मुश्किलों का सामना कर रहे हैं लेकिन सरकार समस्याएं दूर करने के लिए कुछ नहीं कर रही।
बीजेपी का कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी की सरकार निष्पक्ष भर्ती के बजाय नौकरियां बेच रही है, स्थानीय निकाय चुनाव कराने से बचा है, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और बिजली दरों में बढ़ोतरी के भी आरोप लगाए गए हैं। सुनील शर्मा ने उमर अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि वह सिर्फ राज्य के दर्जे का मुद्दा दोहराते हैं और प्रशासन पर ध्यान नहीं देते। उमर अब्दुल्ला को चुनौती दी कि वह अपनी सीट गांदरबल से इस्तीफा दें और राज्य के दर्जे के मुद्दे पर दोबारा चुनाव लड़ें।