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नीतीश चुपचाप राज्यसभा चले गए, खामोश क्यों रही JDU की पूरी टॉप लीडरशिप?

इन दिनों एक सवाल उठ रहा है कि जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्ताफा दिया तो जेडीयू के दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवे नंबर के नेता क्या कर रहे थे

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एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार। Photo Credit (@SanjayJhaBihar)

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जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अध्यक्ष और पार्टी के सबसे बड़े नेता नीतीश कुमार ने इसी महीने की 14 तारीख को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वह इससे पहले उन्होंने 10 अप्रैल को को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली थी। राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने संसद भवन में उनके चैंबर में संक्षिप्त समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ के साथ ही यह साफ हो गया था कि नीतीश कुमार बिहार के दो दशक तक मुख्यमंत्री का पद छोड़ देंगे।

 

नीतीश कुमार ने जैसे ही 14 अप्रैल को बिहार के सीएम पद से इस्तीफा दिया, पूरे मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर बिहार की जनता में मायूसी छा गई। उनके इस्तीफे से लोग भावुक दिखाई दिए। साथ ही विदाई समारोह के दौरान तो कई मंत्री, विधायक और अधिकारी रोते हुए दिखाई दिए। नीतीश ने जब से राज्यसभा के सांसद के तौर पर संसद जाने की बात कही थी, तब से ही अशोक चौधरी जैसे जेडीयू नेता उनकी मान-मनौव्वल कर रहे थे कि वह बिहार छोड़कर दिल्ली ना जाएं।

चुपचाप राज्यसभा चले गए नीतीश कुमार

कार्यकर्ताओं में निराशा और कन्फ्यूजन था और उनको यह समझ नहीं आ रहा था कि नीतीश कुमार बिहार छोड़कर दिल्ली क्यों जा रहे हैं। वह सवाल पूछ रहे थे कि आगे पार्टी का नेतृत्व कौन करेगा? मगर, इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल उठता है कि जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा से लेकर उनके इस्ताफे के बीच जेडीयू के दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवे नंबर के नेता क्या कर रहे थे? दरअसल, इस घटनाक्रम में यह देखने को मिला कि नीतीश कुमार चुपचाप राज्यसभा के सदस्य बन गए और जेडीयू की पूरी टॉप लीडरशिप खामोश रही।

 

यह भी पढ़ें: 'सम्राट चौधरी CM तो बन गए, PMO से अधिकारी चलाएंगे बिहार,' तेजस्वी यादव का दावा

 

टॉप लीडरशिप ने क्या किया?

जनता दल यूनाइटेड में इस समय नीतीश कुमार के बाद सबसे ताकतवर नेता पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय और सांसद संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, मंत्री विजय चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी हैं। नीतीश ने जैसे ही दिल्ली जाने की इच्छा जाहिर की, वैसे ही मीडिया इन ताकतवर नेताओं के पास पहुंच गई। मीडिया से बात करते हुए कई बार इन नेताओं ने अपने नेता नीतीश कुमार को रोकने की कोशिश नहीं की बल्कि सभी ने एक सुर में कहा कि यह 'उनका' (नीतीश कुमार) का फैसला है और हम उसका सम्मान करते हैं। 

 

यह भी पढ़ें: देश के नाम संबोधन, पीछे तिरंगा, मकसद चुनावी, PM को किन बातों पर घेर रहा विपक्ष?

नीतीश कुमार के नेतृत्व में भरोसा

हालांकि सभी ने इस दौरान भावनात्मक रूप से गुरज रहे पार्टी कार्यकर्ताओं को संभालने के लिए रणनीति बनाई और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जेडीयू में शामिल करवाया। पार्टी में शामिल होने के बाद निशांत ने पटना में कार्यकर्ताओं से कहा, 'घबराइए मत, हम और पापा अभी भी हैं।' निशांत को देखकर पार्टी कार्यकर्ताओं में थोड़ी देर के लिए जोश जरूर आया। इसके अलावा जेडीयू की टॉप लीडरशिप ने एक सुर में नीतीश कुमार के नेतृत्व में भरोसा जताया। 

उठे कई सवाल

इन नेताओं के कदमों को लेकर विपक्ष ने खूब आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने नीतीश कुमार की हां में हां मिलाई लेकिन किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। साथ ही बीजेपी के ईशारे पर काम करने का भी आरोप लगाया। बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी ने तो यहां तक कह दिया कि जेडीयू की पूरी टॉप लीडरशिप ने बीजेपी के इशारे पर नीतीश कुमार कमजोर किया है। यही आरोप जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने भी लगाया है।


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