उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (NDA) के प्रमुख सहयोगी दलों निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल (एस) के नेताओं ने दिल्ली में एक मंच पर आकर गठबंधन के भीतर अपनी ताकत का संकेत दिया है। तीनों दलों के नेताओं ने आगामी चुनाव में सीटों की हिस्सेदारी को लेकर अपनी दावेदारी भी मजबूत कर दी है। इस मुलाकात को यूपी की बदलती सियासी तस्वीर में अहम कदम माना जा रहा है।
20 अगस्त को दिल्ली में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद, SBSP अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और अपना दल (एस) के नेता आशीष पटेल एक मंच पर नजर आए। तीनों नेताओं ने खुद को एनडीए का मजबूत सहयोगी बताते हुए गठबंधन में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर संदेश दिया। इस दौरान आगामी चुनाव में अधिक सीटों की मांग का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। सहयोगी दलों की नजर अब उन सीटों पर है, जहां उनके सामाजिक आधार और संगठन की मजबूत पकड़ मानी जाती है।
35-35 सीटों की दावेदारी से बढ़ी हलचल
निषाद पार्टी, SBSP और अपना दल (एस) की ओर से बीजेपी के सामने करीब 35-35 सीटों की दावेदारी की बात कही जा रही है। सहयोगी दलों की नजर खासतौर पर पिछड़ा, अनुसूचित जाति और जनजातीय वर्ग के बीच अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों पर है। ऐसे में सीटों के बंटवारे को लेकर आने वाले दिनों में एनडीए के भीतर बातचीत अहम होने वाली है।
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विधानसभा चुनाव 2022 में बीजेपी ने निषाद पार्टी को 16 सीटें दी थीं, जिसमें उसके 11 प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। अपना दल (एस) को 17 सीटें मिली थीं और उसके 12 प्रत्याशी विजयी हुए थे। वहीं SBSP ने उस चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। SBSP को 18 सीटें मिली थीं, जिनमें उसके छह प्रत्याशी जीतने में सफल रहे थे। अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं और तीनों दल एनडीए के साथ हैं। यही वजह है कि सहयोगी दल इस बार पिछले चुनाव की तुलना में अधिक सीटों की मांग को लेकर दबाव बना रहे हैं।
पंचायत चुनाव में भी दिखेगी गठबंधन की रणनीति
आगामी पंचायत चुनाव को भी सहयोगी दल बीजेपी के साथ अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के अवसर के तौर पर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि इन चुनावों में दल अपने-अपने सामाजिक आधार वाले क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम करेंगे। इसके बाद विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर दबाव और बढ़ सकता है।
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राजभर के तेवर से पहले ही गरमा चुका है माहौल
SBSP अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पहले भी गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर अपने तेवर दिखाते रहे हैं। वहीं निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद आरक्षण समेत अपने प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार के सामने मांग उठाते रहे हैं। अपना दल (एस) भी अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में है।
ऐसे में दिल्ली की यह बैठक महज औपचारिक मुलाकात न होकर आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखी जा रही है। बीजेपी के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपने सहयोगी दलों को साथ रखते हुए सीटों के बंटवारे का ऐसा फार्मूला तैयार करे, जिससे गठबंधन की एकजुटता भी बनी रहे और सभी दलों को उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी भी मिल सके।